फरवरी मास 2026 का पंचांग
सतीश शर्मा 
फरवरी मास 2026 का पंचांग ,भारतीय व्रतोत्सव फरवरी -2026
दि. 1- सत्य व्रत, श्री रविदास जयंती, माघ स्नान समाप्त, माघी पूर्णिमा, श्री ललिता जयंती,दि. 5- श्री गणेश चतुर्थी व्रत,दि. 9- श्रीनाथ पाटोत्सव (नाथद्वारा), कालाष्टमी, सीता-हल अष्टमी,दि. 11-गुरु रामदास नवमी,दि. 12- दयानन्द सरस्वती जयंती,दि. 13- संक्रांति पुण्य, विजया एकादशी व्रत,दि. 14-शनि प्रदोष व्रत,दि. 15- श्री महाशिवरात्रि व्रत,दि. 17- अमावस्या पुण्य,दि. 19- श्री रामकृष्ण परमहंस जयंती, फुलैरा दूज,दि.21-विनायक चतुर्थी व्रत,दि. 24- होलाष्टक प्रारम्भ, दुर्गाष्टमी,दि.27-आमला 11 व्रत, मेला खाटू श्यामजी 2 दिन का, रामस्नेही सम्प्रदाय का फूलडोल महोत्सव,दि. 28-गोविन्द द्वादशी
मूल विचार फरवरी – 2026
दि. 1 को 23/57 से दि. 3 को 22/10 तक, दि. 11 को 10/52 से दि. 13 को 16/12 तक, दि. 20 को 20/07 से दि. 22 को 17/54 बजे तक गण्ड मूल नक्षत्र हैं।
ग्रह स्थिति फरवरी -2026
ग्रह स्थिति – दि. 1 शुक्रोदय पश्चिम,दि. 3 बुध कुम्भ में,दि. 6 शुक्र कुम्भ में,दि. 8 बुधोदय पश्चिम,दि. 13 सूर्य कुम्भ में,दि. 23 मंगल कुम्भ में,दि. 26 बुध वक्री
पंचक विचार फरवरी -2026
पंचक विचार -(धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से रेवती नक्षत्र तक) पंचको में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना मकान दुकान आदि की छत डालना चारपाई पलंग आदि बुनना,दाह संस्कार,बांस की चटाई दीवार प्रारंभ करना आदि स्तंभ रोपण तांबा पीतल तृण काष्ट आदि का संचय करना आदि कार्यों का निषेध माना जाता है समुचित उपाय एवं पंचक शांति करवा कर ही उक्त कार्यों का संपादन करना कल्याणकारी होगा ध्यान रहेगा पंचर नक्षत्रों का विचार मात्र उपरोक्त विशेष कृतियों के लिए ही किया जाता है विवाह मंडल आरंभ गृह प्रवेश प्रवेश उपनयन आदि मुद्दों से तो पंचक नक्षत्रका प्रयोग शुभ माना जाता है, 17 को 09-05 बजे से 21 को 19- 06 तक पंचक हैं।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227
भद्रा विचार फरवरी -2026
भद्रा काल का शुभ अशुभ विचार – भद्रा काल में विवाह मुंडन, गृह प्रवेश, रक्षाबंधन आदि मांगलिक कृत्य का निषेध माना जाता है परंतु भद्रा काल में शत्रु का उच्चाटन करना,स्त्री प्रसंग में,यज्ञ करना,स्नान करना,अस्त्र शस्त्र का प्रयोग,ऑपरेशन कराना, मुकदमा करना,अग्नि लगाना,किसी वस्तु को काटना,भैस,घोड़ा व ऊंट संबंधी कार्य प्रशस्त माने जाते हैं सामान्य परिस्थिति में विवाह आदि शुभ मुहूर्त में भद्रा का त्याग करना चाहिए परंतु आवश्यक परिस्थितिवश अतिआवश्यक कार्य भूलोक की भद्रा ,भद्रा मुख छोड़कर कर भद्रा पुच्छ में शुभ कार्य कर सकते है |
दि. 1 को 5/52 से 16/42 तक, दि. 4 को 12/19 से दि. 5 को 00/09 तक, दि. 8 को 2/54 से 15/54 तक, दि. 11 को 23/10 से दि. 12 को 12/22 तक, दि. 15 को 17/05 से दि. 16 को 5/19 तक, दि. 21 को 1/49 से 13/01 तक,दि. 24 को 7/02 से 17/58 तक, दि. 27 को 11/32 से 22/33 बजे तक भद्रा है।
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सर्वार्थ सिद्धि योग फरवरी -2026
