डॉ. आंबेडकर के सपनों का भारत : मोदी सरकार के प्रयास

डॉ. आंबेडकर के सपनों का भारत : मोदी सरकार के प्रयास

विकास खितौलिया

भारत के संविधान निर्माता, सामाजिक न्याय के महानायक और आधुनिक भारत के शिल्पकार डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर ने जिस राष्ट्र की कल्पना की थी, वह केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक समानता पर आधारित एक सशक्त और समावेशी भारत था। उनका सपना था ऐसा भारत, जहाँ जाति, वर्ग, धर्म और लिंग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव न हो और हर नागरिक को समान अवसर प्राप्त हो। आजादी के बाद से अनेक सरकारों ने इस दिशा में प्रयास किए, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा किए गए कई पहल इस दृष्टि को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने डॉ. आंबेडकर के विचारों और उनके योगदान को न केवल सम्मान दिया है, बल्कि उन्हें जन-जन तक पहुँचाने और उनके सपनों के भारत को साकार करने के लिए ठोस कदम भी उठाए हैं। इनमें सबसे प्रमुख पहल है “पंच तीर्थ” का विकास, जो डॉ. आंबेडकर के जीवन से जुड़े पाँच महत्वपूर्ण स्थलों को समर्पित है। पंच तीर्थ का उद्देश्य केवल स्मारकों का निर्माण नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को प्रेरणा देना है। मध्य प्रदेश के महू जहां डॉ. आंबेडकर का जन्मस्थान हुआ, जिसे अब ‘डॉ. आंबेडकर नगर’ के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ उनके जीवन और विचारों को दर्शाने वाले संग्रहालय और स्मारक बनाए गए हैं। दूसरा लंदन में स्थित उनका निवास स्थान जहाँ उन्होंने अपनी शिक्षा के दौरान निवास किया। इस स्थान को संरक्षित कर इसे स्मारक के रूप में विकसित किया गया, ताकि युवा पीढ़ी शिक्षा के महत्व को समझ सके। तीसरा नागपुर की दीक्षाभूमि जहाँ डॉ. आंबेडकर ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया। यह स्थल सामाजिक परिवर्तन और आत्मसम्मान का प्रतीक है। चौथा दिल्ली के अलीपुर रोड स्थित 26 नंबर बंगला जहाँ उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए। इसे राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित किया गया है। पांचवा मुंबई की चैत्यभूमि जहां उनका अंतिम संस्कार स्थल, जो लाखों अनुयायियों के लिए आस्था का केंद्र है । इन पंच तीर्थों के माध्यम से सरकार ने डॉ. आंबेडकर के जीवन के विभिन्न पहलुओं शिक्षा, संघर्ष, आत्मसम्मान और सामाजिक परिवर्तन को एक समग्र रूप में प्रस्तुत किया है।

डॉ. आंबेडकर का मानना था कि शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण ही समाज के पिछड़े वर्गों को आगे ला सकता है। इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने कई योजनाएँ शुरू की हैं । प्रधानमंत्री जन धन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया, जिससे आर्थिक समावेशन को बढ़ावा मिला। स्टैंड अप इंडिया और मुद्रा योजना ने छोटे उद्यमियों, विशेषकर पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए। आयुष्मान भारत योजना ने गरीब और वंचित वर्गों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर उन्हें बेहतर जीवन जीने का अवसर दिया। स्वच्छ भारत अभियान ने स्वच्छता को जन आंदोलन बनाकर समाज के हर वर्ग को इससे जोड़ा, जो डॉ. आंबेडकर के ‘स्वास्थ्य और गरिमा’ के विचार से मेल खाता है।

डॉ. आंबेडकर ने हमेशा सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। मोदी सरकार ने भी इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम को और अधिक सख्त बनाया गया है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके। इसके साथ ही ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ का मंत्र देकर सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचना चाहिए। यह विचार डॉ. आंबेडकर के समावेशी समाज के दृष्टिकोण से पूरी तरह मेल खाता है। डॉ. आंबेडकर महिलाओं के अधिकारों के भी प्रबल समर्थक थे। उन्होंने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को समान अधिकार देने की कोशिश की थी। आज केंद्र सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, उज्ज्वला योजना और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कार्य किया है।

डॉ. आंबेडकर ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना था। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उच्च शिक्षा में आरक्षण व्यवस्था को बनाए रखते हुए छात्रवृत्तियों का विस्तार किया गया है। डिजिटल इंडिया अभियान के माध्यम से शिक्षा को तकनीक से जोड़कर दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुँचाया गया है। इसके अलावा, अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों के लिए विशेष छात्रावास, कोचिंग योजनाएँ और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं, जिससे वे प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकें। आज के दौर में डिजिटल सशक्तिकरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण। डिजिटल इंडिया अभियान के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की दूरी को कम किया गया है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा है। डॉ. आंबेडकर ने एक ऐसे भारत की कल्पना की थी जहाँ संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण हो। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी योजनाओं ने यह सुनिश्चित किया है कि सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुँचे, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो सके।

हमेशा से डॉ. भीमराव आंबेडकर का सपना केवल एक स्वतंत्र भारत का नहीं था, बल्कि एक ऐसे राष्ट्र का था जहाँ हर व्यक्ति को सम्मान, अवसर और न्याय मिले। आज जब हम देश के विकास की दिशा में हो रहे प्रयासों को देखते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि उनकी सोच और आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। इसलिए इस बात प्रमाण है कि  मोदी सरकार द्वारा पंच तीर्थ का निर्माण, सामाजिक और आर्थिक योजनाओं का विस्तार, तथा समावेशी विकास की दिशा में उठाए गए कदम इस बात का संकेत हैं कि देश डॉ. आंबेडकर के दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है। हालांकि अभी भी कई चुनौतियाँ बाकी हैं, लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत धीरे-धीरे उस दिशा में अग्रसर है, जिसकी परिकल्पना बाबा साहेब ने की थी।इस प्रकार, डॉ. आंबेडकर के विचार और वर्तमान सरकार की नीतियाँ मिलकर एक ऐसे भारत के निर्माण की ओर संकेत करती हैं, जो न केवल विकसित हो, बल्कि न्यायपूर्ण, समतामूलक और समावेशी भी हो।

संपादन कर्ता विकास खितौलिया,(लेखक, शोधकर्ता एवं विचारक)

 

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