दिल्ली की घटना पर चुप्पी क्यों
ललित शंकर हरिद्वार 
ईरान इजरायल युद्ध मे ईरान के लिए छाती पीटने वाले लोग दिल्ली के उत्तमनगर की घटना पर चुप क्यों है।कोटद्वार में एक मुस्लिम के समर्थन में आने वाला मोहम्मद दीपक भी दिल्ली घटना पर चुप्पी साधे बैठा है।सोचनीय बात है कि ईरान पर जब इजरायल और अमेरिका ने हमला किया तभी भारत के मुसलमान,भारत का विपक्ष और कुछ सगठनों के लोग भारत की खामोशी पर गुस्सा दिखा रहे हैं।सड़को पर,टीबी डिबेट में, सोशल मीडिया पर सब जगह ईरान के समर्थन में माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।लेकिन भारत के अंदर ही होली पर एक छः साल की बच्ची के हाथों से धोखे से रंग के छींटे पड़ने से पड़ोस के ही मुस्लिमों ने एकत्र होकर हिन्दू परिवार पर बेहरमी से जानलेवा हमला किया ,जिसमें तरुण खटीक को पत्थर की सिली से कुचलकर कुचलकर मौत के घाट उतार दिया।दिल्ली सहित पूरे देश में ईरान के लिये रोने वाला न कोई नेता कुछ बोला,न कोई संगठन कुछ बोला और ही कोई मुस्लिम ही कुछ बोला।समझने का विषय है कि आखिर मुस्लिम आरोपी होने पर ये सब शांत क्यो हो जाते है।कांग्रेस ने तो अपने लेटर पैड पर सार्वजनिक रूप से ईरान के समर्थन के लिये पत्र लिखा, राहुल गांधी,सोनिया गांधी प्रियंका वाड्रा,आप नेता संजय सिंह,सपा नेता अखिलेश यादव,एआईएमआईएम के ओवेशी ,शिवसेना उद्धव के सजंय राउत सभी ने बड़े मुखर होकर भारत को ईरान के साथ खड़े होने की बात कही।कमन्युष्ट विवेक श्रीवास्तव ,मौलाना रशीदी,भदौरिया , सहित कई प्रसिद्ध चेहरे लगातर टीबी पर ईरान के समर्थन में लगातार डिबेट करते दिख रहे हैं।भीम आर्मी के नेता तथा नगीना से सांसद चंद्रशेखर ने तो ईरान के समर्थन में अमेरिका से युद्ध करने तक की बात कह दी है।दूसरे देश ईरान के लिए चिंतित होने वाले इन सभी को दिल्ली में बेहरमी से मारे गए तरुण खटीक नही दिख रहा।भारत के लोगों को अब समझना होगा और जागरुख भी होना होगा नही तो ये योजनात्मक रूप से हमला करने वाले मुस्लिमों से ज्यादा खतरनाक यही सब लोग है ,जो आरोपियों के धर्म को देखकर समर्थन की बात करते हैं।ईरान के समर्थन में भारत पर जबरन दबाव बनाने वाले ये सभी भारत को संकट में डालना चाहते हैं।भारत के बढ़ते कदम इनको रास नही आ रहे।दिल्ली की घटना ये सोचने पर मजबूर कर रही है कि इस्लामिक कट्टरता कभी सद्भाव की बात नही कर सकती।समझने की बात है कि फलों व सब्जियों पर रंग लगाकर बेच देते है,अलग अलग रंग के कपड़े पहन सकते है,होली पर रंगों को बेचकर पैसा कमा सकते,बालों पर रंग लगा सकते हैं और बेगुनाह जानवरो को काटने पर उनके खून से रंगीले हो सकते है।तब इनका मजहब खतरे में नही आता।लेकिन हिन्दू के हाथ से रंग की एक छींट से इनका मजहब खतरे में आ जाता है।इसका एक ही अर्थ है कि ये कभी हिन्दू को अपना मानते ही नही।सैकड़ो साल से भारत का हिन्दू ,मुस्लिमों को अपना भाई मानने की भूल करता आ रहा है,जिसका खामियाजा दिल्ली में तरुण खटीक जैसे हिन्दू अपनी जान देकर चुका रहे है।कभी अंकित,कभी चंदन,कभी पंकज आदि जैसे हिन्दू इस मजहबी कट्टरता के शिकार हो रहे हैं।अब समय सद्भाव का नही संघर्ष का है।जबतक इनको इन्ही की भाषा मे जबाव नही दिया जाएगा ,हिन्दू ऐसे ही मरता रहेगा।दिल्ली की सरकार की चुप्पी भी कंही न कंही आक्रोश को जन्म दे रही है।इसीलिए तरुण खटीक के पिता योगी मॉडल को याद कर करके रो रहे है।दिल्ली सरकार को तुरंत ऐसी कार्यवाही करनी चाहिए जिससे इन मजहबी कट्टरपंथियों के हौसले पस्त हो जाएं।
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ये लेखक के निजी विचार है ।
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दिल्ली की घटना पर विपक्ष के नेता चुप क्यों बैठे हैं
Bahut achha lekh hai.Lekin Delhi police abhi bhi jihadion ko bacha rahi hai….hamesha ki tarah.