बिहार राजनीतिक परिस्थितियाँ
सतीश शर्मा 
बिहार की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियाँ आगामी विधानसभा चुनावों के कारण बेहद हलचल भरी हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लगातार बदलते गठबंधन और प्रशांत किशोर की नई पार्टी ‘जन सुराज’ के चुनावी मैदान में आने से यह चुनाव बहुत दिलचस्प हो गया है।
एनडीए में वापसी के बाद नीतीश कुमार फिर से गठबंधन बदला,जनवरी 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले, नीतीश कुमार ने ‘महागठबंधन’ को छोड़कर भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में वापसी की। यह उनका भाजपा के साथ पांचवां गठबंधन है। इस बदलाव के बाद भी, वह मुख्यमंत्री बने हुए हैं और भाजपा के साथ सरकार चला रहे हैं। उप-मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने शपथ ली। आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एनडीए के भीतर सीट-साझाकरण पर बातचीत चल रही है। चिराग पासवान (लोजपा-रामविलास) और उपेंद्र कुशवाहा (रालोमो) जैसे अन्य सहयोगी भी इसमें शामिल हैं।
महागठबंधन, जिसमें राजद, कांग्रेस और वामपंथी दल शामिल हैं, अब तेजस्वी यादव के नेतृत्व में है। वह सरकार पर हमलावर हैं और चुनाव में बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। भाकपा (माले) ने राजद के 19 सीटों के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए 32 सीटों की मांग की है, जिससे सीट-साझाकरण में कुछ तनाव है।
राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने ‘जन सुराज’ पार्टी का गठन किया है और विधानसभा की सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। वह बिहार के पारंपरिक राजनीतिक दलों से असंतुष्ट मतदाताओं के लिए एक नया विकल्प पेश कर रहे हैं और पिछले 35 वर्षों की ‘भ्रष्ट राजनीति’ को समाप्त करने का दावा कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि जन सुराज पार्टी के आने से मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है और छोटे दलों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।
सीमांचल और मिथिलांचल जैसे क्षेत्रों में मुस्लिम वोटों को लेकर खींचतान जारी है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी अपनी पार्टी का विस्तार कर रहे हैं, जिससे राजद के लिए एक नई चुनौती खड़ी हुई है।
2023 में जारी हुई जातिगत जनगणना की रिपोर्ट भी चुनाव में एक बड़ा कारक साबित हो सकती है, क्योंकि सभी पार्टियाँ इसका राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करेंगी।
पिछले कुछ चुनावों में महिला मतदाताओं की भागीदारी में वृद्धि देखी गई है, जो विकास के मुद्दों पर अधिक ध्यान देती हैं। हालाँकि, शराबबंदी जैसे कुछ मुद्दे उन्हें निराश भी कर सकते हैं।
संक्षेप में, बिहार की राजनीति एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ एनडीए है, जिसमें भाजपा और जदयू जैसे दल हैं,अभी इस गठबन्थन ने कुछ जन उपयोगी कार्यक्रम घोषित किए है उनका असर भी होगा । तो दूसरी तरफ महागठबंधन है, जिसका नेतृत्व राजद कर रहा है। वहीं, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी एक तीसरे विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई है। नवंबर 2025 में होने वाले विधानसभा चुनावों में जनता ही तय करेगी कि सत्ता की बागडोर किसके हाथ में होगी।





