मुस्लिम व राष्ट्रीयता
ललित शंकर रुड़की गाजियाबाद 
भारत रत्न व भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ भीमराव रामजी अंबडेकर ने अपनी एक पुस्तक में लिखा था कि भारत मे रहने वाला कोई भी मुसलमान चाहे वो सबसे निम्न स्तर का हो या फिर सबसे उच्च स्तर का उसके लिये पहले इस्लाम है, तथा उसकी सोच केवल ओर केवल भारत का इस्लामीकरण करना ही है।अगर कुछ प्रमुख मुस्लिम व्यक्तियों को नजर डालेंगे तो स्पष्ठ होगा कि बाबा साहेब का कथन एक दम सत्य था।बल्कि भारत के ही नही दुनिया के किसी भी देश मे कुछ अपवादों को छोड़कर मुसलमान पहले मुसलमान है।बाकी बाद में।अभी ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने क्रिकेट से सन्यास लेने की घोषणा के साथ उसी ऑस्ट्रेलिया की कोसा जिसने उस्मान ख्वाजा को सम्मान व पहचान दी।उस्मान ख्वाजा ने कहा कि मुस्लिम और पाकिस्तानी मूल के होने कारण मेरे साथ खराब व्यवहार किया जाता था।जबकि ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड ने उस्मान ख्वाजा के योगदान की सराहना की है।समझने की बात है कि दुनिया मे एक महान टीम का प्रमुख खिलाड़ी बनने के बाद भी उस्मान मुसलमान ही बनकर ऑस्ट्रेलिया से व क्रिकेट से वापसी करेगे।उस्मान ख्वाजा के अतिरिक्त अन्य कई प्रमुख मुस्लिम चेहरों ने भी ऐसा किया है।अभी अमेरिका की सबसे बड़ी महानगरपालिका न्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी के शपथ लेने के तुरंत बाद दुनियाभर के कट्टरपंथी मुस्लिमो ने उनको शुभकामनाएं दी।अभी ममदानी ने न्यूयॉर्क से एक पत्र भारत की जेल में पिछले पांच वर्ष से भारत विरोधी गतिविधियों के कारण बन्द उमर खालिद को लिखा।उसमे ममदानी उनको समर्थन देते हुए हिम्मत रखने की बात कर रहे हैं।सोचने की बात है कि इतने बड़े स्तर पर जाकर भी केवल मुस्लिम होने कारण भारत के देशद्रोही को समर्थन का पत्र लिखते हैं।बंगलादेश की राजनीति में कट्टरपंथी सोच बढ़ाने के लिए हिंसक रूप से सत्ता बदलने वाले मो यूनिस ग्रमीण बैंक के संस्थापक व अर्थशास्त्री थे।नोबेल पुरस्कार विजेता मो यूनिस ने भी दुनिया को बता दिया कि हम कुछ भी बन जाये लेकिन हम केवल ओर केवल मुस्लिम है। भारत मे भी ऐसे कट्टरपंथी मुस्लिम बड़ी संख्या में है।भारत के पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी को मुस्लिम होने का कारण डर लगता था।वो ये भी कहते थे कि भारत के हर संसाधन पर मुस्लिम का पहला अधिकार है। भारत की राजनीति में पहचान बनाने वाले कई और नेता भी सब कुछ बनने के बाद भी मुस्लिम ही रहे।एआईएमआईएम के नेता असद्दुदीन ओवेशी सांसद बनने के बाद भी मुस्लिम बने रहे उन्होंने भारत की संसद में जय फिलिस्तीन बोलकर सबको बता दिया।सपा से सम्भल में सांसद रहे शफीकुर्रहमान वर्क ने तो संसद में खड़े होकर कहा कि इस्लाम हमे वन्देमातरम बोलने की अनुमति नही देता।सांसद भारत के लेकिन बने रहे मुस्लिम।इन्ही शफीकुर्रहमान वर्क ने बसपा से सांसद होने के बाबजूद सम्भल में अंबेडकर जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने को ये कहकर मना कर दिया था कि इस्लाम मे ये हराम है।अभी टी वी पर आने वाले मौलाना साजिद रशीद ने तो सार्वजनिक रूप से मुसलमानों से कहा कि अगर कोई आपसे वंदेमातरम कहलवाए तो उसको जूतों डंडों व हथियारों से मारो।इन सबके अतिरिक्त बॉलीवुड के स्टार शाहरुख खान ने मुस्लिम होने के कारण बंगलादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को नौ करोड़ रुपये में विरोध के बाबजूद खरीदा।आमिर खान,शाहरुख खान नशीरुद्दीन शाह,जावेद अख्तर सभी ने कहा था कि मुस्लिम होने कारण भारत मे रहने पर डर लगता है।इनको कमाते समय डर नही लगता।इन सबके अतिरिक्त 1920 में खिलाफत आंदोलन से जगजाहिर होता है कि मुस्लिम के लिये प्राथमिकता मुस्लिम ही है।जब तुर्की के खलीफा को अंग्रेजो ने गद्दी से हटा दिया था जब भारत के मुस्लिमो ने भारत की आजादी में गांधी जी से ये शर्त रखकर सहभागिता करने की बात कही थी।तुम हमारे खलीफा को गद्दी पर बिठाने की बात करोगे तब हम आपकी आजादी में सहयोग करेंगे।सोचनीय बात है कि भारत की आजादी से ज्यादा जरूरी उनके लिये तुर्की के खलीफा की गद्दी थी।आजादी के समय अपने लिए इस्लाम के आधार पर अलग देश लेना भी यही दर्शाता है कि मुस्लिम पहले मुस्लिम है।हालांकि कुछ देशभक्त मुस्लिमो ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है।रुबिका लियाकत, फैज खान आज ये खुलकर कहती है कि हमे अपनी कट्टरपंथी सोच बदली होगी नही तो दुनिया की नजरों में हम उठ नही पाएंगे।एपीजे अब्दुल कलाम व वीर अब्दुल हमीद जैसे मुस्लिमो ने इस देश को प्रथम मानकर अपना सर्वोच्च दिया,लेकिन वर्तमान में मुस्लिम उनको आदर्श नही मानते।बल्की बुरहान वानी जैसे आतंवादियों के जनाजे में में करोड़ो की भीड़ जाती है।





