भारतीय संस्कृति में नारी अबला नहीं सबला होती है
सतीश शर्मा 
यह कथन पूर्णत सत्य और प्रासंगिक है। भारतीय संस्कृति और दर्शन में नारी को कभी असहाय (अबला) नहीं माना गया है, बल्कि उसे सृष्टि की संचालिका, शक्ति और प्रेरणा का स्त्रोत (सबला) माना गया है। भारतीय नारी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और समाज का मूल आधार है । वह त्याग, साहस, और ममता की प्रतिमूर्ति होने के साथ-साथ आधुनिक युग में शिक्षा, विज्ञान, और रक्षा के क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा रही है। भारतीय संस्कृति में नारी को परिवार को एकजुट रखने वाली रीढ़ माना गया है । वह संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों की संवाहक है । प्राचीन काल से ही सीता और सावित्री, जैसी नारियों के चरित्र त्याग, सहनशीलता और नेतृत्व का आदर्श रहे हैं। प्राचीन काल से लेकर आज तक, भारतीय महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया है। प्राचीन काल में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषी महिलाओं ने शास्त्रार्थ और दर्शन के क्षेत्र में उच्च ज्ञान का प्रदर्शन किया। भारतीय संस्कृति में ज्ञान के लिए ‘सरस्वती’, धन के लिए ‘लक्ष्मी’, और शक्ति के लिए ‘दुर्गा’ की पूजा की जाती है। यह दर्शाता है कि संस्कृति में नारी सर्वोच्च शक्ति का आधार है। भारतीय इतिहास में हमे अनेकों वीरांगनाएं जैसे रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होल्कर और रानी दुर्गावती जैसी महिलाओं ने युद्ध के मैदान से लेकर प्रशासन तक में अपने अदम्य साहस का परिचय दिया।आधुनिक समय में, महिलाएं अंतरिक्ष अनुसंधान (जैसे ISRO), रक्षा सेवाओं, राजनीति, और खेल जैसे सभी क्षेत्रों में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नेतृत्व कर रही हैं।यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जहाँ शिक्षा और जागरूकता महिलाओं को और अधिक स्वतंत्र बना रहे हैं। मनुस्मृति का एक प्रसिद्ध श्लोक है – “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः” अर्थात् जहाँ नारी की पूजा (सम्मान) होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं।
यहा कुछ महान भारतीय महिलाओ के बारे में जानकारी दे रहें हैं ।
मैत्रेयी विदुषी मैत्रेयी के पिता का नाम महर्षि मैत्र था वह वैदिक काल की एक विदुषी एवं ब्रह्मवादिनी स्त्री थीं। वे मित्र ऋषि की कन्या और महर्षि याज्ञवल्क्य की दूसरी पत्नी थीं।
सती सावित्री सती सावित्री हिंदू पौराणिक कथाओं की एक अत्यंत प्रतिष्ठित और आदर्श पतिव्रता नारी थीं। उन्हें अपनी अटूट निष्ठा, बुद्धि और पति प्रेम के बल पर अपने मृत पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस छीन लाने के लिए जाना जाता है।
देवी जानकी देवी जानकी (माता सीता) को हिन्दू धर्म में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की पत्नी और मिथिला के राजा जनक की पुत्री (जनकनंदनी) के रूप में पूजा जाता है। उन्हें त्याग, पवित्रता और आदर्श भारतीय नारी का प्रतीक माना जाता है।
देवी सती देवी सती (जिन्हें दाक्षायणी भी कहा जाता है) को आदि शक्ति का प्रथम मानवीय अवतार और भगवान शिव की पहली पत्नी माना जाता है। वे प्रेम, त्याग और सर्वोच्च शक्ति की प्रतीक हैं।
महारानी द्रौपदी रानी द्रौपदी बाई पवार मध्य भारत के मालवा क्षेत्र में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रमुख और बहादुर नायिका थीं。 उन्होंने अपने नाबालिग बेटे राजा आनंदराव पवार की ओर से धार रियासत का शासन संभाला था और अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का डटकर नेतृत्व किया
सती कण्णगी सती कण्णगी प्राचीन तमिल महाकाव्य ‘सिलप्पदिकारम’ की केंद्रीय पात्र और एक महान भारतीय आदर्श नारी हैं। उन्हें दक्षिण भारत और श्रीलंका में एक आदर्श पत्नी, पवित्रता के प्रतीक और देवी (कण्णगी-अम्मा) के रूप में पूजा जाता है।
देवी गार्गी माता गार्गी (ब्रह्मवादिनी गार्गी वाचक्नवी) वैदिक काल की एक महान और अद्वितीय विदुषी थीं。गर्ग गोत्र और ऋषि वचक्नु के कुल में जन्मी गार्गी ने आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया और वेदों-उपनिषदों के गहन ज्ञान के कारण उन्हें विश्व की सबसे प्राचीन महिला दार्शनिकों में गिना जाता है
