दीपावली पूजन,मुहर्त,मंत्र व विधि
सतीश शर्मा 
दिवाली 20 अक्टूबर, 2025
दिवाली मुख्य त्यौहारों में से एक है। इस वर्ष दिवाली 20 अक्टूबर, 2025 को मनाई जाएगी। दिवाली भगवान श्री राम के अयोध्या वापसी की खुशी में मनाई जाती है। इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा का विधान है।
दिवाली पूजा विधि – स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन प्रात: काल स्नान आदि से निवृत्त होकर सभी देवताओं की पूजा निम्न विधि से करनी चाहिए। घर में शाम के समय पूजा घर में लक्ष्मी और गणेश जी की नई मूर्तियों को एक चौकी पर स्वस्तिक बनाकर तथा चावल रखकर स्थापित करना चाहिए। मूर्तियों के सामने एक जल से भरा हुआ कलश रखना चाहिए। इसके बाद मूर्तियों के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर शुद्धि मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे मूर्ति पर, परिवार के सदस्यों पर और घर में छिड़कना चाहिए। गुड़, फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, पंचामृत, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला आदि सामग्रियों का प्रयोग करते हुए पूरे विधि- विधान से लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। इनके साथ- साथ देवी सरस्वती, भगवान विष्णु, काली मां और कुबेर देव की भी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय 11 छोटे दीप तथा एक बड़ा दीप जलाना चाहिए। सभी छोटे दीप को घर के चौखट, खिड़कियों व छतों पर जलाकर रखना चाहिए तथा बड़े दीपक को रात पर जलता हुआ घर के पूजा स्थान पर रख देना चाहिए।
पूजा में आवश्यक साम्रगी
महालक्ष्मी पूजा या दिवाली पूजा के लिए रोली, चावल, पान- सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, घी या तेल से भरे हुए दीपक, कलावा, नारियल, गंगाजल, गुड़, फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, पंचामृत, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला, शंख, लक्ष्मी व गणेश जी की मूर्ति, थाली, चांदी का सिक्का, 11 दिए आदि वस्तुएं पूजा के लिए एकत्र कर लेना चाहिए।
लक्ष्मी मंत्र
लक्ष्मी जी की पूजा के समय निम्न मंत्र का लगातार उच्चारण करते रहना चाहिए:
ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम: ॥
संकल्प मंत्र
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः, श्रीमद् भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य श्रीब्रह्मणो द्वितीये पर्राधे श्रीश्वेतवाराहकल्पे, वैवस्वतमन्वन्तरे, (अपने स्थान का नाम) मासे (अपने मास का नाम), शुक्ल/कृष्ण पक्षे, (तिथि) तिथौ, (वार) वासरे, (नक्षत्र) नक्षत्रे, (योग) योगे, (करण) करणे, एवं गुण विशेषण विशिष्टायां अस्यां (तिथि) तिथौ, (अपना नाम), (अपना गोत्र) गोत्रोत्पन्नः, अहं गृहे, (देवता का नाम) प्रीत्यर्थं, (पूजा/अनुष्ठान का उद्देश्य) करिष्ये” ।
हे भगवान विष्णु! मैं (अपना नाम), अपने गोत्र (अपना गोत्र) के साथ, तिथि पर (तिथि, नक्षत्र, वार) एक निश्चित कार्य करने का संकल्प लेता/लेती हूँ।, आज (तिथि, नक्षत्र, वार) हमारे शुभ और पवित्र दिन पर, हम (अपना नाम और गोत्र) (पूजा/अनुष्ठान का उद्देश्य) करने का मैं /हम संकल्प लेता / लेते हैं/हूँ ।
स्वस्ति वाचन
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः। स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षँ शान्तिः, पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:। वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:, सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥
महान कीर्ति वाले इंद्र हमारा कल्याण करें, विश्व के ज्ञान स्वरूप पूषादेव हमारा कल्याण करें। जिसका हथियार अटूट है, ऐसे गरुड़ भगवान हमारा मंगल करें। बृहस्पति हमारा मंगल करें। द्युलोक (स्वर्ग) शांतिदायक हो, अन्तरिक्ष (आकाश) शांतिदायक हो, पृथ्वी शांतिदायक हो, जल शांतिदायक हो, औषधियां शांतिदायक हों। वनस्पति शांतिदायक हों, विश्वेदेवा शांतिदायक हों, ब्रह्म शांतिदायक हो, सब कुछ शांतिदायक हो और वास्तव में जो शांति है, वह मुझे प्राप्त हो।
गणेश पूजन
वक्रतुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
स्नानाम समरयारी, वस्त्रानि समर्पयामि,चन्दन समर्पयामि,अक्षत समर्पयामि , नैवेद्यम समर्पयामि, मिष्ठानम समर्पयामि, पुष्पानी समर्पयामि, धुपम दीपम दर्शनी, नमस्कार करिष्यते
अम्बिका पूजन
