संगठन में शक्ति है
सतीश शर्मा 
“संगठन में शक्ति है” का अर्थ है कि जब लोग एक सामान्य उद्देश्य के लिए एकजुट होकर काम करते हैं, तो उनकी व्यक्तिगत क्षमताओं से कहीं ज़्यादा बड़ी ताकत पैदा होती है, जिससे वे बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं, बेहतर समाधान निकाल सकते हैं और सामूहिक रूप से सफलता प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि एकजुटता सहयोग, मनोबल और एकता बढ़ाती है।एक व्यक्ति जितना कर सकता है, उससे कहीं अधिक काम एक समूह मिलकर कर सकता है, जिससे काम की गति और गुणवत्ता बढ़ती है।
इसको हम इस संगठन मंत्र से समझ सकते है ।
ॐ संड्गच्छध्वं संवदध्वं,सं वो मनांसि जानताम् ।देवा भागं यथा पूर्वे,संञ्ञनानां उपासते ।।
समानो मंत्र: समिति: समानी,समानं मन: सहचित्तमेषाम् । समानं मंत्र अभिमंत्रये वः,समानेन वा हविषा जुहोमि ।।
समानी व आकूति:,समाना हृदयानि वः ।समानमस्तु वो मनो, यथा व: सुसहासति ।।
“हम सब एक साथ चलें, एक साथ बोलें, और हमारे मन एक समान होकर ज्ञान प्राप्त करें।” यह वेदों से लिया गया एक वैदिक श्लोक जो शारीरिक एकता, विचारों में सामंजस्य और सामूहिक चेतना से प्रगति करने का संदेश देता है, जैसा प्राचीन काल में ज्ञानी लोग मिलकर उपासना करते थे, वैसे ही मिलकर कार्य करने का आह्वान करता है।
इस मंत्र से किसी भी समूह, समाज या संगठन के लिए एकता, समन्वय और साझा लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एक शक्तिशाली आह्वान होता है, जो व्यक्ति ‘मैं’ से ‘हम’ की भावना विकसित करता है।
विभिन्न विचारों और अनुभवों के मिलने से समस्याओं के नए और प्रभावी हल निकलते हैं। संगठन में सहयोग की भावना बढ़ती है, जिससे समाज में एकता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है । एकजुटता से सदस्यों का मनोबल बढ़ता है और सफलता की संभावना बढ़ जाती है। व्यक्तिगत प्रयास सीमित होते हैं, जबकि संयुक्त प्रयास से सफलता की सीमाएं अनंत हो जाती हैं।अकेला आदमी मधुमक्खी के छत्ते पर पत्थर नहीं मार सकता, क्योंकि मधुमक्खियाँ एकजुट होती हैं और मिलकर जवाब देती हैं, जो संगठन की शक्ति का प्रतीक है। संगठित होकर किसान नए सफलता के आयाम गढ़ रहे हैं, जो दर्शाता है कि मिलकर काम करने से चमत्कार हो सकता है।
संक्षेप में, संगठन लोगों को जोड़ता है, उनकी क्षमताओं को बढ़ाता है और सामूहिक प्रयासों से बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है, यही कारण है कि “संगठन में शक्ति है”।
हर युग में एक बात स्थापित हुई है की शक्ति संगठन में है शक्ति एक रहने में है जिस परिवार के सब लोग एक साथ मिलकर रहते हैं उस परिवार पर किसी भी प्रकार का कोई संकट नहीं आता । संगठित रहने से तनाव कम होता है, मानसिक स्पष्टता बढ़ती है, उत्पादकता बढ़ती है, और आप अपने लक्ष्यों को बेहतर ढंग से प्राप्त कर पाते हैं। यह समय बचाता है, पैसे बचाता है, और रिश्तों व व्यक्तिगत कल्याण को बेहतर बनाता है, जिससे जीवन में नियंत्रण और शांति की भावना आती है।
