मौनी अमावस्या का महत्व व करने योग्य उपाय 

मौनी अमावस्या का महत्व व करने योग्य उपाय 

सतीश शर्मा

मौनी अमावस्या हिंदू धर्म में एक पवित्र और शुभ दिन माना जाता है. यह अमावस्या माघ मास में आती है और इस दिन आध्यात्मिक शुद्धि, संयम और पितृ तर्पण का विशेष महत्व होता है. इस दिन किए गए धार्मिक कर्म और पुण्य कार्य कई गुना फलदायी माने जाते हैं.संस्कृत में मौनी का अर्थ है मौन, इसलिए यह दिन मौन में व्यतीत किया जाता है और इस दिन कई धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।यह योग पर आधारित महाव्रत है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है।इस दिन मौन रहकर किए गए जप-तप और सेवा कार्य साधक को विशेष पुण्य प्रदान करते हैं। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस दिन किया गया स्नान और दान मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।

मौनी अमावस्या की कथा ‘गुणवती’ और ‘सोमा धोबिन’ की कहानी से जुड़ी है, जिसमें गुणवती के विवाह के बाद उसके पति की मृत्यु का दोष एक पतिव्रता सोमा के पुण्य दान करने से मिट जाता है, और सोमा द्वारा पीपल वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु की पूजा और 108 परिक्रमा करने से उसके मृत पति और पुत्र को पुनर्जीवन मिलता है, जिससे इस दिन दान-पूजा का विशेष महत्व है।  

मौनी अमावस्या व्रत कथा – एक  बार की बात है  कांचीपुरी में देवस्वामी नामक ब्राह्मण की बेटी गुणवती रहती थी। गुणवती का विवाह एक श्रेष्ठ ब्राह्मण युवक से हुआ था लेकिन गुणवती के विवाह के बाद उसके पति की मृत्यु होने की भविष्यवाणी होती है। यह सुनकर ब्राह्मण और उसकी पुत्री गुणवती बहुत दुखी रहने लगते हैं। इस सब का उपाय पूछने के लिए गुणवती अपने पिता के साथ एक ज्योतिषी के पास जाती है। ज्योतिषी गुणवती व उसके के छोटे भाई के साथ सोमा धोबिन (एक पतिव्रता महिला) के पास भेजता है और उनको समझाता है कि वह सोमा धोबिन से कहें कि वह अपना पुण्य दान का फल उनको दे दे। ताकि सोमा धोबिन के पुण्य दान से गुणवती के पति की जीवन रक्षा हो सके। सोमा का घर का रास्ता कठिनाइयां वाला व समुंद्र पार होता है। उनको मार्ग में एक गिद्ध दिखता है । गुणवती गिद्ध परिवार से सहायता की प्रार्थना करती है । गिद्ध परिवार उनके मदद करने के लिए तैयार हो जाता है, गिद्ध परिवार की मदद से वे समुद्र पार कर सोमा धोबिन के घर पहुँचते हैं। जहाँ गुणवती और उसका भाई उनकी सेवा करते हैं। सोमा धोबिन उनसे पूछती है कि आप मेरे यहां क्यों आए हो और इतनी सेवा क्यों कर रहे हो। गुणवती उनको बताती है कि मेरे पति के बारे में एक भविष्यवाणी हुई है कि उनकी मृत्यु हो जाएगी तब एक ज्योतिषी ने मुझे एक उपाय बताया कि अगर आप मुझे अपना दान पुण्य का फल दे दे तो मेरे पति की जीवन रक्षा हो सकती है। सोमा धोबिन स्वभाव से परोपकारी थी। इसलिए वह उनकी इस मांग को स्वीकार कर लेती है।  सोमा धोबिन गुणवती के घर जाकर पूजा करती है और अपने पुण्य दान कर देती है, जिससे गुणवती के पति का जीवन बच जाता है। पुण्य देने से सोमा के पति और पुत्र की अकाल मृत्यु हो जाती है। सोमा धोबिन बहुत रोती है और भगवान से प्रार्थना करती है कि बताओ मैंने तो किसी की मदद की है। उसकी प्रार्थना से खुश होकर भगवान सपने में आकर उसको उसका उपाय बताते हैं की पीपल के पेढ के नीचे जा कर भगवान विष्णु की पूजा करे । सोमा पीपल वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु की पूजा करती है और 108 परिक्रमा करती है। भगवान विष्णु प्रसन्न होकर सोमा के परिवार को नया जीवन देते हैं। मौनी अमावस्या पर मौन रहकर व्रत, दान, और भगवान विष्णु की पूजा करने से सुख-समृद्धि और मोक्ष मिलता है। इस दिन गंगा स्नान और पीपल की पूजा का भी विशेष महत्व है।  

संकलन ,लेखन व सम्पादन सतीश शर्मा ,आपके सुझाव व संशोधन स्वीकार्य व आमंत्रित है ॐ श्री श्याम देवाय नमः ।।

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