ट्रंम्प को रोकना जरूरी

ट्रंम्प को रोकना जरूरी

ललित शंकर रुड़की हरिद्वार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंम्प एक निरंकुश शासक की तरह हो गए हैं।अब ट्रंम्प अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करने लगे हैं।अभी ट्रंम्प ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उन्ही के देश मे सैन्य कार्यवाही कराकर अपनी गिरफ्त में ले लिया।ट्रंम्प ने उनपर ऐसे आरोप लगाए जिनका  कोई ऐसा आधार नही जिससे सैन्य कार्यवाही करके उनको उन्ही के देश से उठाया जाए।ट्रंम्प ने मादुरो पर ड्रग्स व अवैध हथियार रखने का आरोप लगाया।ये सब तो एक बहाना है,सच्चाई कुछ और ही है।पिछले कुछ समय से अमेरिकी की दादागिरी कम होती दिख रही है।रूस,चीन भारत ईरान सहित कई देश ट्रंम्प की बंदर घुड़की से दबाव में नही आ रहे।भारत पर अत्याधिक टैरिफ लगाने के बाद भी भारत झुका नही।इसलिय अपनी दादागिरी को बनाय रखने के लिए ट्रंम्प अब छोटे छोटे देशों को परेशान कर रहे हैं।वेनेजुएला पर सैन्य कार्यवाही के बाद ट्रंम्प ने क्यूबा,कोलंबिया, मेक्सिको, ईरान तथा ग्रीनलैंड पर भी ऐसी कार्यवाही करने धमकी दी है।इसके अतिरिक्त ट्रंम्प ने भारत को कमजोर दर्शाने के लिये भारत को लेकर बयान दिया है,कि प्रधानमंत्री मोदी जानते है कि  मुझे खुश रखना जरूरी है।ये कहते हुए उन्होंने नए सिरे से टैरिफ लगाने की धमकी भी दी।ट्रंम्प ने ये भी कहा कि अमेरिकी दबाव में भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है,जबकि सच्चाई ये है कि भारत रूस से पूर्व को भांति ही तेल खरीद रहा है।सोचने की बात है कि एक तरफ ट्रेंम्प आतंकवाद का केंद्र  बन चुके पाकिस्तान के राष्ट्रपति व सेना अध्यक्ष को गले लगाते है ,हथियार देते है और दूसरी तरफ छोटे छोटे देशों को दबाव बनाते हैं।कार्यवाही करते हैं।समझने की एक बात और है,ट्रंम्प ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर एक आरोप ओर लगाया है ,वोट चोरी करने का।यही सब पिछले कुछ समय से भारत मे भी मोदी सरकार पर लगाये जा रहे।इन सब देशों से पहले अमेरिका पाकिस्तान, अफगानिस्तान, श्रीलंका, नेपाल में भी दखल दे चुका है।भारत मे भी लगातर कोशिश की जा रही है ।उसने सफलता नही मिली।ट्रंम्प के इस तानाशाही वाले व्यवहार को दुनिया के कई देशों ने गलत बताया है।चीन ने कहा है कि किसी को भी विश्व का जज नही बनने देंगे।रूस ने भी इसका विरोध किया है।ग्रीनलैंड के पीएम  कहा है कि अब बहुत हुआ ,अमेरिका ग्रीनलैंड को मिलाने का सपना न देखे,ईरान ने भी ट्रंम्प की धमकी का मजबूत जबाव देते हुए विरोध किया है।समझने की बात है कि आखिर ऐसा क्यो कर रहे है ट्रंम्प।ट्रंम्प स्वयं को विश्व का सबसे प्रभावी व्यक्ति बनाने का प्रयास कर रहे हैं।स्वयं ही युद्ध कराते हैं,और फिर स्वयं ही युद्घ विराम कराने की बात करते हैं।रूस चीन व भारत सहित दुनिया के देशों को ट्रंम्प को रोकना ही होगा।क्योंकि भविष्य में ट्रंम्प विश्व के लिये घातक होंगे।यूक्रेन को उकसा कर रूस से साथ युद्ध में धकेल दिया।जिससे यूक्रेन के अधिकतम हिस्से पर रूस ने कब्जा कर लिया है।इजरायल और फिलिस्तीन  युद्ध के न रुकने का कारण भी कंही न कंही अमेरिका ही है।भारत को भी अमेरिका पाकिस्तान के साथ युद्ध मे उलझाना चाहता था।जो भारत के कुशल नेतृत्व और पाकिस्तान की भारत को झेलने की क्षमता न होने के कारण सम्भव न हो पाया।भारत हमेशा से ही अपनी विदेश नीति में शांत व सबका सहयोगी बनकर कार्य करता आया है।परन्तु अब समय बदल गया है।हम दुनिया के लिये एक उम्मीद बन रहे हैं।इसलिय अब कुछ अलग करने का समय आ गया है।वेसे अमेरिकी टैरिफ पर न झुककर तथा ऑपरेशन सिंदूर पर ट्रंम्प के वक्तव्य को झुठलाकर भारत ने अपनी मजबूती अमेरिका सहित विश्व को दिखा दी है।लेकिन अब रूस चीन की तरह अमेरिका का विरोध करना ही होगा।आज पाकिस्तान में जो आतंकी पनप  रहे है वो सब अमेरिका के सहयोग से हो रहा।हथियार बेचने वाला शांति की बात नही कर सकता।ईरान,क्यूबा,मेक्सिको ग्रीनलैंड, कोलंबिया सहित विश्व के अन्य देशों को भी ट्रंम्प नीति के खिलाफ आना ही होगा।वर्तमान समय ट्रंम्प उस बेलगाम हिसंक पशु की तरह हो गए है जिसको प्रेम से नही समझा सकते।ट्रंम्प को रोकने के लिए रूस,चीन भारत सहित सभी देशों को एक साथ आना होगा।नही तो अफगानिस्तान,पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल ,ईरान बंगलादेश तथा वेनेजुएला  के बाद भारत भी इससे बच नही पायेगा।भारत सरकार को भारत के सभी विपक्षी दलों को,भारत की जनता को, एक साथ आना ही होगा।नही तो ट्रंम्प को दादागिरी धीरे धीरे सबपर भारी पड़ सकती है।

 

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