बटेंगे या घटेंगे तो कटेंगे
ललित शंकर हरिद्वार 
पिछले दिनों यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत के बहुसंख्यक समाज को एक करने के लिये एक नारा दिया था,बटेंगे तो कटेंगे।इस नारे की सत्यता को समझकर हिन्दू समाज ने चुनाव में सहभागिता की थी।ऐसा ही एक नारा विश्व हिंदू परिषद की कार्यकारिणी मण्डल की सदस्य साध्वी प्राची ने जनसंख्या संतुलन का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि बटेंगे तो कटेंगे की तरह हम घटेंगे तो भी कटेंगे।उन्होंने बंग्लादेश का उदाहरण देकर वँहा हिन्दू जनसंख्या कम होने के कारण ही ऐसी स्थिति आ गई है कि हिन्दू भागने को मजबूर हो रहा है।साध्वी प्राची का बयान कोई राजनीति के प्रेरित नही है बल्कि एक सच्चाई है।अतीत पर ध्यान देंगे तो स्पष्ठ होगा कि आजादी के समय मुस्लिम समाज ने मजहब के नाम पर अलग देश की मांग करते हुये कहा था कि हमे हमारी जनसंख्या अधिक होने के कारण अलग देश चाहिए।उस समय देश के नेतृत्व ने उनकी ये बात स्वीकार करके मुस्लिमों के लिए अलग देश दे दिया।अलग देश मे भी एक पूर्वी पाकिस्तान एक पश्चिमी पाकिस्तान बना।पूर्वी पाकिस्तान आज बंग्लादेश है।दोनों देशों में उस समय हिन्दू आबादी 20 प्रतिशत के आसपास थी जो आज घटकर पांच प्रतिशत से भी कम हो गई है।समझने की बात ये है कि जैसे हिन्दू आबादी पाकिस्तान व बंग्लादेश में कम हुई उनपर अत्याचार शुरू हो गए।पाकिस्तान बंग्लादेश की स्थिति जगजाहिर है।अगर इन दोनों इस्लामिक देशों में कोई हिन्दू बच्ची बड़ी हो जाये और उसपर किसी मुसलिम की निगाह पड़ जाए तो फिर गायब हो जाती है।इसी भय से वँहा छोटी छोटी लड़कियों को घरों में छिपाया जाता है।पढ़ाई तो बहुत दूर की बात है।कई घटनाएं ऐसी भी हुई है कि शादियों में से ही दुल्हन को जबरन उठाकर इस्लाम स्वीकार कराकर किसी ऐसे मुस्लिम से शादी की गई जो अधिक आयु का था या फिर अपराधी था।साध्वी प्राची ने जो कहा है अगर उसपर ध्यान नही गया तो धीरे धीरे भारत की स्थिति भी ऐसी होने में समय नही लगेगा।वेसे भारत के कई स्थान ऐसे हो चुके हैं।पश्चिम उत्तरप्रदेश ,बंगाल के कई शहर, में तो ऐसी घटनाएं होने भी लगी है।हिंदुओ की घटती आबादी कंही न कंही उन्ही के लिए समस्या बनती जा रही है।कभी गांधार नाम से जाना जाने वाला अफगानिस्तान हिंदुओ की घटती आबादी के कारण आज अफगानिस्तान नाम से जाना जाता है।भारत का स्वर्ग महर्षि कश्यप की नगरी कश्मीर में आबादी घटने के कारण हिंदुओ को अपनी संपत्ति तथा जवान बहु बेटियों को छोड़कर भागना पड़ा।हिन्दू आबादी घटने के कारण जो स्थिति कश्मीरी हिंदुओ की हुई वो जगजाहिर है।आजादी के बाद हिन्दू समाज की आबादी रोकने के लिए उस समय की सरकार नशबंदी कराने का कानून लाई ,जिसको बड़ी शक्ति के साथ केवल भारत के बहुसंख्यक समाज पर ही लागू किया गया।ऐसे नारे दिए गए बच्चे दो ही अच्छे,छोटा परिवार सुखी परिवार ।समझने की बात ये है कि ये नारे केवल हिन्दू क्षेत्र में ही लगाए जाते थे।ये सत्य है कि बढ़ती आबादी देश के लिए ठीक नही है,परन्तु देश के बहुसंख्यक हिन्दू समाज की घटती हुई आबादी उससे ज्यादा हानिकारक है।भविष्य को ध्यान में रखते हुए।कश्मीर बंगाल पश्चिमी उत्तरप्रदेश की स्थिति को स्मरण करते हुय हिन्दू समाज को विचार करना ही होगा।क्योंकि वर्तमान समय लोकतंत्र का है,इसमे जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी होती है।साध्वी प्राची का ये कथन भारत के हिन्दू समाज के लिए एक संदेश है।जागे नही तो भागे जाओगे।





