सितंबर मास 2025 का पंचांग

सितंबर मास 2025 का पंचांग 

भारतीय व्रतोत्सव सितंबर -2025

दि. 2- रामदेवजी का मेला (नवल.),दि. 3- पद्मा एकादशी व्रत, जलझूलनी मेला, श्रीचार-भुजा नाथ गणगौर (मेवाड़),दि. 4- वामन जयंती,दि. 5- प्रदोष व्रत,दि. 7- सत्य व्रत, खग्रास चन्द्रग्रहण, प्रौष्ठपदी पूर्णिमा श्राद्ध, भागवत सप्ताह समाप्त,दि. 10-गणेश चतुर्थी व्रत,दि. 14-श्री महालक्ष्मी व्रत समाप्त, कालाष्टमी,दि. 17-संक्रांति पुण्य, इंद्रा एकादशी व्रत,दि. 19-प्रदोष व्रत,दि. 20-मास शिवरात्रि,टि 21-अमावस्या पण्य,दि.22-नवरात्र प्रारम्भ, अग्रसेन जयंती,दि.25-विनायक चतुर्थी व्रत,दि. 26-उपांग ललिता जयंती,दि.29-सरस्वती आवाहन,दि.30-दुर्गाष्टमी, महाष्टमी व्रत, सरस्वती पूजन  

पितृ पक्ष – अश्वनी मास कृष्ण पक्ष में श्राद्ध की तिथियां

अपने पूर्वज पितरों के प्रति श्रद्धा भावना रखते हुए आश्विन कृष्ण पक्ष में पितृ तर्पण एवं श्राद्धकर्म करना नितान्त आवश्यक है। इससे स्वास्थ्य, समृद्धि, आयु, सुख-शान्ति, वंशवृद्धि एवं उत्तम सन्तान की प्राप्ति होती है। श्रद्धापूर्वक किए जाने के कारण ही इसका नाम ‘श्राद्ध’ है। इस बात का भी ध्यान रहे कि श्राद्धकृत्य ‘अपराह्नकाल’ व्यापिनी तिथि में किए जाते हैं।

 

दिनांक  श्राद्ध तिथि  दिनांक  श्राद्ध तिथि 
07  प्रोष्ठपदी/पूर्णिमा श्राद्ध 08  प्रतिपदा का श्राद्ध
09  द्वितीया का श्राद्ध 10  तृतीया का श्राद्ध
10  चतुर्थी का श्राद्ध. 11 भरणी श्राद्ध,पंचमी का श्राद्ध
12 षष्ठी का श्राद्ध 13 सप्तमी का श्राद्ध
14 अष्टमी का श्राद्ध 15 नवमी/सौभाग्यवतीनां श्राद्ध
16  दशमी का श्राद्ध 17 एकादशी का श्राद्ध
18  द्वादशी/संन्यासीनां श्राद्ध 19  त्रयोदशी/मघा श्राद्ध
20  चतुर्दशी/अपमृत्यु श्राद्ध 21 अमावस, सर्वपितृ,अज्ञात,मृत्युतिथि वालों का श्राद्ध

 

मूल विचार सितंबर -2025

दि. 31 अग. को 17/27 से दि. 2 को 21/51 तक, दि. 9 को 18/07 से दि. 11 को 13/57 तक, दि. 18 को 6/32 से दि. 20 को 8/05 तक, दि. 28 को 1/08 से दि. 30 को 6/16 बजे तक गण्ड मूल नक्षत्र हैं।

ग्रह स्थिति सितंबर -2025

दि. 2 बुधास्त पूर्व,दि. 13 तुला में मंगल,दि. 14 सिंह में शुक्र,दि. 15 कन्या में बुध,दि. 16 कन्या में सूर्य

पंचक विचार सितंबर -2025   

पंचक विचार -(धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से रेवती नक्षत्र तक) पंचको में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना मकान दुकान आदि की छत डालना चारपाई पलंग आदि बुनना,दाह संस्कार,बांस की चटाई दीवार प्रारंभ करना आदि स्तंभ रोपण तांबा पीतल तृण काष्ट आदि का संचय करना आदि कार्यों का निषेध माना जाता है समुचित उपाय एवं पंचक शांति करवा कर ही उक्त कार्यों का संपादन करना कल्याणकारी होगा ध्यान रहेगा  पंचर नक्षत्रों का विचार मात्र उपरोक्त विशेष कृतियों के लिए ही किया जाता है विवाह मंडल आरंभ गृह प्रवेश प्रवेश उपनयन आदि मुद्दों से तो पंचक नक्षत्रका प्रयोग शुभ माना जाता है पंचक विचार- दिनांक 06 को 11-21 से दिनांक 10 को 16-03 बजे तक पंचक है | 

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227

भद्रा विचार सितंबर -2025 

भद्रा काल का शुभ अशुभ विचार – भद्रा काल में विवाह मुंडन, गृह प्रवेश, रक्षाबंधन आदि मांगलिक कृत्य का निषेध माना जाता है परंतु भद्रा काल में शत्रु का उच्चाटन करना,स्त्री प्रसंग में,यज्ञ करना,स्नान करना,अस्त्र शस्त्र का प्रयोग,ऑपरेशन कराना, मुकदमा करना,अग्नि लगाना,किसी वस्तु को काटना,भैस,घोड़ा व ऊंट संबंधी कार्य प्रशस्त माने जाते हैं सामान्य परिस्थिति में विवाह आदि शुभ मुहूर्त में भद्रा का त्याग करना चाहिए परंतु आवश्यक परिस्थितिवश अतिआवश्यक कार्य भूलोक की भद्रा ,भद्रा मुख छोड़कर कर भद्रा पुच्छ में शुभ कार्य कर सकते है