दैनिक जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शीघ्र ही किसी शुभ मुहूर्त का अभाव हो,किंतु शुभ मुहर्त के लिए अधिक दिनों तक रुका ना जा सकता हो तो इन सुयोग्य वाले मुहर्तु को सफलता से ग्रहण किया जा सकता है | इन से प्राप्त होने वाले अभीष्ट फल के विषय में संशय नहीं करना चाहिए यह योग हैं सर्वार्थ सिद्धि,अमृत सिद्धि योग एवं रवियोग | योग्यता नाम तथा गुण अनुसार सर्वांगीण सिद्ध कारक है|
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227
| दिनांक | प्रारंभ | दिनांक | समाप्त |
| 01 | 07-13 | 01 | 23-57 |
| 08 | 02-28 | 08 | 07-09 |
| 11 | 07-07 | 11 | 10-52 |
| 15 | 07-04 | 15 | 19-48 |
| 16 | 07-03 | 16 | 20-47 |
| 20 | 20-07 | 21 | 06-58 |
| 22 | 06-57 | 22 | 17-54 |
| 24 | 06-55 | 24 | 15-07 |
| 25 | 06-54 | 26 | 06-53 |
| 27 | 10-49 | 28 | 06-48 |
चौघड़िया मुहूर्त
चौघड़िया मुहूर्त, ज्योतिष में शुभ और अशुभ समय जानने की एक प्रणाली है। यह 24 घंटों को 8 भागों में विभाजित करता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया एक निश्चित अवधि का होता है, और इन्हें शुभ और अशुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
चौघड़िया मुहूर्त क्या है – 24 घंटों को 16 भागों में बांटा जाता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया लगभग 1.30 घंटे का होता है।
शुभ-अशुभ – कुछ चौघड़िया शुभ माने जाते हैं, जैसे अमृत, शुभ, लाभ, और चर। कुछ अशुभ माने जाते हैं, जैसे रोग, उद्वेग, और काल। चौघड़िया का उपयोग शुभ कार्यों, जैसे विवाह, यात्रा, और व्यापार शुरू करने के लिए शुभ समय जानने के लिए किया जाता है।
चौघड़िया के प्रकार – दिन का चौघड़िया,सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को दिन का चौघड़िया कहा जाता है।
रात का चौघड़िया,सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक के समय को रात का चौघड़िया कहा जाता है।
चौघड़िया का महत्व – चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने के लिए एक अच्छे समय का चयन करने के लिए किया जाता है। यह माना जाता है कि यदि कोई कार्य शुभ चौघड़िया में शुरू किया जाता है, तो उसके सफल होने की संभावना अधिक होती है।
सुर्य उदय- सुर्य अस्त फरवरी -2026
| दिनांक | 01 | 05 | 10 | 15 | 20 | 25 | 30 |
| उदय | 07-13 | 07-11 | 07-07 | 07-03 | 06-59 | 06-54 | 06-51 |
| अस्त | 17-56 | 18-00 | 18-03 | 18-07 | 18-11 | 18-14 | 18-16 |
राहू काल
राहुकाल -राहुकाल दक्षिण भारत की देन है,दक्षिण भारत में राहु काल में कृत्य करना अच्छा नहीं माना जाता, राहु काल में शुभ कृतियों में वर्जित करने की परंपरा अब हमारे उत्तरी भारत में भी अपनाने लगे हैं राहुकाल प्रतिदिन सूर्यादि वारों में भिन्न-भिन्न समय पर केवल डेढ़ डेढ़ घंटे के लिए घटित होता है |
संक्रांति विचार फरवरी 2026
इस मास की कुम्भ संक्रान्ति फाल्गुन कृष्ण दशमी गुरुवार दि. 12/13 को रात्रि के चौथे प्रहर में 28/07 बजे 30 मु. बैठी धापी पूर्व गमन, अग्नि दृष्टि किये वरुण मण्डल में प्रवेश करेगी। गतवार 2, गत नक्षत्र 3, वार नाम नन्दा-द्विज सुखी, नक्षत्र नाम राक्षसी-चाण्डाल सुखी। गुरुवारी संक्रान्ति होने से सोना, चांदी, सरसों, तिलहन वस्तु, तांबा, पीतल, रूई, अलसी, मूंगफली, दुधारू पशु, मेवा, बादाम, छुआरा, दाख चिरौंजी, गोला, काजू, खुशबू वाले पदार्थों में मन्दा रहेगा।
आकाश लक्षण फरवरी – 2026
