नवम्बर मास 2025 का पंचांग 

नवम्बर मास 2025 का पंचांग 

सतीश शर्मा

भारतीय व्रतोत्सव नवम्बर -2025

 दि. 1- भीष्म पंचक प्रारंभ, देव प्रबोधिनी 11 व्रत (स्मा.),दि. 2- देव प्रबोधिनी एकादशी व्रत (वै.), तुलसी विवाह प्रारम्भ,दि. 3- सोम प्रदोष व्रत,दि. 4- वैकुण्ठचतुर्दशी,दि. 5- कार्तिक पूर्णिमा, सत्य व्रत, श्रीपुष्करराज मेला (गढ़गंगा) श्री गुरुनानक जयंती, भीष्म पंचक समाप्त, चातुर्मास व्रत नियम पूर्ण, कार्तिक स्नान पूर्ण, तुलसी विवाह पूर्ण,दि. 8- गणेश चतुर्थी व्रत,दि. 12- काल भैरवाष्टमी,दि. 15- उत्पन्ना एकादशी व्रत,दि. 16- संक्रांति पुण्य,दि. 17- सोम प्रदोष व्रत, संत ज्ञानेश्वर पुण्य तिथि,,दि. 18- मास शिवरात्रि,देविका स्नान (कर),दि 20- अमावस्था पुण्य,दि. 24- विनायक चतुर्थी व्रत, दि.25- गुरुतेग बहादुर बलिदान दिवस, नाग पंचमी (द. भा.),दि. 26- चम्पा छठ, स्कन्द छठ, दि. 28- श्री दुर्गाष्टमी

मूल विचार नवम्बर -2025

मूल विचार – दि. 3 को 15/05 से दि. 5 को 9/40 तक, दि. 11 को 18/17 से दि. 13 को 19/38 तक, दि. 21 को 13/55 से दि. 23 को 19/27 बजे तक गण्ड मूल नक्षत्र है।

ग्रह स्थिति नवम्बर -2025 

ग्रह स्थिति – दि. 2 तुला में शुक्र,दि. 6 मंगल अस्त,दि. 9 वक्री बुध,दि. 11 वक्री गुरु,दि. 13 बुधास्त पश्चिम,दि. 16 वृश्चिक में सूर्य,दि. 23 तुला में बुध,दि. 25 बुधोदय पूर्व,दि. 26 वृश्चिक में शुक्र,दि. 28 शनि मार्गी,दि. 29 बुध मार्गी

पंचक विचार नवम्बर -2025  

पंचक विचार -(धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से रेवती नक्षत्र तक) पंचको में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना मकान दुकान आदि की छत डालना चारपाई पलंग आदि बुनना,दाह संस्कार,बांस की चटाई दीवार प्रारंभ करना आदि स्तंभ रोपण तांबा पीतल तृण काष्ट आदि का संचय करना आदि कार्यों का निषेध माना जाता है समुचित उपाय एवं पंचक शांति करवा कर ही उक्त कार्यों का संपादन करना कल्याणकारी होगा ध्यान रहेगा  पंचर नक्षत्रों का विचार मात्र उपरोक्त विशेष कृतियों के लिए ही किया जाता है विवाह मंडल आरंभ गृह प्रवेश प्रवेश उपनयन आदि मुद्दों से तो पंचक नक्षत्रका प्रयोग शुभ माना जाता है,मसारंभ से दि.04 को 12-34 तक, दि.27 को 14-07 से दि. 01 को 23-18 बजे तक पंचक हैं।

 अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227

भद्रा विचार नवम्बर -2025 

भद्रा काल का शुभ अशुभ विचार – भद्रा काल में विवाह मुंडन, गृह प्रवेश, रक्षाबंधन आदि मांगलिक कृत्य का निषेध माना जाता है परंतु भद्रा काल में शत्रु का उच्चाटन करना,स्त्री प्रसंग में,यज्ञ करना,स्नान करना,अस्त्र शस्त्र का प्रयोग,ऑपरेशन कराना, मुकदमा करना,अग्नि लगाना,किसी वस्तु को काटना,भैस,घोड़ा व ऊंट संबंधी कार्य प्रशस्त माने जाते हैं सामान्य परिस्थिति में विवाह आदि शुभ मुहूर्त में भद्रा का त्याग करना चाहिए परंतु आवश्यक परिस्थितिवश अतिआवश्यक कार्य भूलोक की भद्रा ,भद्रा मुख छोड़कर कर भद्रा पुच्छ में शुभ कार्य कर सकते है

दि. 1 को 20/21 से दि. 2 को 7/31 तक, दि. 4 को 22/36 से दि. 5 को 8/44 तक, दि. 7 को 21/18 से दि. 8 को 7/32 तर्क, दि. 11 को 0/08 से 11/39 तक, दि. 14 को 12/07 से दि. 15 को 0/50 तक, दि. 18 को 7/12 से 20/27 तक, दि.24 को 8/26 से 21/22 तक, दि. 28 को 0/30 से 12/22 बजे तक भद्रा है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227

सर्वार्थ सिद्धि योग नवम्बर -2025  

दैनिक जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शीघ्र ही किसी  शुभ मुहूर्त का अभाव हो,किंतु शुभ मुहर्त के लिए अधिक दिनों तक रुका ना जा सकता हो तो इन सुयोग्य वाले मुहर्तु  को सफलता से ग्रहण किया जा सकता है | इन से प्राप्त होने वाले अभीष्ट फल के विषय में संशय नहीं करना चाहिए यह योग हैं सर्वार्थ सिद्धि,अमृत सिद्धि योग एवं रवियोग | योग्यता नाम तथा गुण अनुसार सर्वांगीण सिद्ध कारक  है| 

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227

दिनांक प्रारंभ दिनांक समाप्त
02 17-03 03 06-38
04 12-34 05 06-40
10 18-48 11 06-44
11 18-17 12 06-45
20 10-58 21 13-55
23 06-59 23 19-27
30 06-59 01 07-00

चौघड़िया मुहूर्त 

चौघड़िया मुहूर्त, ज्योतिष में शुभ और अशुभ समय जानने की एक प्रणाली है। यह 24 घंटों को 8 भागों में विभाजित करता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया एक निश्चित अवधि का होता है, और इन्हें शुभ और अशुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है। 

चौघड़िया मुहूर्त क्या है – 24 घंटों को 16 भागों में बांटा जाता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया लगभग 1.30 घंटे का होता है। 

शुभ-अशुभ – कुछ चौघड़िया शुभ माने जाते हैं, जैसे अमृत, शुभ, लाभ, और चर। कुछ अशुभ माने जाते हैं, जैसे रोग, उद्वेग, और काल। चौघड़िया का उपयोग शुभ कार्यों, जैसे विवाह, यात्रा, और व्यापार शुरू करने के लिए शुभ समय जानने के लिए किया जाता है। 

चौघड़िया के प्रकार – दिन का चौघड़िया,सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को दिन का चौघड़िया कहा जाता है। 

रात का चौघड़िया,सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक के समय को रात का चौघड़िया कहा जाता है। 

चौघड़िया का महत्व – चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने के लिए एक अच्छे समय का चयन करने के लिए किया जाता है। यह माना जाता है कि यदि कोई कार्य शुभ चौघड़िया में शुरू किया जाता है, तो उसके सफल होने की संभावना अधिक होती है।   

सुर्य उदय- सुर्य अस्त नवम्बर -2025  

दिनांक  01  05  10  15 20  25  30
उदय  06-34  06-37  06-41  06-45  06-49  06-53  06-57 
अस्त  17-33  17-30  17-27  17-25  17-23  17-22  17-22 

