माघ मास व माघी पूर्णिमा का महत्व व करने योग्य कार्य
सतीश शर्मा 
माघ मास हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी महीना है, जिसमें स्नान, दान, तपस्या और भगवान विष्णु/सूर्य/शिव की पूजा का विशेष महत्व है, जो पापों का नाश कर आरोग्य, सुख और समृद्धि दिलाता है, खासकर प्रयागराज में कुंभ स्नान और मकर संक्रांति व वसंत पंचमी जैसे पर्वों के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है। माघ महीने में खासकर माघी पूर्णिमा और अमावस्या पर पवित्र नदियों (गंगा, संगम) में स्नान का विशेष पुण्य मिलता है, यदि ऐसा संभव न हो तो घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें। तिल का दान करें, तिल से बने पदार्थ (जैसे तिल-गुड़) खाना और पानी में तिल डालकर स्नान करना स्वास्थ्य और पुण्य के लिए अत्यंत लाभकारी है होता है ।
माघ मास भगवान विष्णु (माधव रूप), सूर्य देव और शिव की उपासना के लिए उत्तम है, जिससे सुख-समृद्धि आती है। तिल, गुड़, कंबल,गरम कपढ़े आदि का दान करने से पुण्य मिलता है और शनि दोष शांत होता है। संकष्टी चतुर्थी (संतान प्राप्ति के लिए), षटतिला एकादशी (स्वास्थ्य), मौनी अमावस्या (पाप-नाश) और वसंत पंचमी जैसे पर्व इसी माह पड़ते हैं। यह महीना मन को एकाग्र करने, नकारात्मकता दूर करने और आंतरिक शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें (गंगाजल मिलाकर)।सूर्य देव को अर्घ्य दें।तिल और गुड़ का सेवन करें।
भगवान विष्णु, कृष्ण, शिव या हनुमान जी की पूजा करें।गरीबों को भोजन कराएं और दान-पुण्य करें।
माघ मास आत्म-शुद्धि, आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति का महीना है, जिसमें किए गए कार्य कई गुना अधिक फलदायी होते हैं।
माघ पूर्णिमा का महत्व – माघ पूर्णिमा का महत्व पवित्र स्नान, दान और तपस्या में है, जिससे सभी पाप धुलते हैं, मोक्ष मिलता है और सुख-समृद्धि आती है, क्योंकि इस दिन देवता भी धरती पर आकर संगम में स्नान करते हैं और भगवान विष्णु की कृपा बरसती है; यह कल्पवास का अंतिम दिन और संत रविदास की जयंती भी है, जो इसे अत्यधिक फलदायी बनाती है। इस दिन पवित्र नदियों, खासकर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है, ऐसा शास्त्रों में कहा गया है। माना जाता है कि इस दिन सभी देवता मनुष्य रूप धारण कर पृथ्वी पर आते हैं और त्रिवेणी संगम में स्नान करते हैं, इसलिए यह स्नान अत्यंत शुभ होता है। माघ पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा और आराधना करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन तेल, घी, अन्न, वस्त्र, तिल और कंबल का दान करना बहुत फलदायी माना जाता है, जिससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं। माघ मास के कल्पवास का अंतिम दिन माघ पूर्णिमा ही होता है, जो इस दिन के महत्व को और बढ़ा देता है। पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन तर्पण और पिंडदान करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
ओर अंत मे पवित्र नदियों में स्नान करें (विशेषकर प्रयागराज, हरिद्वार, वाराणसी में)।भगवान विष्णु, लक्ष्मी और शिव जी की पूजा करें।सत्यनारायण व्रत कथा सुनें।जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और अन्य वस्तुएं दान करें।जप, तप और ध्यान करें। माघ पूर्णिमा वाले दिन आध्यात्मिक उन्नति, आंतरिक शुद्धि और दैवीय आशीर्वाद पाने का एक सुनहरा अवसर होता है।
महान संत रविदास का जन्म भी इसी दिन हुआ था, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।