दि 3 को 16/08 से दि. 4 को 4/22 तक, दि. 7 को 1/41 से 12/43 तक, दि. 10 को 5/03 से 15/38 तक, दि. 13 को 7/23 से 18/13 तक, दि. 16 को 12/53 स दि. 17 को 0/22 तक, दि. 19 को 23/37 से दि. 20 को 11/53 तक, दि. 25 को 20/19 से दि. 26 को 9/33 तक, दि. 29 को 16/31 से दि. 30 को 5/20 बजे तक भद्रा है। 

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227

सर्वार्थ सिद्धि योग सितंबर -2025 

दैनिक जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शीघ्र ही किसी  शुभ मुहूर्त का अभाव हो,किंतु शुभ मुहर्त के लिए अधिक दिनों तक रुका ना जा सकता हो तो इन सुयोग्य वाले मुहर्तु  को सफलता से ग्रहण किया जा सकता है | इन से प्राप्त होने वाले अभीष्ट फल के विषय में संशय नहीं करना चाहिए यह योग हैं सर्वार्थ सिद्धि,अमृत सिद्धि योग एवं रवियोग | योग्यता नाम तथा गुण अनुसार सर्वांगीण सिद्ध कारक  है| 

दिनांक प्रारंभ दिनांक समाप्त
05 06-05 05  23-38
09 06-07 09 18-07
11 06-08 11 13-57
13  10-11 14  06-09
15 06-10 15  07-31
18 06-11 18 06-32
21 09-32 22 06-13
26  22-08 27 06-17
29 03-54 29 06-17

 

चौघड़िया मुहूर्त 

चौघड़िया मुहूर्त देखकर कार्य या यात्रा करना उत्तम होता है। एक तिथि के लिये दिवस और रात्रि के आठ-आठ भाग का एक चौघड़िया निश्चित है। इस प्रकार से 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात मानें तो प्रत्येक में 90 मिनट यानि 1.30 घण्टे का एक चौघड़िया होता है जो सूर्योदय से प्रारंभ होता है|

सुर्य उदय- सुर्य अस्त सितंबर -2025 

 

दिनांक  01  05  10  15 20  25  30
उदय  06-01  06-05 06-07 06-11 06-12 06-14 06-17
अस्त  18-40 18-36 18-30 18-24 18-18 18-12 18-06

 

 राहू काल 

 राहुकाल -राहुकाल दक्षिण भारत की देन है,दक्षिण भारत में राहु काल में कृत्य करना अच्छा नहीं माना जाता, राहु काल में शुभ कृतियों में वर्जित करने की परंपरा अब हमारे उत्तरी भारत में भी अपनाने लगे हैं राहुकाल प्रतिदिन सूर्यादि वारों में भिन्न-भिन्न समय पर केवल डेढ़ डेढ़ घंटे के लिए घटित होता है |

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227

  मांगलिक दोष विचार परिहार

वर अथवा कन्या दोनों में से किसी की भी कुंडली में 1,4,7,8 व 12 भाव में मंगल होने से ये मांगलिक माने जाते हैं,मंगली से मंगली के विवाह में दोष न होते हुए भी जन्म पत्रिका के अनुसार गुणों को मिलाना ही चाहिए यदि मंगल के साथ शनि अथवा राहु केतु भी हो तो प्रबल मंगली डबल मंगली योग होता है | इसी प्रकार गुरु अथवा चंद्रमा केंद्र हो तो दोष का परिहार भी हो जाता है |इसके अतिरिक्त मेष वृश्चिक मकर का मंगल होने से भी दोष नष्ट हो जाता है | इसी प्रकार यदि वर या कन्या किसी भी कुंडली में 1,4,7,9,12 स्थानों में शनि हो केंद्र त्रिकोण भावो में शुभ ग्रह, 3,6,11 भावो में पाप ग्रह हों तो भी मंगलीक दोष का आंशिक परिहार होता है, सप्तम ग्रह में यदि सप्तमेश हो तो भी दोष निवृत्त होता है |

स्वयं सिद्ध मुहूर्त

 स्वयं सिद्ध मुहूर्त चैत्र शुक्ल प्रतिपदा वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय तृतीया आश्विन शुक्ल दशमी विजयदशमी दीपावली के प्रदोष काल का आधा भाग भारत में से इसके अतिरिक्त लोकाचार और देश आचार्य के अनुसार निम्नलिखित कृतियों को भी स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है बडावली नामी देव प्रबोधिनी एकादशी बसंत पंचमी फुलेरा दूज इन में से किसी भी कार्य को करने के लिए पंचांग शुद्धि देखने की आवश्यकता नहीं है परंतु विवाह आदि में तो पंचांग में दिए गए मुहूर्त व कार्य करना श्रेष्ठ रहता है।

जन्म कुंडली व हस्त रेखा विशेषज्ञ , जन्म कुंडली बनवाने व दिखाने के लिए संपर्क करें लिखे।

जन्म कुंडली के विषय में जानना चाहते हैं तो कृपया जन्म तिथि,जन्म समय व जनम स्थान अवश्य लिखें।

शर्मा जी – 9560518227,9312002527

www.sumansangamaashray.com

sumansangam1957@gmai.com

 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *