आतंकवाद का बचाव करती ममता

आतंकवाद का बचाव करती ममता 

ललित शंकर  हरिद्वार

भारत के विपक्ष ने सत्ता पाने तथा खोने के लिये कुछ भी करने की आदत सी डाल ली है।वेसे तो सत्ता पाने के लिए विपक्षी दल सरकार का विरोध करते करते देश का विरोध तक करने लगे हैं। विपक्षी दल की मजबूत व बड़ी नेता ममता बनर्जी को शायद सत्ता खोने का डर सताने लगा है।  जिस कारण वो आतंकवाद जैसी घटनाओं पर राजनीति करने लगी हैं।बंगाल की एक चुनावी सभा मे जनता को संबोधित करते हुए बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आतंकवाद का बचाव करते हुए एक बयान देते हुए कहा है कि क्या भाजपा चुनाव से पहले पहलगाव जैसा  एक और हमला कराने की योजना बना रखी है।एक बड़े सूबे की मुख्यमंत्री के मुख से ऐसे बयान कंही न कंही भारत की राजनीति पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं।ममता बनर्जी के अनुसार पिछले वर्ष पहलगाव में धर्म पूछकर किया गया आतंकी हमला पाकिस्तान के आतंकियों ने नही बल्कि भारत सरकार ने कराया था।ये सब सुनकर भी आंख शर्म से झुक रही है।22 अप्रैल 2025 को पहलगाव में जिस आतंकी  हमले में पच्चीस निर्दोषों की निर्मम हत्या धर्म पूछकर तथा पेंट उतरवा कर धार्मिक जानकारी करके की गई।उसके बचाव में ममता बनर्जी ने सारी हदें पार कर दी हैं।जबकि इस घटना के तुरंत बाद पाकिस्तान में स्थिति लक्सर ए तोयबा के छात्र संगठन द रेजिस्टेंट ने ली थी।इस आतंकी हमले के साजिशकर्ता सुलेमान शाह,अबु हमजा तथा यासिर जो पाकिस्तान के  रावलकोट के निवासी थे,उनको भारतीय सेना ने ऑपरेशन महादेव अभियान चलाकर मुठभेड़ में मारा था।पहलवान हमले के बाद भारत सरकार व भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर नामक मजबूत व सशक्त कार्यवाही करके पाकिस्तान के कई एयरबेस तथा आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था।जिसके बाद पाकिस्तान ने भारत के सामने गिड़गिड़ाकर उस कार्यवाही को रोकने का आग्रह किया था।ममता बनर्जी की राजनीतिक महत्वकांक्षा ने तो ऑपरेशन सिंदूर में लगी भारतीय सेना के पराक्रम का भी अपमान किया है।ममता बनर्जी का ये बयान कंही न कंही आतंकियों के मनोबल को बढ़ाने वाला है।वेसे ये कोई पहला मौका नही है जब विपक्ष के किसी दल ने ऐसा किया है।इससे पहले भी सपा आप कांग्रेस आदि ने राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे वक्तव्य दिए है।सपा ने तो सत्ता में आते ही यूपी के आतंकियों के मुकदमे मजहबी कट्टरता के दबाव में वापिस ले लिये थे।अभी बहुचर्चित फ़िल्म धुरंधर 2 में भी जब अतीक अहमद का आतंकी सम्बंध दिखाया तो सपा सहित पूरा विपक्ष विफर गया और अतीक अहमद के सम्मान के बचाव में उतर आया।जबकि सच्चाई जनता समझ ही चुकी है।भारत के विपक्ष ने कई बार आतंकी घटनाओं का संबंध जानबूझकर सरकार से जोड़ने का प्रयास किया है।परंतु भारत की जनता अब सब समझने लगी है।आतंकी घटना के बाद भारतीय सेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक व सर्जिकल स्ट्रॉक के भी ममता सहित सभी विपक्षी दलों ने सबूत मांगे थे।बंगाल में जंहा राज्यपाल सुरक्षित नही,चुनाव आयोग सुरक्षित नही,उपराष्ट्रपति सुरक्षित नही,प्रदेश के  विपक्षी दल के नेता सुरक्षित नही,एसआईआर टीम सुरक्षित नही। उसी प्रदेश की मुख्यमंत्री द्वारा आतंकियों का राजनीतिक समर्थन करना सन्देह पैदा करता है।अब बंगाल की जनता को ही इन सब का जबाव देना चाहिए।कभी क्रांतिकारियों की स्थली रहने वाला बंग्लादेश आज इन्ही ममता बनर्जी के कारण किस मोड़ पर खड़ा हो गया चिंतनीय व सोचनीय है।

 

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