परिवार मे संगठित रहने के कारण अव्यवस्था को दूर करने से आंतरिक शांति मिलती है और आप बेवजह की चिंताओं से मुक्त महसूस करते है । आप अपने कामों को प्राथमिकता दे पाते हैं और उन्हें समय पर पूरा कर पाते हैं, जिससे खाली समय भी मिलता है। जब आपको पता होता है कि क्या करना है, तो आप अधिक कुशलता से काम करते हैं और समय बर्बाद नहीं करते। व्यवस्थित वातावरण आपको अपने लक्ष्यों और उन पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। कार्यों को पूरा करने और बेहतर ग्रेड प्राप्त करने से आत्म-सम्मान बढ़ता है। व्यवस्थित रहने से अनावश्यक खर्चों से बचा जा सकता है और आप किफायती जीवन जी सकते हैं। रिश्तों और प्रियजनों के लिए समय निकालने में मदद मिलती है, जिससे रिश्ते मजबूत होते हैं। यह आपको लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए एक स्पष्ट रास्ता देता है। स्वच्छ और व्यवस्थित जगह बेहतर नींद और समग्र कल्याण को बढ़ावा देती है। संक्षेप में, संगठित रहना केवल काम पूरा करने के बारे में नहीं है, बल्कि एक ऐसी संरचना बनाने के बारे में है जो आपके लक्ष्यों और कल्याण का समर्थन करती है, जिससे आप जीवन के हर क्षेत्र में सफल हो सकते हैं।
इसी प्रकार से अगर गांव के लोग मिलकर एक साथ रहेंगे तो वह गांव निश्चय ही विकसित, संग्रचित व आत्मनिर्भर गांव हो जाएगा उसे गांव पर कोई संकट नहीं आएगा और उसे गांव में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर भी अपने आप ऊपर उठ जाएगा इसी प्रकार से देश के सभी लोग अगर संगठित होकर रहेंगे और एक साथ एक दूसरे के सहयोग सद्भावना से रहेंगे तो संकट कभी आने वाला ही नहीं है । इसलिए सबको मिलकर रहना चाहिए संगठित रहना चाहिए और आपसी विकास के लिए हम सबको जिसके पास जो है वो सामूहिकता के लिय समर्पित करे । जो सोच सकते हैं वह अपनी सोचे, जो काम कर सकते हैं वह अपना काम करने का शक्ति दें, जो चल सकते हैं वह प्रवास करने की शक्ति दें, जो बात कर सकते हैं वह बात करने की शक्ति दे, जो समझ सकते हैं वह समझने की शक्ति दें, जो समझा सकते हैं वह समझ ने की शक्ति दें इसलिए सब मिलकर अपनी-अपनी शक्तियों का एक जगह संगठित करेंगे तो एक संगठित शक्ति का उदय होगा और उसे संगठित शक्ति से सभी प्रकार की समस्याओं का निवारण होगा ।
शक्ति का उदय हर युग में हर काल में होता रहा है। अगर हम सतयुग से देखें और आज तक पहले जब देवताओं पर आक्रमण हुआ और असुरों ने उनके राज्य छीनकर उनको बचने के लिए वनों में रहने को मजबूर कर दिया तो देवताओं ने ब्रह्मा जी विष्णु जी और शंकर भगवान की आराधना की और अपने कष्ट निवारण का उपाय पूछा। जब कुछ समझ नहीं आया तो सब ने अपने-अपने तेज से एक शक्तिपुंज प्रकट किया । उस शक्तिपुंज को सब ने अपने-अपना कुछ ना कुछ अंश दिया इस प्रकार से सब ने अपने अस्त्र दिए और जो शक्ति ने रूप प्रकट हुई वह स्त्री थी ।इसलिए उसको माता कहा गया। माता ने बहुत तेज हुंकार भरी और उनसे पूछा कि आप लोग यहां सभी इकट्ठे क्यों हैं, ओर मेरे प्रकट होने का कारण क्या है। देवताओं ने कहा कि हम असुरों के सताए हुए हैं और उन्होंने अपनी सारी विनती बताई और कहा किस तरीके से महिषासुर ने हमारे लोक पर कब्जा कर लिया है और हम उसके डर के मारे वनों में छिपे हुए हैं। माता आप हमारा संकट दूर करो और असुरों से हमें मुक्ति दो । इस प्रकार इस युग में शक्ति का उदय हुआ।
योगी आदित्यनाथ ने कहा की बटोगे तो कटोगे , वही साध्वी प्राची ने कहा की घटोगे तो कटोगे । शेष अगले अंक में ,,,,








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