बदलता बॉलीवुड

बदलता बॉलीवुड

ललित शंकर हरिद्वार

भारत लगातर हर क्षेत्र में बदलाव कर रहा था लेकिन लंबे समय से भारतीय सिनेमा में बदलाव नही हो रहा था।भारत का सिनेमा जगत एक सोची समझी योजना के तहत फिल्में व धरावाहिक बना रहा था।लेकिन आदित्य धर जैसे फ़िल्म निर्देशकों ने बॉलीवुड को सही व सच कहने की दिशा दी है।कभी सर्जीकल स्ट्राइक पर मूवी बनाने वाले आदित्य धर ने धुरंधर जैसी मूवी बनाकर साबित कर दिया कि भारतीय सिनेमा में सच दिखाने की हिम्मत है।जिस प्रकार से धुरंधर की दोनों फिल्मों में हकीकत को दर्शाया गया है,वो अदभुत है।सामान्य फिल्मों से अधिक समय की होने के बाबजूद भी जनता की दृष्टि फ़िल्म से हटती ही नही है।भारतीय सिनेमा की छाप भारत की जनता पर शुरुआत से ही पड़ती है आई है।भारतीय सिनेमा का भारत की जनता पर इतना असर होता था कि पुरानी कई फिल्म देखने के कारण जनता उसको सच मान लेती थी।नागिन फ़िल्म देखकर जनता कहती है कि नागिन अपनी आंख में फोटो खींच लेती हैं,ओर फिर बदला लेती है।जबकि ये काल्पनिक बात है।सिनेमा में ही नेताओ को गलत देखकर आज भी भारत की जनता उनको गलत समझती है।जबकि बहुत अच्छे अच्छे व्यक्तित्व भारत की राजनीति में थे,गांव के व्यक्ति को सामान्य से भी कम देखकर युवाओं ने गांव से शहर के लिये प्रस्थान किया।जबकि भारत एक कृषि प्रधान देश हैं।इसी बॉलीवुड में कई फिल्मों में भगवान का मजाक बनाया गया,सोचने का विषय है कि बॉलीवुड पर विस्वास रखने वाली भोली जनता उसपर ठहाके लगाती थी।संतोषी माता,साईं नाथ जैसी फिल्मों को देखकर जनता ने बड़ी संख्या में उनकी पूजा शुरू कर दी।इन सबके अतिरिक्त भारतीय सिनेमा में बड़ी चतुराई से भारत को भारत से दूर करने की कोशिश की।अधिकतम पुरानी फिल्मों में विलेन को तिलक लगाकर,पूजा करने वाला दिखाया गया।भारत में की हिन्दू जातियों के खिलाफ योजनात्मक रूप से लड़ाने का काम भी बॉलीवुड ने किया,अधिकतम फिल्मों में मुख्य विलेन छत्रिय ,यंहा तक कि ठाकुर कहकर हिन्दू पूजक नाम रखकर दिखाया गया है,ब्राह्मण हमेशा छलकपट करने वाला,सृष्टि निर्माण से दान देने वाले वैश्य को बेईमान दिखाया गया,शुद्र को हमेशा सवर्णों के द्वारा पीड़ित दिखाया गया।जबकि वास्तविकता कुछ और कहती है।इन सबके अतिरिक्त जंजीर,शोले,पालेखान,पीके जैसी अधिकतम फिल्मों में मुस्लिम किरदार को देशभक्त,सच्चा मित्र ,अच्छा व्यक्ति दर्शाया गया।भारत की जनता के मन मे वही छाप बन गई है।आदित्य धर जैसे फ़िल्म निर्माताओं ने जनता की सोच को सही तरफ लाने की मजबूत व अच्छी पहल की है।धुरंधर फ़िल्म देखकर जनता को समझ आएगा कि भारत सरकार ने नोटबन्दी क्यो की,अतीक अहमद ,व दाऊद जैसे अपराधियों की वास्तविकता क्या है।जोधा अकबर की झूठी प्रेम कहानी पर फ़िल्म बनाने वाले लोगो  को भी इससे सबक लेना चाहिए।चिंतनीय बात ये कि जब भी भरतीय सिनेमा के कुछ देशभक्त निमार्ता अच्छी पहल करते है उनके खिलाफ भारत के नेता योजना बनाकर विरोध शुरू कर देते हैं।धुरंधर में दिखाई सच्चाई से परेशान भारत के विपक्षी नेताओ ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है।सपा मुखिया अखिलेश यादव ,सपा नेता अबु आजमी,एसटी हसन,कांग्रेस नेता उदित राज,सांसद इमरान मसूद,सुप्रिया श्रीनेत,तारिक अहमद,एआईएमआईएम नेता ओवेशी ,वारिश पठान, आप नेता संजय सिंह सहित अधिकतम विपक्षी दलों ने धुरंधर 2 का अपनी अपनी राजनीतिक भाषा मे विरोध किया है।कई मजहबी मौलानाओं ने भी इसका विरोध किया है।जबकि जनता सच्चाई को समझ चुकी हैं।सच्चाई का विरोध करने वाले ये सभी नेता व मौलवियों ने कश्मीर की सच्चाई पर बनी कश्मीर फाइल्स,केरल में लव जिहाद पर बनी केरल स्टोरी,बंगाल की डायरेक्ट एक्शन की सच्चाई पर बनी बंगाल फाइल्स जैसी फिल्मों का भी ऐसे ही विरोध किया था।परन्तु जनता ने इन सभी को फ़िल्म देखकर जवाव दिया।आदित्य धर व कश्मीर व बंगाल फाइल्स निर्देशक विवेक अग्निहोत्री, केरल स्टोरी के निर्माता सुदीप्तो सेन ने सच्चाई दिखाने की हिम्मत करके बॉलीवुड को नई व सच्ची दिशा दी है।भारत की जनता ने भी इनको समर्थन करके आगामी समय मे भी सच्चाई दिखाने की हिम्मत दी है।

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