पीछे समय से चली आ रही चार-पांच ग्रहों की युति बराबर बनी आ रही है। इसके प्रभाव से कभी-कभी कहीं मौसम में परिवर्तन होना सम्भव है। तापमान में वृद्धि होगी। वायु वेग, विद्युत गाज, मेघाडम्बर से कहीं ओलावृष्टि, झंझावत से कृषि कार्य प्रभावित होंगे। कहीं भूकम्प से हानि होगी।
मांगलिक दोष विचार परिहार
वर अथवा कन्या दोनों में से किसी की भी कुंडली में 1,4,7,8 व 12 भाव में मंगल होने से ये मांगलिक माने जाते हैं,मंगली से मंगली के विवाह में दोष न होते हुए भी जन्म पत्रिका के अनुसार गुणों को मिलाना ही चाहिए यदि मंगल के साथ शनि अथवा राहु केतु भी हो तो प्रबल मंगली डबल मंगली योग होता है | इसी प्रकार गुरु अथवा चंद्रमा केंद्र हो तो दोष का परिहार भी हो जाता है |इसके अतिरिक्त मेष वृश्चिक मकर का मंगल होने से भी दोष नष्ट हो जाता है | इसी प्रकार यदि वर या कन्या किसी भी कुंडली में 1,4,7,9,12 स्थानों में शनि हो केंद्र त्रिकोण भावो में शुभ ग्रह, 3,6,11 भावो में पाप ग्रह हों तो भी मंगलीक दोष का आंशिक परिहार होता है, सप्तम ग्रह में यदि सप्तमेश हो तो भी दोष निवृत्त होता है |
स्वयं सिद्ध मुहूर्त
स्वयं सिद्ध मुहूर्त चैत्र शुक्ल प्रतिपदा वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय तृतीया आश्विन शुक्ल दशमी विजयदशमी दीपावली के प्रदोष काल का आधा भाग भारत में से इसके अतिरिक्त लोकाचार और देश आचार्य के अनुसार निम्नलिखित कृतियों को भी स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है बडावली नामी देव प्रबोधिनी एकादशी बसंत पंचमी फुलेरा दूज इन में से किसी भी कार्य को करने के लिए पंचांग शुद्धि देखने की आवश्यकता नहीं है परंतु विवाह आदि में तो पंचांग में दिए गए मुहूर्त व कार्य करना श्रेष्ठ रहता है।
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भारतीय व्रतोत्सव जनवरी -2026
दि. 1-प्रदोष व्रत,दि. 2-सत्य व्रत,दि. 3- पौषी पूर्णिमा, माघ स्नानारम्भ, शाकम्भरी जयंती,दि. 6- संकटहारिणी गणेश चतुर्थी व्रत,दि. 9-रामानन्दाचार्य जयंती,दि. 10-कालाष्टमी,दि. 12- स्वामी विवेकानन्द जयंती,दि. 13-लोहिड़ी (पंजाब),दि. 14- षट्तिला एकादशी व्रत, मकर संक्रांति पुण्य काल,दि. 16-प्रदोष व्रत,दि. 17- मास शिवरात्रि,दि. 18-मौनी अमावस्या, मेला प्रयागराज,दि. 19- गुप्त नवरात्र प्रारम्भ,दि. 21-गौरी तीज,दि. 22- तिलकुंद वरद् चतुर्थी व्रत,दि. 23- श्री वसंत पंचमी, श्री सरस्वती पूजा,दि. 25- रथ सप्तमी, अचला सप्तमी,दि. 26- भीष्माष्टमी, दुर्गाष्टमी,दि. 27- गुप्त नवरात्र समाप्त,दि. 29-जया एकादशी व्रत, भीष्म द्वादशी,दि.30- प्रदोष व्रत, मेला जैसलमेर 3 दिन का
मूल विचार जनवरी – 2026
मूल विचार – दि. 5 को 13/24 से दि. 7 को 11/56 तक, दि. 15 को 8/12 तक, दि. 24 3/03 से दि. 17 को को 14/15 से दि. 26 को 12/32 बजे तक गण्डमूल नक्षत्र हैं।
ग्रह स्थिति जनवरी -2026
ग्रह स्थिति – दि. 2 बुध पूर्वास्त,दि. 13 शुक्र मकर में,दि. 14 सूर्य मकर में,दि. 16 मंगल मकर में,दि. 17 बुध मकर में
पंचक विचार जनवरी -2026
