राष्ट्रीय विकास के लिए जरूरी है –  नागरिक कर्तव्य का पालन

A lone traveler stands on a hilltop, gazing over a vast mountain landscape under a clear blue sky.

राष्ट्रीय विकास के लिए जरूरी है –  नागरिक कर्तव्य बोध

रजत बागची

परम पूज्य सरसंघचालक जी के द्वारा उद्घोषित पंच परिवर्तन में नागरिक कर्तव्य बोध का बिंदु भी युक्त है I यह आलेख इस बिंदु पर चर्चा के लिए लिखा गया है Iजैसा कि पाठक जानते हैं कि यह बिंदु तीन शब्दों को समाहित करके बना है I नागरिक,कर्तव्य,तथा बोध I इस आलेख में हम इन तीनों शब्दों पर चर्चा करेंगे और अंततः इस बिंदु के प्रयोजन पर प्रकाश डालने का प्रयत्न करेंगे I

नागरिक कौन है ? नागरिकता की परिभाषा क्या है ? नागरिकता किसी व्यक्ति और राज्य के बीच एक कानूनी संबंध है, जिसमें व्यक्ति को विशेष अधिकार और कर्तव्य प्राप्त होते हैं, जैसे वोट देने, संवैधानिक पदों पर नियुक्ति, मौलिक अधिकारों का लाभ और राज्य के प्रति निष्ठा । बदले में, नागरिक से अपेक्षा की जाती है कि वह समुदाय के प्रति सक्रिय रूप से योगदान दे और समाज में सकारात्मक बदलाव लाए । किसी देश में रहने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति अनिवार्य रूप से उस देश का नागरिक है। किसी देश के नागरिक जो किसी विदेशी देश में रहते हैं, उन्हें एलियंस कहा जाता है। उनके अधिकार और कर्तव्य राजनीतिक संधियों और उस देश के कानूनों द्वारा निर्धारित होते हैं जहाँ वे रहते हैं।

 संयुक्त राज्य अमेरिका में, एलियंस को अमेरिकी नागरिकों की तरह ही कानूनों का पालन करना और कर चुकाना अनिवार्य है। लंबे समय तक रहने की कानूनी अनुमति प्राप्त करने के लिए उन्हें अमेरिकी सरकार के साथ पंजीकरण कराना होगा। कानूनी एलियंस को कानून के तहत सुरक्षा और अदालतों का उपयोग करने का अधिकार है। वे संपत्ति के मालिक भी हो सकते हैं, व्यवसाय कर सकते हैं और सरकारी स्कूलों में पढ़ सकते हैं। लेकिन एलियंस वोट नहीं दे सकते या सरकारी पद नहीं संभाल सकते। कुछ राज्यों में, उन्हें नागरिक बनने तक कुछ व्यवसायों को करने की अनुमति नहीं है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के कानून के अनुसार, एक गैर-नागरिक नागरिक वह व्यक्ति होता है जो न तो नागरिक है और न ही विदेशी, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रति उसकी स्थायी निष्ठा होती है। इस श्रेणी के लोगों के पास नागरिकों के कुछ अधिकार होते हैं, लेकिन सभी नहीं। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका के किसी क्षेत्र के निवासियों को मतदान का अधिकार नहीं हो सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के गैर-नागरिक नागरिकों में अमेरिकी समोआ के प्रशांत द्वीप समूह के वे लोग शामिल हैं जिनका जन्म 1900 में उस क्षेत्र पर संयुक्त राज्य अमेरिका के कब्जे के बाद हुआ था। (स्रोत: न्यू बुक ऑफ नॉलेज)I

अब चर्चा करते हैं कर्तव्य की I नागरी कर्तव्य वे कानूनी या नैतिक जिम्मेदारियां हैं जो एक नागरिक अपने समाज, समुदाय और सरकार के प्रति रखता है, जैसे मतदान करना, कानून का पालन करना, करों का भुगतान करना और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना । भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख है, जो नागरिकों के लिए अनिवार्य हैं लेकिन उनके उल्लंघन पर कोई कानूनी दंड नहीं है। 

नागरिक कर्तव्य का अर्थ

यह एक नागरिक की अपने देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी और दायित्व है। 

यह समाज के उत्थान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देता है। 

नागरिक कर्तव्यों के उदाहरण

कानून का पालन करना: देश के संविधान और कानूनों का सम्मान करना और उनका पालन करना। 

मतदान करना: लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना और मतदान करना। 

राष्ट्र के विकास और संचालन के लिए करों का भुगतान करना। 

राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना: राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना। 

पर्यावरण की रक्षा करना: पर्यावरण और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और उनकी सुरक्षा में योगदान देना। 

न्याय में सहायता करना: अदालत में गवाह के रूप में गवाही देना । 

भारतीय संदर्भ में नागरिक कर्तव्य :भारतीय संविधान के अनुसार नागरिकों के 11 मौलिक कर्तव्य हैं I

भारतीय संविधान के भाग 4ए में नागरिकों के लिए मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख है, जो सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर 42वें संशोधन 1976 द्वारा जोड़े गए थे। 

इनमें संविधान का पालन करना, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना, भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखना, देश की रक्षा करना, धर्म, भाषा, वर्ग आदि के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी भारतीयों के बीच सद्भाव और एकता को बढ़ावा देना शामिल है। 

2002 के 86वें संविधान संशोधन ने एक और मौलिक कर्तव्य जोड़ा, जिसमें छह से चौदह वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करने की बात कही गई। 

भारतीय संविधान के ये कर्तव्य नैतिक रूप से बाध्यकारी हैं, लेकिन ये अधिकार के समान न्यायोचित नहीं हैं, यानी इनके उल्लंघन पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं हो सकती। 

अब बारी है बोध की I जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, यदि कोई नागरिक राष्ट्रगान के समय दक्ष अवस्था में खड़े होकर सम्मान नहीं दे रहा है , तो शायद वह जेल नहीं जाएगा I परंतु एक जागृत नागरिक को ऐसे अवसर पर टोकने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है क्योंकि वह स्वत: ही अपने कर्तव्य का पालन करता है I

अर्थात,नागरिक कर्तव्य बोध का बिंदु,न केवल कर्तव्य के प्रति निष्ठावान होने की प्रेरणा देता है,बल्कि सामाजिक समरसता,पर्यावरण, राष्ट्रीय एकता व विकास इत्यादि को भी अपने में समाहित करता है I बोध  का अर्थ है ‘ज्ञान’, ‘समझ’, या ‘जागरूकता’, जो अक्सर किसी चीज़ को गहराई से जानने और अनुभव करने से जुड़ा होता है। इस बोधशक्ति का अलख  यदि हमारे राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक के  हृदय में प्रज्वलित हो जाए तो   राष्ट्रगीत की निम्नलिखित पंक्तियां सफल हो जाएगी :

वंदे मातरम्,

सप्तकोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले

द्विसप्तकोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले

अबला केन मा एत बले

बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं

रिपुदलवारिणीं मातरम्!

 

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