विजया एकादशी व्रत कथा

विजया एकादशी

सतीश शर्मा

विजया एकादशी व्रत फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष एकादशी को किया जाता है | इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मन प्रसन्न होता है व सभी मनोकामना पूर्ण होती है | पूजन में धूप दीप नैवेद्य नारियल आदि चढ़ाया जाता है | सप्त अन्न युक्त घट स्थापित किया जाता है जिसके ऊपर विष्णु की मूर्ति रखी जाती है | विजया एकादशी को 24 घंटे कीर्तन करके दिन रात बिताना चाहिए | द्वादशी के दिन अन्न से भरा घड़ा ब्राह्मण को दान दिया जाता है | इस व्रत के प्रभाव से दुख दरिद्रता दूर हो जाती है | समस्त कार्य में विजय प्राप्त होती है | इसकी कथा भगवान राम की लंका विजय से संबंधित है | विजया एकादशी व्रत के बारे में कहा जाता है कि विजया एकादशी व्रत करने मात्र से स्वर्णणदान,भूमि दान,अन्न दान और गौ दान से भी अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है और अंततः विजया एकादशी व्रत करके मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि कोई आपसे शत्रुता रखता है तो आपको विजया एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए।

विजया एकादशी की कथा – जब भगवान राम माता सीता की मुक्ति के लिए वानर दल के साथ सिंधु तट पर पहुंचे तो रास्ता रुक गया | पास में ही दाल्भ्य मुनि का आश्रम था जिसने अनेक ब्रह्मा अपनी आंखों से देखे थे ऐसे चिरंजीव मुनि के दर्शनार्थ राम लक्ष्मण अपनी सेना सहित मुनि की शरण में जाकर मुनि को दंडवत प्रणाम करके समुंद्र से पार होने का उपाय पूछा तो मुनि ने कहा की कल विजया एकादशी है उसका व्रत आप सेना सहित करें | समुंद्र से पार उतरने का तथा लंका को विजय करने का सुगम उपाय यही है। मुनि की आज्ञा से राम लक्ष्मण ने सेना सहित विजया एकादशी का व्रत किया | समुन्द्र किनारे भगवान रामेश्वरम का पूजन किया। विजया एकादशी के महत्तम को सुनने से हमेशा विजय होती है। आज के समय में मुक़दमे आदि से निकलने हेतु विजया एकादशी का व्रत सबसे सरल उपाय है |

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