गौएँ स्वर्ग की सीढ़ी है,गौएँ स्वर्ग में भी पूजी जाती है

गौएँ स्वर्ग की सीढ़ी है,गौएँ स्वर्ग में भी पूजी जाती है

सतीश शर्मा

भारतीय नस्ल की देशी गाय जिसकी पीठ पर कुकुद (यूँही) शिवलिंग-नुमा बनी होती है, जहाँ से सूर्य-केतु नाड़ी गाय के शरीर में शुरू होकर उसके स्तनों तक जाती है, जिससे वह सूर्य की किरणों द्वारा स्वर्णाक्षर पैदा करती हैं एवं अपने दूध में वह हमें स्वर्ण तत्त्व प्रदान करती है, जो हमें हर प्रकार की पौष्टिकता प्रदान कर निरोग रखने में सहायक है। इस गाय के गले की लटकन (गल कम्बल) झालर नुमा होती है।

गाय को माता कहा जाता है; क्योंकि माँ अपने बच्चों के लालन-पालन के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर देती है। यही गाय के साथ भी है। गाय का पूरा शरीर यहाँ तक कि उसका मूत्र और गोबर तक लाभदायक है। गाय के दूध को सर्वोत्तम पौष्टिक माना गया है, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वाधिक पौष्टिक होता है। माँ का दूध मानव को दो-तीन साल के लिए ही उपलब्ध होता है; जबकि गाय का दूध हमें जीवन भर पौष्टिकता प्रदान कर सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति प्रदान करता है। गाय जब रंभाती है, तो माँ शब्द निकलता है। इसीलिए गाय को माता कहते हैं। गाय हमारी प्यारी माता है जो संसार में प्रायः सर्वत्र पाई जाती है। परन्तु इस समय गाय की रक्षा के लिए सबको जागना होगा और भारत को गोहत्या के कलंक से मुक्त करना होगा, तभी भारत पूर्ण तरह से विक्सित् हो सकेगा इससे उत्तम किस्म का दूध प्राप्त होता है। 

भारतीय नस्ल की देसी गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास माना जाता है एवं 68 कोटि तीथों का वास इसमें है। इसलिए इसे चलता-फिरता देवालय कहा जाता है। गौग्रास व गौ की भारी महिमा है जिसका विवरण वेद-पुराणों में बतलाया गया है।

‘गौ रूपी तीर्थ में गंगा आदि सभी नदियों तथा तीर्थों का आवास है, उसकी परम पावन धूलि में सर्व-पुष्टि विद्यमान है, उसके गोबर में साक्षात् लक्ष्मी विराजमान है और उसे प्रणाम करने से धर्म सम्पन्न हो जाता है। अतः गोमाता सदा-सर्वदा प्रणाम करने योग्य है।’ गौएँ स्वर्ग की सीढ़ी है, गौएँ स्वर्ग में भी पूजी जाती है, गौएँ समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली देवियाँ हैं, उनसे बढ़कर और कोई श्रेष्ठ वस्तु नहीं है।

गौएँ संसार की माता हैं। उनकी पूजा करने से सम्पूर्ण पितरों और देवताओं की पूजा हो जाती है। जिनके गोबर से लीपने पर सभा-भवन, पौंसले, घर और देवमंदिर भी शुद्ध हो जाते हैं, उन गौओं से बढ़कर और कौन प्राणी हो सकता है? गायों के नाम और गुणों का कीर्तन तथा श्रवण करना, गायों को दान देना और उनका दर्शन करना बहुत प्रशंसनीय समझा जाता है और इनसे सम्पूर्ण पापों का नाश तथा परम कल्याण की प्राप्ति होती है। जहाँ गाएँ प्रसन्न रहती हैं, वहाँ समस्त सम्पदाएं स्वयमेव प्रकट होती हैं और जहाँ गाएँ दुःखी रहती हैं, वहाँ सम्पदाएं दुःखी होकर लुप्त हो जाती है।

50 गायों को एक साथ खड़ी कर किसी एक गाय के बछड़े को छोड़ दिया जाए, तो वह दौड़कर अपनी माँ के पास ही पहुँचेगा; जबकि भैंस के पाड़े को तो उसके स्वामी उसकी माँ के पास पहुँचाने का कार्य करते हैं। इससे सिद्ध होता है कि गाय और उसके बछड़े में सोचने और समझने की क्षमता भैंस से कहीं अधिक होती है।

गोभक्त मनुष्य जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है, वह सब उसे प्राप्त होती है। स्त्रियों में भी जो गौओं की भक्त हैं वे मनोवांछित कामनाएँ प्राप्त कर लेती हैं। पुत्रार्थी मनुष्य पुत्र पाता है और कन्यार्थी कन्या। धन चाहने वाले को धन और धर्म चाहने वाले को धर्म प्राप्त होता है। विद्यार्थी विद्या पाता है और सुखार्थी सुख। गौभक्त के लिए यहाँ कुछ भी दुर्लभ नहीं है।

शिक्षा का यह प्रसार केवल समाज के सामूहिक सहयोग से ही संभव है। आप हमारे साथ सहयोगी के रूप में जुड़कर या ‘शिक्षा दान’ के माध्यम से इस नेक कार्य में सहभागी बन सकते हैं।

“एक बच्चा, एक शिक्षक, एक किताब और एक पेन पूरी दुनिया बदल सकते हैं।”

 अज्ञान को दूर भगाएं ज्ञान का उजाला करें। गरीब बेसहारा बच्चों कि शिक्षा हेतु सहायता करने के लिए निम्नलिखित खाते में दान करें।

सुमन संगम आश्रय 

अकाउंट नंबर 44629950112

IFSC code – SBIN0061208

State Bank of India Sector 77 Noida

अधिक जानकारी के लिया संपर्क करे  संपादक – 9560518227


समस्या है तो समाधान भी है , जन्म कुंडली दिखाने व बनवाने के लिए संपर्क करे पंडित जी 9312002527

1 thought on “गौएँ स्वर्ग की सीढ़ी है,गौएँ स्वर्ग में भी पूजी जाती है”

  1. Purushottam taparia

    गौमाता के बारे में जितना भी कहा जाए उतना कम है। गौमाता का सिर्फ नाम स्मरण किसी न किसी बहाने करना भी गौ सेवा है। देवता और दानवों के समुद्र मंथन से गौमाता की कामधेनु नाम से उत्पत्ति हुई थी। गौमाता की सेवा से हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है बस विश्वास होना चाहिए।
    पहले भारत में जब किसी की संपन्नता का मापदण्ड ये था कि उसके पास कितनी गौएं है तब भारत सोने की चिड़िया माना जाता था। विश्व की जीडीपी में कोई समय भारत शीर्ष स्थान पर था। जैसे जैसे गौमाता की महत्ता घटती गई वैसे वैसे भारत का विश्व व्यापार में स्थान घटता गया। अब जबसे गौमाता की प्रतिष्ठा थोड़ी बढ़नी शुरू हुई है वैसे वैसे विश्व राजनीति में भारत का दबदबा बढ़ रहा है। आइए हम सब मिलकर गौमाता को उसका उचित स्थान राष्ट्र माता का दिलवाए और अगली सदी गौमय होगी इसमें कोई नहीं रोक सकता है। जय गौ माता की

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *