अमेरिकी टैरिफ ने भारत के पारंपरिक निर्यात क्षेत्रों को झटका दिया है, लेकिन इससे अवसर भी प्रदान हुआ है कि भारत अपने निर्यात ढांचे को अधिक विविध, आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाए इसके लिए वित मंत्रालय काम कर रहा होगा । भारत को दीर्घकालिक रणनीति के तहत नवाचार, विविधता और व्यापारिक संतुलन पर भी ध्यान देना होगा, ताकि ऐसी नीतिगत झटकों का असर भविष्य में कम किया जा सके इसके लिए बजट मे कुछ दीर्घकालीन उपाय करने होंगे। वित्त मंत्री संसद में देश की अनुमानित आय (कर और अन्य स्रोतों से) और अगले वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तावित खर्चों (शिक्षा, रक्षा, स्वास्थ्य पर) का ब्योरा पेश करते हैं। आम बजट में सरकार की आर्थिक नीति की दिशा दिखाई देती है। इसमें मंत्रालयों को उनके खर्चों के लिए पैसे का आवंटन होता है। बड़े तौर पर इसमें आने वाले साल के लिए कर प्रस्तावों का ब्योरा पेश किया जाता है। भारत का केंद्रीय बजट 2026-27, जो 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जा सकता है, अवसंरचना, रक्षा, ए आई और स्वच्छ ऊर्जा,पर्यटन,आतिथ्य सत्कार,धातु, खनन,जहाजरानी,रेल पर केंद्रित होने की उम्मीद है। 2025-26 के लिए ₹11.21 लाख करोड़ के पूंजीगत व्यय के साथ, यह बजट विकास को गति देने, टैक्स सुधारों (धारा 80C की सीमा बढ़ाने) और मिडिल क्लास को राहत देने पर जोर दे सकता है। बजट 2026 से लेन-देन में आने वाली बाधाओं को कम करने और पूंजी बाजार की वृद्धि को बनाए रखने की उम्मीद है। जैसे-जैसे पूंजी बाजार परिपक्व होते जा रहे हैं, विशेषज्ञों का कहना है कि अब नए प्रोत्साहन देने की तुलना में बाधाओं को कम करना अधिक महत्वपूर्ण है। टैक्स राहत की मांग पर भी ध्यान दिया जाएगा मध्य वर्ग की आयकर की धारा 80C की सीमा को ₹1.5 लाख से बढ़ाकर ₹3.5 लाख करने की उम्मीद है। रक्षा, ऑटो, रियल एस्टेट, टेलीकॉम और स्वच्छ ऊर्जा पर विशेष ध्यान देनी की उम्मीद है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कौशल विकास और डेटा सेंटर पर जोर दिया जाएगा इसके साथ हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर GST कम करने की भी सिफारिश है । विवाह जोड़ों के लिए ‘जॉइंट टैक्स सिस्टम’ के प्रस्ताव पर विचार हो सकता है। यह बजट भारत की राजकोषीय स्थिति को मजबूत करने के लिए ‘गवर्नेंस स्टिमुलस’ यानी नीतिगत सुधारों पर भी ध्यान केंद्रित कर सकता है। केंद्रीय बजट 2026 में ऐसे घोषणाओं की उम्मीद कर सकते हैं जिनसे किसानों, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों और महिलाओं की ऋण और वित्त तक पहुंच में सुधार होगा । कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए, केंद्रीय बजट 2026 में महिला किसानों के ऋण में सुधार के लिए एक नीतिगत दृष्टिकोण शामिल होने की संभावना है। ये सब बजट 2026 की प्रमुख उम्मीदें और विशेषताएं रहने वाली है,बड़ा पूंजीगत खर्च जो वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए ₹11.21 लाख करोड़ (जीडीपी का 3.1%) का सार्वजनिक पूंजीगत व्यय प्रस्तावित है।
इस पर भी हमे विचार करना होगा की रेवड़ी संस्कृति अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह है। अक्सर राजनीतिक दल सत्ता प्राप्त करने के लिए लोकलुभावन वादे कर देते हैं। रेवड़ी संस्कृति द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से वोट का सौदा किया जाता है। रेवड़ी संस्कृति में कोई भी दल किसी से पीछे नहीं रहना चाहता है। जबकि इस रेवड़ी संस्कृति की वजह से देश की अर्थव्यवस्था बिगड़ रही है और विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। रेवड़ी संस्कृति पर लगाम लगाने में चुनाव आयोग विफल रहा है, इसीलिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लोकलुभावन घोषणाओं पर सुनवाई के लिए तैयार होना स्वागतयोग्य कदम है। देश की एक बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रही है। देश के 80 करोड़ लोगों की मासिक आय लागभग पांच हजार रुपये है। आज देश में गरीबी सबसे बड़ी जाति बन चुकी है। इस वर्ग को मुफ्त योजनाओं के सहारे राजनीतिक दल अपने पाले में लाना चाहते हैं। रेवड़ी संस्कृति पर रोक लगाने का वक्त आ चुका है। यह राज्य और देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन चुका है। क्या बजट सत्र मे कुछ इस पर चर्चा होगी संभावना कम हैं ।
संकलन ,लेखन व सम्पादन सतीश शर्मा ,आपके सुझाव व संशोधन स्वीकार्य व आमंत्रित है। ।। ॐ श्री श्याम देवाय नमः ।।