पंचक विचार -(धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से रेवती नक्षत्र तक) पंचको में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना मकान दुकान आदि की छत डालना चारपाई पलंग आदि बुनना,दाह संस्कार,बांस की चटाई दीवार प्रारंभ करना आदि स्तंभ रोपण तांबा पीतल तृण काष्ट आदि का संचय करना आदि कार्यों का निषेध माना जाता है समुचित उपाय एवं पंचक शांति करवा कर ही उक्त कार्यों का संपादन करना कल्याणकारी होगा ध्यान रहेगा पंचर नक्षत्रों का विचार मात्र उपरोक्त विशेष कृतियों के लिए ही किया जाता है विवाह मंडल आरंभ गृह प्रवेश प्रवेश उपनयन आदि मुद्दों से तो पंचक नक्षत्रका प्रयोग शुभ माना जाता है, 21 को 01-35 बजे से 25 को 13- 25 तक पंचक हैं।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227
भद्रा विचार जनवरी -2026
भद्रा काल का शुभ अशुभ विचार – भद्रा काल में विवाह मुंडन, गृह प्रवेश, रक्षाबंधन आदि मांगलिक कृत्य का निषेध माना जाता है परंतु भद्रा काल में शत्रु का उच्चाटन करना,स्त्री प्रसंग में,यज्ञ करना,स्नान करना,अस्त्र शस्त्र का प्रयोग,ऑपरेशन कराना, मुकदमा करना,अग्नि लगाना,किसी वस्तु को काटना,भैस,घोड़ा व ऊंट संबंधी कार्य प्रशस्त माने जाते हैं सामान्य परिस्थिति में विवाह आदि शुभ मुहूर्त में भद्रा का त्याग करना चाहिए परंतु आवश्यक परिस्थितिवश अतिआवश्यक कार्य भूलोक की भद्रा ,भद्रा मुख छोड़कर कर भद्रा पुच्छ में शुभ कार्य कर सकते है |
दि. 2 को 18/53 में दि. 3 को 5/12 तक, दि. 5 को 20/58 में दि. 6 को 8/01 तक, दि. 9 को 7/05 से 19/39 तक दि. 13 को 2/00 से 15/18 तक, दि. 16 को 22/21 से दि. 17 को 11/16 तक, दि. 22 को 14/40 से दि. 23 को 2/28 तक, दि. 25 को 23/10 से दि. 26 को 10/17 तक, दि. 29 को 3/15 से 13/55 बजे तक भद्रा है।
सर्वार्थ सिद्धि योग जनवरी -2026
दैनिक जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शीघ्र ही किसी शुभ मुहूर्त का अभाव हो,किंतु शुभ मुहर्त के लिए अधिक दिनों तक रुका ना जा सकता हो तो इन सुयोग्य वाले मुहर्तु को सफलता से ग्रहण किया जा सकता है | इन से प्राप्त होने वाले अभीष्ट फल के विषय में संशय नहीं करना चाहिए यह योग हैं सर्वार्थ सिद्धि,अमृत सिद्धि योग एवं रवियोग | योग्यता नाम तथा गुण अनुसार सर्वांगीण सिद्ध कारक है|
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227
| दिनांक | प्रारंभ | दिनांक | समाप्त |
| 31 | 03-58 | 01 | 07-19 |
| 06 | 07-19 | 06 | 12-17 |
| 14 | 07-18 | 15 | 03-03 |
| 18 | 10-14 | 19 | 07-18 |
| 19 | 11-52 | 20 | 07-18 |
| 25 | 13-35 | 26 | 07-16 |
| 27 | 11-08 | 29 | 07-15 |
| 31 | 03-27 | 31 | 07-14 |
चौघड़िया मुहूर्त
चौघड़िया मुहूर्त, ज्योतिष में शुभ और अशुभ समय जानने की एक प्रणाली है। यह 24 घंटों को 8 भागों में विभाजित करता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया एक निश्चित अवधि का होता है, और इन्हें शुभ और अशुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
चौघड़िया मुहूर्त क्या है – 24 घंटों को 16 भागों में बांटा जाता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया लगभग 1.30 घंटे का होता है।
शुभ-अशुभ – कुछ चौघड़िया शुभ माने जाते हैं, जैसे अमृत, शुभ, लाभ, और चर। कुछ अशुभ माने जाते हैं, जैसे रोग, उद्वेग, और काल। चौघड़िया का उपयोग शुभ कार्यों, जैसे विवाह, यात्रा, और व्यापार शुरू करने के लिए शुभ समय जानने के लिए किया जाता है।
चौघड़िया के प्रकार – दिन का चौघड़िया,सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को दिन का चौघड़िया कहा जाता है।
रात का चौघड़िया,सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक के समय को रात का चौघड़िया कहा जाता है।
चौघड़िया का महत्व – चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने के लिए एक अच्छे समय का चयन करने के लिए किया जाता है। यह माना जाता है कि यदि कोई कार्य शुभ चौघड़िया में शुरू किया जाता है, तो उसके सफल होने की संभावना अधिक होती है।
सुर्य उदय- सुर्य अस्त जनवरी -2026
| दिनांक | 01 | 05 | 10 | 15 | 20 | 25 | 30 |
| उदय | 07-18 | 07-19 | 07-19 | 07-19 | 07-18 | 07-17 | 07-14 |
| अस्त | 17-31 | 17-34 | 17-38 | 17-42 | 17-46 | 17-50 | 17-55 |
राहू काल
राहुकाल -राहुकाल दक्षिण भारत की देन है,दक्षिण भारत में राहु काल में कृत्य करना अच्छा नहीं माना जाता, राहु काल में शुभ कृतियों में वर्जित करने की परंपरा अब हमारे उत्तरी भारत में भी अपनाने लगे हैं राहुकाल प्रतिदिन सूर्यादि वारों में भिन्न-भिन्न समय पर केवल डेढ़ डेढ़ घंटे के लिए घटित होता है |
संक्रांति विचार
इस मास की संक्रान्ति मकर माघ कृष्ण एकादशी बुधवार दि. 14 जनवरी को अपराह्न 15/05 बजे 30 मु. बैठी धापी पश्चिम गमन वायव्य दृष्टि किये माहेन्द्र मण्डल में प्रवेश करेगी। गतवार-नक्षत्र 3, वार नक्षत्र नाम मन्दाकिनी-राजा सुखी । बुधवारी संक्रान्ति होने से सभी रसायन वस्तु, रस पदार्थ, गुड़, खाण्ड, सभी तिलहन, घी, तेल, सभी किराना मेवा में तेजी। अन्नादि में मन्दा रहेगा।
आकाश लक्षण
इस मास चार ग्रहों की युति वह ग्रह चाल व नाड़ी परिवर्तन से मौसम बिगड़ेगा । प्राकृतिक आपदा, आकाश धुंध से प्रभावित रहेगा कहीं खाड व्रष्टि होगी। हिमाचल प्रदेश शिलांग असम अरुणाचल जम्मू कश्मीर में शीत लहर चलेगी । समुद्री क्षेत्र पर कहीं तूफान आदि से हानि संभव है उत्तरी भारत में शीत लहर एवं धुंध का प्रभाव रहेगा।
मांगलिक दोष विचार परिहार
वर अथवा कन्या दोनों में से किसी की भी कुंडली में 1,4,7,8 व 12 भाव में मंगल होने से ये मांगलिक माने जाते हैं,मंगली से मंगली के विवाह में दोष न होते हुए भी जन्म पत्रिका के अनुसार गुणों को मिलाना ही चाहिए यदि मंगल के साथ शनि अथवा राहु केतु भी हो तो प्रबल मंगली डबल मंगली योग होता है | इसी प्रकार गुरु अथवा चंद्रमा केंद्र हो तो दोष का परिहार भी हो जाता है |इसके अतिरिक्त मेष वृश्चिक मकर का मंगल होने से भी दोष नष्ट हो जाता है | इसी प्रकार यदि वर या कन्या किसी भी कुंडली में 1,4,7,9,12 स्थानों में शनि हो केंद्र त्रिकोण भावो में शुभ ग्रह, 3,6,11 भावो में पाप ग्रह हों तो भी मंगलीक दोष का आंशिक परिहार होता है, सप्तम ग्रह में यदि सप्तमेश हो तो भी दोष निवृत्त होता है |
स्वयं सिद्ध मुहूर्त
स्वयं सिद्ध मुहूर्त चैत्र शुक्ल प्रतिपदा वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय तृतीया आश्विन शुक्ल दशमी विजयदशमी दीपावली के प्रदोष काल का आधा भाग भारत में से इसके अतिरिक्त लोकाचार और देश आचार्य के अनुसार निम्नलिखित कृतियों को भी स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है बडावली नामी देव प्रबोधिनी एकादशी बसंत पंचमी फुलेरा दूज इन में से किसी भी कार्य को करने के लिए पंचांग शुद्धि देखने की आवश्यकता नहीं है परंतु विवाह आदि में तो पंचांग में दिए गए मुहूर्त व कार्य करना श्रेष्ठ रहता है।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227





