भारतीय भाषाओं का महत्व 

भारतीय भाषाओं का महत्व 

सुरेश सरदाना नोएडा

भारत एक बहुभाषी देश है | यहां अलग अलग राज्यों और समुदायों में अलग अलग भाषाएं बोली जाती हैं क्योंकि भाषा केवल संचार का ही माध्यम नहीं है अपितु संस्कृति, परंपरा और सामाजिक पहचान का भी मुख्य बिंदु है और हां भारतीय संविधान ने भी इस भाषा विविधता को मान्यता दी है |

भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता दी है जिसमे हिंदी, बंगाली, मराठी, तमिल, तेलगु, उर्दू, पंजाबी, गुजराती, मलयालम, कन्नड़ तथा ओड़िया आदि विभिन्न भाषाएं हैं तथा संविधान के 343 अनुच्छेद में हिंदी को राजभाषा व अंग्रेजी को सहायक भाषा रखा गया है तथा अनुच्छेद 346 व 347 के अंतर्गत राज्यों को अपनी क्षेत्रीय भाषा चुनने की स्वतंत्रता दी गई है |

भाषा में ही हमारे देश के विभिन्न हिस्सों की सांस्कृतिक व सामाजिक पहचान है | साहित्यिक परम्परा, लोककथाएं, लोकगीत, नृत्य और संगीत को जीवित रखने में भाषा का विशेष योगदान है | भारतीय भाषाओं में उपलब्ध साहित्य, शिक्षा और शोध कार्यों को समृद्ध करता है | हिंदी, बंगाली, तमिल, और संस्कृति जैसी भाषाओं में साहित्य का विशाल भंडार है जो भारतीय दर्शन, इतिहास और संस्कृति को संरक्षित करता है | राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा देने पर जोर दिया गया है ताकि बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़े | भाषा का व्यापार और अर्थव्यवस्था में भी विशेष योगदान है | विभिन्न भाषाओं का ज्ञान होने से व्यापार और आर्थिक गतिविधियों में सहूलियत मिलती है | बहुभाषी कौशल रखने वाला व्यक्ति निजी और सरकारी क्षेत्रों में अधिक अवसर प्राप्त कर सकते हैं | क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञापन और मीडिया का विकास व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण है |

अब हम हिंदी को इस परिपेक्ष में देखते हैं | हिंदी भारत में सबसे अधिक बोली जाने भाषा है तथा इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त है | संविधान ने भी अपने 343 अनुच्छेद में इसे 

 

देवनागरी लिपि के रूप में राजभाषा के रूप में स्वीकार किया है | केंद्र सरकार के अधिकतर कार्य हिंदी और अंग्रेजी में होते हैं | अनुच्छेद 351 इसके प्रचार, प्रसार की व्याख्या करता है | यह एक सम्पर्क भाषा के रूप में भी कार्य करती है | भारत की 44% जनता की यह पहली भाषा है | नेपाल, मारीशस, फिजी, सुरीनाम, त्रिनिदाद और टोबागोआदि देशों में भी यह बोली जाती है |

इसके अतरिक्त यह भारतीय सिनेमा की प्रमुख भाषा है | इससे इसका वेश्विक प्रभाव भी बढ़ा है | टेलीविज़न, समाचार पत्र और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी इसका बोलबाला है | इंटरनेट, सोशल मीडिया पर हिंदी सामग्री की मांग तेजी से बढ़ रही है इससे यह डिजिटल युग में और प्रासंगिक हो गई है |

हिंदी को संयुक्त राष्ट्र में आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने में भारत सरकार प्रयासरत है | विश्व हिंदी सम्मेलन के माध्यम से हिंदी के प्रचार -प्रसार को बढ़ावा दिया जा रहा है | विभिन्न देशों में भी हिंदी भाषा की शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा रहा है |

अब प्रश्न यह उठता है की हिंदी का विकास अन्य भारतीय भाषाओं के समान और उनके संरक्षण के साथ होना चाहिए या नहीं | उत्तर हां मे है | कुछ  गैर हिंदी भाषी राज्य इसे लागू करने का विरोध करते हैं | इसलिए इसका प्रचार जबरदस्ती ना करके स्वाभाविक रूप से किया जाना चाहिए | बहुभाषावाद को बढ़ावा देना आवश्यक है ताकि सभी भारतीय भाषाएं समान रूप से विकसित हो सकें | 

उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है की भारतीय भाषाएं ना केवल संचार का साधन है अपितु हमारी सांस्कृतिक धरोहर और समाजिक ताने बाने का अभिन्न अंग भी हैं | हिंदी भारत की प्रमुख भाषा होते हुए भी अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान करते हुए आगे बढ़े तभी यह देश की एकता अखंडता को बनाए रखने में मददगार होगी | हिंदी के प्रचार -प्रसार के साथ अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और विकास को भी प्रोत्साहित करना होगा |

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