श्रीकृष्ण जन्माष्टमी – धर्म, प्रेम और कर्म का उत्सव

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी – धर्म, प्रेम और कर्म का उत्सव

जन्माष्टमी पर मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए सरल और प्रभावी उपाय  

सतीश शर्मा

भारत त्योहारों का देश है और इन त्योहारों में जन्माष्टमी का एक विशेष स्थान है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

जन्माष्टमी पर मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आप नीचे दिए गए सरल और प्रभावी उपाय कर सकते हैं –

धन लाभ के लिए उपाय – केसर मिश्रित दूध – जन्माष्टमी की रात लड्डू गोपाल का केसर मिले हुए दूध से अभिषेक करें। इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

तिजोरी में सिक्का – पूजा के समय एक चांदी का सिक्का रखें। पूजा के बाद इसे अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर स्थापित करें।

सात कन्याओं को खीर – इस दिन सात छोटी कन्याओं को घर बुलाकर खीर या सफेद मिठाई खिलाएं। यह आर्थिक संकट दूर करने में मदद करता है।

नौकरी और व्यापार में उन्नति के लिए – पीले फूल और फल – भगवान कृष्ण के मंदिर जाकर पीले रंग के फूल, पीले फल और पीले वस्त्र अर्पित करें। इससे करियर में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

व्यवसाय स्थल पर बांसुरी – अपने ऑफिस या दुकान के मुख्य द्वार पर या पूजा स्थान पर लकड़ी की दो बांसुरी तिरछी करके लटकाएं। इससे व्यापार में वृद्धि होती है।

गाय को चारा – जन्माष्टमी के दिन सफेद गाय और बछड़े को हरा चारा या मीठी पूड़ी खिलाएं। इससे नौकरी में प्रमोशन के योग बनते हैं।

पारिवारिक सुख-शांति के लिए – माखन-मिश्री का भोग – कान्हा जी को मिश्री मिला हुआ माखन चढ़ाएं। बाद में इसे पूरे परिवार में प्रसाद के रूप में बांटें। इससे आपसी प्रेम बढ़ता है।

गंगाजल का छिड़काव – रात की पूजा के बाद शंख में गंगाजल भरकर पूरे घर में छिड़कें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है।

दीपक और कपूर – शाम को घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में गाय के घी का दीपक जलाएं। कपूर जलाकर पूरे घर में उसकी धूप दिखाएं।

चांदी की बांसुरी – जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण को चांदी की छोटी बांसुरी अर्पित करें। पूजा के बाद इसे अपनी तिजोरी या कार्यस्थल पर रखें। इससे धन का प्रवाह बढ़ता है।

मोर पंख – आर्थिक तंगी दूर करने के लिए इस दिन कान्हा को मोर पंख भेंट करें। बाद में इसे अपने घर की तिजोरी में सुरक्षित रख लें।

धनिया पंजीरी और तुलसी – पूजा के दौरान लड्डू गोपाल को माखन-मिश्री और धनिये की पंजीरी का भोग लगाएं। भोग में तुलसी का पत्ता अवश्य शामिल करें, क्योंकि इसके बिना भोग स्वीकार नहीं होता है।

मंत्र जाप – जन्माष्टमी की रात ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ क्लीम कृष्णाय नमः’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। इससे घर का वातावरण सकारात्मक बनता है।

तुलसी पूजन – शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं। इससे घर में शांति और बरकत बनी रहती है।

कथा – द्वापर युग में मथुरा के राजा कंस के अत्याचारों से पृथ्वी त्रस्त थी। कंस ने अपनी ही बहन देवकी और उसके पति वासुदेव को कारागार में डाल दिया था। आकाशवाणी हुई थी कि देवकी का आठवां पुत्र ही कंस का वध करेगा। इसी कारण कंस ने देवकी के सात पुत्रों को मार दिया। जब आठवें पुत्र के रूप में भगवान विष्णु ने भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया, तो उस रात घनघोर वर्षा हो रही थी। कारागार के ताले स्वयं खुल गए और वासुदेव जी बालक कृष्ण को टोकरी में लेकर यमुना पार गोकुल में नंद बाबा के घर ले गए। वहाँ उनका लालन-पालन यशोदा मैया ने किया। यही रात जन्माष्टमी कहलाई। श्रीकृष्ण केवल भगवान ही नहीं, एक संपूर्ण जीवन-दर्शन हैं।बाल रूप में वे प्रेम,मस्ती और नटखटपन के प्रतीक हैं, उनके बाल लीलाएं भी शिक्षा के रूप में ग्रहण की जाती है, बचपन में ही पूतना सहित अनेकों दूष्टो का अंत किया। युवा रूप में वे राधा और गोपियों के साथ निःस्वार्थ प्रेम के प्रतीक हैं, उनका रास और महारास गोपियों के साथ आज भी चिंतकों के लिए शोध का विषय है।

भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल रूप (गोकुल-वृंदावन की लीलाओं के दौरान) में कई प्रमुख राक्षसों और असुरों का वध किया था। कंस ने उन्हें मारने के लिए एक-एक करके कई भयानक असुर भेजे थे, जिनका बालकृष्ण ने अंत किया। पूतना राक्षसी यह कंस द्वारा भेजी गई पहली राक्षसी थी, जो सुंदर स्त्री का रूप बदलकर और स्तनों में विष लगाकर कृष्ण को मारने आई थी। बालकृष्ण ने उसका दूध पीने के साथ-साथ उसके प्राण भी हर लिए।शकटासुर  यह राक्षस गाड़ी (शकट) का रूप बदलकर कृष्ण का वध करने आया था। जब बालकृष्ण ने रोते हुए अपने पैर से ठोकर मारी, तो वह गाड़ी चकनाचूर हो गई और राक्षस मारा गया।तृणावर्त राक्षस यह बवंडर (तूफान) का रूप लेकर आया था और श्रीकृष्ण को आकाश में उड़ाकर ले गया था। कृष्ण ने अपना वजन इतना भारी कर लिया कि वह नीचे आ गिरा और उसका अंत हो गया।वत्सासुर: यह बछड़े का रूप धारण करके गोकुल में गायों के बीच छिपकर आया था। श्रीकृष्ण ने इसे पहचानकर इसकी टांगें पकड़ीं और घुमाकर एक पेड़ पर पटक दिया, जिससे इसकी मृत्यु हो गई।बकासुर यह एक विशाल बगुले (क्रेन) का रूप लेकर आया था और श्रीकृष्ण को निगलने का प्रयास किया था। कृष्ण ने उसके गले में जलने जैसा अहसास कराया और उसकी चोंच को चीरकर उसका वध कर दिया।अघासुर यह बकासुर और पूतना का भाई था तथा एक विशाल अजगर का रूप धारण करके रास्ते में बैठा था। इसने सभी ग्वाल-बालों और बछड़ों को अपने मुंह में निगल लिया था। तब कृष्ण ने अपने शरीर का आकार बहुत बड़ा कर लिया, जिससे उसका दम घुट गया और वह मारा गया।

गीता के उपदेशक के रूप में गीता के 18 अध्याय द्वारा वह हमारा जीवन जीने के लिए मार्गदर्शन करते हैं जो आज भी हमें प्रेरणा देता है, वे हमें कर्मयोग का संदेश देते हैं – “कर्म करो, फल की चिंता मत करो।” उनका जीवन सिखाता है कि जीवन की हर परिस्थिति में कैसे मुस्कुराते हुए, धर्म के मार्ग पर चलना है।

जन्माष्टमी का सबसे भव्य उत्सव मथुरा, वृंदावन और द्वारका में देखने को मिलता है, पर आज पूरे भारत और विदेशों में भी इसे उतने ही उत्साह से मनाया जाता है। मंदिरों में  मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। दिन भर भक्त उपवास रखते हैं। रात 12 बजे जब श्रीकृष्ण का जन्म होता है, तो शंख, घंटा और “नंद घर आनंद भयो” के जयकारों से वातावरण गूंज उठता है। झांकियां और दही-हांडी  घरों और मंदिरों में कृष्ण की बाल-लीलाओं की सुंदर झांकियां सजाई जाती हैं। महाराष्ट्र में दही-हांडी की परंपरा बहुत प्रसिद्ध है, जहाँ युवकों की टोली मानव पिरामिड बनाकर ऊँचाई पर टंगी मटकी फोड़ती है। इस्कॉन मंदिर नोएडा और दिल्ली के इस्कॉन मंदिरों में इस दिन विशेष भजन-कीर्तन, अभिषेक और महाप्रसाद का आयोजन होता है, जहाँ हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

जन्माष्टमी हमें याद दिलाती है कि जब-जब धरती पर पाप बढ़ेगा, तब-तब अच्छाई की रक्षा के लिए ईश्वर किसी न किसी रूप में आएंगे। श्रीकृष्ण का जीवन हमें प्रेम, मित्रता, साहस और कर्तव्य का संतुलन सिखाता है। आइए, इस जन्माष्टमी हम केवल बांसुरी बजाने वाले कृष्ण को ही नहीं, बल्कि गीता का ज्ञान देने वाले कृष्ण को भी अपने जीवन में अपनाएं। आपको और आपके परिवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं । भगवान आपको कर्म करने की शक्ति दें ।  जय श्रीकृष्ण!

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