 राहू काल 

 राहुकाल -राहुकाल दक्षिण भारत की देन है,दक्षिण भारत में राहु काल में कृत्य करना अच्छा नहीं माना जाता, राहु काल में शुभ कृतियों में वर्जित करने की परंपरा अब हमारे उत्तरी भारत में भी अपनाने लगे हैं राहुकाल प्रतिदिन सूर्यादि वारों में भिन्न-भिन्न समय पर केवल डेढ़ डेढ़ घंटे के लिए घटित होता है |

संक्रांति विचार

इस मास की संक्रान्ति वृश्चिक मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी रविवार दि. 16 नवम्बर को अपराह्न 13/36 पर 30 मु. उठी धापी दक्षिण गमन नैऋत्य दृष्टि किये वायुमण्डल में प्रवेश करेगी। गतवार 3, गत नक्षत्र 4, वार नाम घोरा, शुद्र सुखी, नक्षत्र नाम ध्वांक्षी वैश्य सुखी। सभी धान्य, रस पदार्थ, घी, तेल, तिल, मसूर, कपड़ा, ऊन, चना, तांबा, पीतल, लोहा, जस्ता आदि में तेजी बनेगी।

आकाश लक्षण

मास में मंगल अस्त, बुध वक्री मार्गी उदयास्त और गुरु वक्री शनि मार्गी के प्रभाव में मौसम में भारी परिवर्तन होगा। बादल चाल मेघाच्छन से कहीं हल्की, कहीं भारी वर्षा होगी। पर्वतीय क्षेत्रों के उतंग स्थानों पर बर्फ गिरेगी। मैदानी स्थानों पर ठण्ड का प्रभाव बढ़ेगा। कश्मीर, भूटान, शिलांग, हि.प्र. आदि पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की वर्षा सम्भव है।

  मांगलिक दोष विचार परिहार

वर अथवा कन्या दोनों में से किसी की भी कुंडली में 1,4,7,8 व 12 भाव में मंगल होने से ये मांगलिक माने जाते हैं,मंगली से मंगली के विवाह में दोष न होते हुए भी जन्म पत्रिका के अनुसार गुणों को मिलाना ही चाहिए यदि मंगल के साथ शनि अथवा राहु केतु भी हो तो प्रबल मंगली डबल मंगली योग होता है | इसी प्रकार गुरु अथवा चंद्रमा केंद्र हो तो दोष का परिहार भी हो जाता है |इसके अतिरिक्त मेष वृश्चिक मकर का मंगल होने से भी दोष नष्ट हो जाता है | इसी प्रकार यदि वर या कन्या किसी भी कुंडली में 1,4,7,9,12 स्थानों में शनि हो केंद्र त्रिकोण भावो में शुभ ग्रह, 3,6,11 भावो में पाप ग्रह हों तो भी मंगलीक दोष का आंशिक परिहार होता है, सप्तम ग्रह में यदि सप्तमेश हो तो भी दोष निवृत्त होता है |

स्वयं सिद्ध मुहूर्त

 स्वयं सिद्ध मुहूर्त चैत्र शुक्ल प्रतिपदा वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय तृतीया आश्विन शुक्ल दशमी विजयदशमी दीपावली के प्रदोष काल का आधा भाग भारत में से इसके अतिरिक्त लोकाचार और देश आचार्य के अनुसार निम्नलिखित कृतियों को भी स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है बडावली नामी देव प्रबोधिनी एकादशी बसंत पंचमी फुलेरा दूज इन में से किसी भी कार्य को करने के लिए पंचांग शुद्धि देखने की आवश्यकता नहीं है परंतु विवाह आदि में तो पंचांग में दिए गए मुहूर्त व कार्य करना श्रेष्ठ रहता है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227

जन्म कुंडली बनवाने व दिखने हेतु निम्न लिंक फॉर्म को भरे व संपर्क करें शर्मा जी 9312002527 

https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdKcPy83LAALZqG2Te-Vn2RvC7qthkg0TTdzz6xX317iGhyxQ/viewform?usp=sf_link

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