भारत के विकास में नारी का योगदान
मिथलेश शर्मा 
भारतीय समाज के विकास में महिलाओं का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी शिक्षा स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए और राजनीतिक भागीदारी के माध्यम से समाज में अपनी जगह बनाई।वह केवल परिवार की संरक्षक ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की आधारशिला भी रही है।आधुनिक युग में नारी ने अपनी महत्ता को पहचाना। उसने दासता के बन्धनों को तोड़ दिया और स्वतंत्र व्यक्तित्व को अपनाया। आधुनिक नारी ने स्वतंत्रता के साथ-साथ स्वावलंबन का भी पाठ पढ़ा। उसने शिक्षा, राजनीति, व्यवसाय आदि विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का सुन्दर परिचय दिया है।महिलाओं का सशक्तिकरण न केवल न्याय का मामला है, बल्कि भारत के सतत विकास के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। जब महिलाओं को समान अवसर और अधिकार मिलते हैं, तो राष्ट्र का समग्र विकास सुनिश्चित होता है। राष्ट्र के विकास में महिलाओं का योगदान बहुआयामी और अपरिहार्य है। शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, राजनीति और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी के साथ, वे समाज की धुरी और राष्ट्र निर्माण की नींव हैं। महिलाएं न केवल कार्यबल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, बल्कि परिवार और संस्कृति का संरक्षण करते हुए भी देश को सशक्त बना रही हैं।
राष्ट्र निर्माण में महिलाओं के प्रमुख योगदान – अनेकों महिलाएं उद्यमी बनकर आर्थिक प्रगति में योगदान दे रही हैं। महिलाएं शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जो एक स्वस्थ और शिक्षित राष्ट्र के लिए नींव रखते हैं। संसद से लेकर ग्राम पंचायत तक, महिलाओं की सक्रिय भागीदारी निर्णय लेने की प्रक्रिया को समावेशी बनाती है । भारतीय सेना, नौसेना और पुलिस जैसी सेवाओं में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से, महिलाएं राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी विकास में भी आगे हैं। महिलाएं ही संस्कृति, संस्कार और परंपराओं की वास्तविक संरक्षिका हैं, जो इसे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित करती हैं। भारतीय इतिहास में महिलाओं का योगदान अतुलनीय और बहुआयामी रहा है। प्राचीन काल में गार्गी-मैत्रेयी जैसी विदुषी, मध्यकाल में रानी लक्ष्मीबाई-जीजाबाई जैसी वीरांगनाओं और स्वतंत्रता संग्राम में सरोजिनी नायडू-अरुणा आसफ अली जैसी नेत्रियों ने सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में नेतृत्व कर देश को नई दिशा दी। इसी तरह, कित्तूर की रानी चेन्नम्मा, मराठा शासक ताराबाई और जीजाबाई ने प्रशासन और युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । भारतीय महिलाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई गति दी। सरोजिनी नायडू ने भारत की स्वतंत्रता के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। 1920 के दशक के दौरान, महिलाओं ने बड़े पैमाने पर आंदोलन में भाग लिया। अरुणा आसफ अली, उषा मेहता जैसी नेताओं ने भूमिगत रहकर और अन्य तरीकों से देश की आजादी के लिए संघर्ष किया।आधुनिक भारत में विज्ञान, खेल और राजनीति में उनकी भागीदारी निरंतर प्रगति कर रही है।
सामाजिक सुधार और शिक्षा: 19वीं और 20वीं शताब्दी में, सावित्रीबाई फुले और पंडिता रमाबाई जैसी महिलाओं ने महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए क्रांतिकारी कार्य किए। उन्होंने समाज में फैले कुरीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। भारतीय संस्कृति में महिलाओं का योगदान आदिकाल से ही अतुलनीय रहा है, जहाँ उन्हें ‘शक्ति’, सृजनकर्ता और परिवार की धुरी माना गया है। प्राचीन काल में गार्गी-मैत्रेयी जैसी विदुषी, मध्यकाल में मीराबाई, रानी लक्ष्मीबाई जैसी साहसी नारियों से लेकर आधुनिक समय की वैज्ञानिक, स्टार्टअप उद्यमी और अंतरिक्ष यात्री (कल्पना चावला, टेसी थॉमस) तक, महिलाओं ने शिक्षा, कला, समाज और देश की प्रगति में सर्वोच्च भूमिका निभाई है। हमारी महिलाएं लोकगीत, लोरियों, कथाओं, पारंपरिक नृत्य और कलाओं के माध्यम से भारतीय परंपराओं और मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखती हैं। भारतीय इतिहास में पन्नाधाय का त्याग, रानी लक्ष्मीबाई का साहस और अहिल्याबाई होल्कर का कुशल प्रशासन नारी शक्ति के उदाहरण हैं। वर्तमान में, फाल्गुनी नायर जैसी महिलाएं स्टार्टअप्स के माध्यम से आर्थिक विकास में, और महिलाएं स्टार्टअप संस्कृति को बदलकर, देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। भारतीय संस्कृति में नारी को ‘मातृ देवोभाव:’ (माँ ईश्वर समान) माना गया है, जो सहिष्णुता, करुणा और अतिथि-सत्कार जैसे मानवीय मूल्यों को परिवार में स्थापित करती हैं।
भारत की प्रमुख महिलाएं जिन्होंने इतिहास में अपने कार्य से देश का नाम उज्जवल किया,व भारतीय संस्कार व परंपरा को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दिया।
माँ दुर्गा, माता सीता, माता लक्ष्मी,माँ पार्वती,सती सावित्री ,देवी जानकी ,देवी सती,महारानी द्रौपदी ,सती कण्णगी,देवी गार्गी,साध्वी मीरा,रानी दुर्गावती,रानी लक्ष्मीबाई,महारानी अहिल्या (अहिल्याबाई होलकर),रानी चन्नम्मा,रानी रुद्रामांबा (रुद्रांबा),भगिनी निवेदिता,माँ सारदा,सरोजिनी नायडू,रानी चन्नम्मा, रानी वेलू नाचियार, और झलकारी बाई, सावित्रीबाई फुले,पंडिता रमाबाई,आनंदीबाई जोशी,सुचेता कृपलानी,किरण बेदी, कल्पना चावला,लता मंगेशकर,सरला ठकराल,गगनदीप कांग,कमला सोहनी,अन्ना मणि,रितु करधल,अदिति पंत,मंगला मणि,अनुराधा टी.के,असीमा चटर्जी
इनके अलावा कई अन्य नाम भी हैं जिन्होंने इतिहास में अपना अमिट स्थान बनाया है।
लेखिका NCRB भारत सरकार की पूर्व अधिकारी हैं ।