ॐ जयंती मंगला काली, भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री, स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।
स्नानाम समरयारी, वस्त्रानि समर्पयामि,चन्दन समर्पयामि,अक्षत समर्पयामि , नैवेद्यम समर्पयामि, मिष्ठानम समर्पयामि, पुष्पानी समर्पयामि, धुपम दीपम दर्शनी, नमस्कार करिष्यते
नवग्रह पूजन
“ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहा शान्तिकरा भवन्तु”
स्नानाम समरयारी, वस्त्रानि समर्पयामि,चन्दन समर्पयामि, अक्षत समर्पयामि , नैवेद्यम समर्पयामि, मिष्ठानम समर्पयामि, पुष्पानी समर्पयामि, धुपम दीपम दर्शनी, नमस्कार करिष्यते
सूर्य मंत्र
ॐ सूर्याय नमः ।।
शिव मंत्र
ॐ नमः शिवाय।
कर्पूर गौरं: करुणावतारं: संसार सारं: भुजगेन्द्र हारम्: । सदा वसन्तं हृदयारविन्दे: भवं भवानीसहितं नमामि: । ।
विष्णु मंत्र
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं:। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्:।।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्: । वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्: ।।
कलश पुजन
ॐ अपां पतये वरुणाय नमः’
स्नानाम समरयारी, वस्त्रानि समर्पयामि, चन्दन समर्पयामि,अक्षत समर्पयामि , नैवेद्यम समर्पयामि, मिष्ठानम समर्पयामि, पुष्पानी समर्पयामि, धुपम दीपम दर्शनी, नमस्कार करिष्यते
लक्ष्मी पूजा
स्नानाम समरयारी, वस्त्रानि समर्पयामि,चन्दन समर्पयामि, अक्षत समर्पयामि , नैवेद्यम समर्पयामि, मिष्ठानम समर्पयामि, पुष्पानी समर्पयामि, धुपम दीपम दर्शनी, नमस्कार करिष्यते
आरती श्री लक्ष्मी जी की
जय लक्ष्मी माता, (मैया) जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेक्त हर विष्णु विधाता ॥ॐ॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी रुद्राणी तू ही जग माता।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ॐ॥
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको व्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता ॥ॐ॥
तुम पाताल-निवासिनी, तू ही है शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव प्रकाशिनी, भवनिवि की प्राता ॥ॐ॥
जिस घर तुम रहती, तहें सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥ॐ॥
तुम विन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव सब तुमसे आता ॥ॐ॥
शुभ गुण मंदिर सुन्दर क्षीरोदधि जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहीं पाता ॥ॐ॥
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता ॥ॐॐॐ॥
नमस्कार मंत्र
महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं सुरेश्वरी।
हरि प्रिये नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं दयानिधे।।
अंत में क्षमा याचना
हे मां, मैं आवाहन और विसर्जन करना नहीं जानता और पूजा करने का ढंग भी नहीं जानता, कृपया मुझे क्षमा करें। हे परमेश्वरी, मैं दिन-रात अनगिनत अपराध करता हूँ। मुझे अपना दास समझकर मेरे उन अपराधों को क्षमा करें। हे महालक्ष्मी देवी, मेरी पूजा मंत्र, क्रिया और भक्ति से हीन थी। फिर भी, मेरे द्वारा जो भी पूजा की गई है, कृपया उसे पूर्ण करें, स्विकार करें , आपकी कृपा से मेरी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो। बोलो लक्ष्मी माता की जय ।
सभी को टीका करें व अलावा बांधे और बड़ों का आशिर्वाद ले व छोटे बच्चों को आशीर्वाद दे।
दीपावली पूजा मुहूर्त
दीपावली के दिन प्रदोषकाल में माता लक्ष्मी जी की पूजा होती है। मान्यता है कि इस समय लक्ष्मी जी की पूजा करने से मनुष्य को कभी दरिद्रता का सामना नहीं करना पड़ता। इस साल पूजा का शुभ मुहूर्त है-
वृषभ लग्न – 19-09 से 21-05
महानिशा काल पूजा मुहूर्त: रात्रि 11-38 से लेकर रात को 12-31 तक
चौघडिया मुहर्त-
अमृत 06-24 से 07-49 तक ,शुभ 09-14 से 10-40 तक , चर 13-30 से 14-56 तक लाभ 14-56 से 16-21 तक , चर 17-46 से 07-21 तक,लाभ 10-30 से 00-05 तक
नोट-21 अक्टूबर को आप अपने व्यापारिक प्रतिष्ठानों में दिन में पूजा कर सकते हैं । मुहूर्त के लिए आप मुझे निम्नलिखित नंबर पर संपर्क करें। सभी मुहर्त नोएडा के अनुसार हैं अपने स्थान के मुहर्त हेतु निम्नलिखित से संपर्क करे ।
नोट ;- उपरोक्त के विषय मे अधिक जानकारी हेतु व जन्म कुंडली बनवाने ओर दिखाने के लिए सम्पर्क करे शर्मा जी 9312002527
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं





