नव विक्रमी संवत्सर 2083 का जीवन पर प्रभाव

नव विक्रमी संवत्सर 2083 का जीवन पर प्रभाव  

सतीश शर्मा

नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है। इस दिन हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होती है और चैत्र नवरात्रि भी शुरू होती है। इस साल विक्रम संवत 2082 की शुरुआत 19 मार्च 2026 से हो रही है। ब्रहापुराण अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सूर्योदय के समय ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इसके अतिरिक्त सत्ययुग का आरम्भ भी इसी दिन हुआ इसी महत्त्व को समझकर सम्राट् विक्रमादित्य जी ने अपने संवत्सर का आरम्भ (आज के प्रायः इक्कीस सौ वर्ष पहले) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के समय माना था-

“चैत्रे मासि जगद्ब्रह्मा ससर्ज प्रथमेऽहनि । शुक्लपक्षे समग्रं तत् तवा सूर्योदये सति ।।”

इस प्रमाण के अनुसार उदय-व्यापिनी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन संवत्सर का माना जाता है। ‘तिथिनिर्णय’ कार ने भी यही कहा है-“चैत्र शुक्ल प्रतिपदि वत्सरारम्भः, तत्रौदयिकी तिथिः ग्राह्या ।।”

परन्तु इस वर्ष वि. संवत् 2083 में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का क्षय हुआ 19 मार्च, 2026 ई., गुरुवार को सूर्योदय के अनन्तर 6:53 बाद प्रारम्भ इसी दिन गुरुवार को ही अग्रिम शुक्रवार के सूर्योदय से पहले (28:53 समाप्त हो रही है जिससे वह दोनों दिन (19 व 20 मार्च को) उदय-व्यापि है। इस स्थिति में निर्णयसिन्धु आदि धर्मशास्त्रों का निर्णय यह है कि यदि दोनों शुक्ल प्रतिपदा उदय-व्यापिनी न हो तो पहिले ही दिन संवत्सर का प्रारम्भ मानना

“दिनद्वये उदयव्याप्तौ-अव्याप्तौ वा पूर्वा ।।” (धर्मसिन्धुः)

इसलिए इस वर्ष नवसंवत्सर का प्रारम्भ 19 मार्च, 2026 ई., गुरुवार होगा।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि जिस दिन उदय-व्यापिनी हो, उस वार के स्वामी ही वर्षेश (वर्ष का राजा) माना जाता है। यदि प्रतिपदा दो दिन उदय-व्या (अर्थात् प्रतिपदा तिथि की वृद्धि), तो पहिले दिन के वारस्वामी को ही वर्ष माना जाता है। यदि प्रतिपदा का क्षय हो (अर्थात् दोनों दिनों में ही सूर्योदय तो भी पहिले दिन, चैत्र अमावस युक्ता प्रतिपदा वाले दिन वारस्वामी को ह (वर्ष का राजा) मानने का नियम है। अर्थात् दोनों स्थितियों में पहिले दिन क ही वर्षेश ही होता है।

“चैत्रे सित प्रतिपदि यो वारोऽर्कोदये स वर्षेशः।

 उदय द्वितये पूर्वो नोदययुगलेऽपि पूर्वः स्यात् ।।”

19 मार्च 26, को विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ ‘रौद्र’ संवत्सर से होने जा रहा है। यह साल गुरु और मंगल जैसे शक्तिशाली ग्रहों के प्रभाव में रहेगा, जिससे समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और व्यक्तिगत जीवन में बड़े बदलाव होगे। 

विक्रमी संवत  2083  मे जहां एक तरफ गुरु का ज्ञान हमें रास्ता दिखाएगा, वहीं मंगल की अग्नि हमारी परीक्षा लेगी। यदि हम संयम और अध्यात्म का दामन थामे रखें, तो यह ‘रौद्र’ साल भी हमारे लिए उन्नति के नए द्वार खोल सकता है।

 इस वर्ष विक्रमी संवत-2083 का नाम ‘रौद्र’ संवत्सर है, जो अपने नाम की तरह ही स्वभाव में थोड़ा ‘उग्र’ और ‘तेज’ रहने वाला है। ग्रहों की मंत्रिमंडल मे  बड़े बदलाव हुए हैं। रौद्र’ शब्द भगवान शिव के प्रलयंकारी रूप से जुड़ा है। इस साल प्रकृति और समाज में जबरदस्त उथल-पुथल दिख सकती है। 

राजा (बृहस्पति) ज्ञान और धर्म के देवता गुरु इस साल के राजा हैं। इसका मतलब है कि समाज में धर्म, आध्यात्म और नैतिकता को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। शिक्षा और न्याय के क्षेत्र में बड़े और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।इस वर्ष मंत्री मंगल है, साहस और ऊर्जा के प्रतीक मंगल मंत्री पद संभाल रहे हैं इसका यह संकेत है कि देश की सैन्य शक्ति और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, लेकिन साथ ही लोगों में आक्रामकता और गुस्सा भी बढ़ सकता है।अन्य विभाग मे मन के स्वामी चंद्रमा गृह मंत्री बने हैं, जो भावनाओं में उतार-चढ़ाव लाएंगे। वहीं बुध को खाद्य मंत्री का प्रभार मिला है, जिससे व्यापार और अनाज की कीमतों में हलचल संभव है।इस वर्ष अगर विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करें या ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें ओर जरूरतमंदों की मदद और पर्यावरण की सुरक्षा इस साल आपके ग्रहों की पीढ़ा शांत होगी । 

शिक्षा का यह प्रसार केवल समाज के सामूहिक सहयोग से ही संभव है। आप हमारे साथ सहयोगी के रूप में जुड़कर या ‘शिक्षा दान’ के माध्यम से इस नेक कार्य में सहभागी बन सकते हैं।

“एक बच्चा, एक शिक्षक, एक किताब और एक पेन पूरी दुनिया बदल सकते हैं।”

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1 thought on “नव विक्रमी संवत्सर 2083 का जीवन पर प्रभाव”

  1. Manoj Kumar Gautam

    Nav varsh ki bahut acchhi jankari prasit karne ke lie sadhubad. Vikram samvatsar sabhi ke lie Shubh avam Mangalmay ho.

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