अजा ( प्रबोधिनी ) एकादशी
सतीश शर्मा 
अजा ( प्रबोधिनी ) एकादशी – अजा (प्रबोधिनी) एकादशी भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को कहते हैं। इस एकादशी को और भी कई नामों से पुकारा जाता है जैसे प्रबोधिनी, जया, दामिनी अजा, इस दिन विष्णु भगवान की उपासना कर रात में जागरण करना चाहिए व्रत के करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
अजा एकादशी की कथा – एक बार सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के सपने में ऋषि विश्वामित्र को अपना राज्य दान कर दिया। अगले दिन ऋषि विश्वामित्र दरबार में गए तो राजा ने सचमुच में अपना सारा राजपाट सौंप दिया। ऋषि ने अपनी दक्षिणा की 500 स्वर्ण मुद्राएं और मांगी दक्षिणा चुकाने के लिए राजा को अपनी पत्नी पुत्र और खुद को बेचना पड़ा। राजा हरिश्चंद्र को डोम ने खरीदा था। उसने हरिश्चंद्र को श्मशान में नियुक्त किया और उन्हें यह कार्य सौंपा कि वह मृतकों के संबंधियों से कर ले कर अंतिम संस्कार करने दे। उन्हें यह कार्य करते हुए जब अधिक वर्ष बीत गए तब अचानक ही उनकी भेंट गौतम ऋषि से हुई राजा ने गौतम ऋषि को अपनी सारी आपबीती सुनाई तब उन्हें इसी अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने यह व्रत कथा करना आरंभ कर दिया इसी बीच उसके पुत्र रोहतास को सर्प के डसने के कारण स्वर्गवास हो गया। जब उनकी पत्नी अपने पुत्र का अंतिम संस्कार करने हेतु शमशान पर अपने पुत्र कि लाश का वहाँ लेकर आई तो राजा हरिश्चंद्र ने उसे श्मशान का कर मांगा। परंतु उसके पास शमशान का कर्ज चुकाने के लिए कुछ भी नहीं था। उसने अपनी चुनरी का आधा भाग देकर शमशान का कर्ज चुकाया। तत्काल आकाश में बिजली चमकी प्रभु ने प्रकट होकर बोले “महाराज! तुमने सत्य को जीवन में धारण करके उच्चतम आदर्श प्रस्तुत किया है। अतः तुम्हारी कर्तव्यनिष्ठा धन्य है। तुम इतिहास में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के नाम से अमर रहोगे। भागवत कृपा से रोहित जीवित हो गया। तीनों प्राणी चिरकाल तक सुख भोगकर अन्त मे स्वर्ग को चले गए।
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ॐ नमो भगवते।ॐ नमो भगवते।🙏🙏
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।🙏
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।।
ओम नमो भगवते वासुदेवाय।
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