साध्वी मीरा मीरा बाई की कहानी – मीराबाई भक्तिकाल की एक ऐसी संत हैं, जिनका सबकुछ कृष्ण के लिए समर्पित था। मीरा का कृष्ण प्रेम ऐसा था कि वह उन्हें अपना पति मान बैठी थीं। भक्ति की ऐसी चरम अवस्था कम ही देखने को मिलती है।
रानी दुर्गावती मध्य भारत के गोंडवाना साम्राज्य की एक महान, साहसी और कुशल वीरांगना थीं। उन्होंने अपने पति की मृत्यु के बाद लगभग 16 वर्षों तक अपने नाबालिग बेटे के संरक्षक के रूप में शासन किया और मुग़ल सम्राट अकबर की विशाल सेना के सामने कभी समर्पण नहीं किया।
श्री माँ शारदा देवी (रामकृष्ण परमहंस की पत्नी) आध्यात्मिक जगत में माँ शारदा देवी (जन्म: 22 दिसंबर 1853 – मृत्यु: 21 जुलाई 1920) एक महान हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन संत और रामकृष्ण परमहंस की आध्यात्मिक पत्नी थीं। उन्हें ‘पवित्र माँ’ के रूप में भी जाना जाता है।
रानी चेन्नम्मा (1778–1829) कर्नाटक की प्रसिद्ध कित्तूर रियासत की रानी थीं। उन्हें ‘कर्नाटक की लक्ष्मीबाई’ भी कहा जाता है। वे भारत की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थीं, जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से भी पहले (1824 ई.) ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व किया था।
रानी रुद्रमा देवी या रुद्राम्बा (1259–1289) दक्कन के पठार पर शासन करने वाले काकतीय वंश की एक महान और प्रख्यात रानी थीं। उनके पिता, राजा गणपति देव को कोई पुत्र नहीं था। इसलिए उन्होंने अपनी पुत्री रुद्रमाम्बा का पालन-पोषण एक राजकुमार की तरह किया। उन्हें युद्ध कला, राजनीति और शासन की पूरी शिक्षा दी गई। अपने पिता की मृत्यु के पश्चात उन्होंने 1263 से 1289 तक सफलतापूर्वक शासन किया। साम्राज्य की रक्षा के लिए उन्हें पुरुष छवि (रुद्रदेव महाराजा) अपनानी पड़ी।
रानी लक्ष्मीबाई ‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी।’ 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाली झांसी की रानी भारतीय इतिहास की सबसे असाधारण महिला शासकों में से एक और वीरता का पर्याय हैं。
भगिनी निवेदिता (१८६७-१९११) एक अंग्रेज-आइरिश सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक, शिक्षक एवं स्वामी विवेकानन्द की शिष्या थीं। उनका मूल नाम ‘मार्गरेट एलिजाबेथ नोबल’ था। भगिनी निवेदिता.
सरोजिनी नायडू ‘भारत कोकिला’ के नाम से प्रसिद्ध, वे स्वतंत्रता सेनानी और भारत की पहली महिला राज्यपाल थीं。
मैडम भीकाजी कामा इन्होंने विदेशों में भारतीय स्वतंत्रता का झंडा फहराया था और एक साहसी क्रांतिकारी थीं。
किट्टूर रानी चेन्नम्मा कर्नाटक की इस रानी ने ‘डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स’ का विरोध करते हुए अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह किया था。
सावित्रीबाई फुले आधुनिक भारतीय नारीवाद की प्रतीक और भारत में बालिकाओं के लिए पहला स्कूल खोलने वाली समाज सुधारिका。
अहिल्याबाई होलकर मालवा की रानी, जिन्होंने अपने उत्कृष्ट शासन, धर्मपरायणता और लोक कल्याणकारी कार्यों से इतिहास में एक आदर्श स्थापित किया。
कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला थीं, जिन्होंने अपनी असाधारण यात्रा से पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन किया。
एम.सी. मेरी कॉम ओलंपिक पदक विजेता और छह बार की विश्व मुक्केबाजी चैंपियन, जिन्होंने युवा पीढ़ी की महिला एथलीटों को प्रेरित किया है。
रुक्मिणी देवी अरुंडेल एक प्रसिद्ध भारतीय नृत्यांगना, कोरियोग्राफर और कला की संरक्षक थीं।
ई. के. जानकी अम्मल ये वनस्पति विज्ञान (Botanical Science) में डॉक्टरेट प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला थीं। इन्होंने पौधों के आनुवंशिकी और साइटोजेनेटिक्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया।
असीमा चटर्जी ये रसायन विज्ञान (Chemistry) में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला थीं। इन्होंने मलेरिया-रोधी दवाइयों और कैंसर के इलाज से जुड़े महत्वपूर्ण शोध किए।
कमला सोहोनी ये वैज्ञानिक विषय में पीएचडी करने वाली पहली भारतीय महिला थीं। इन्होंने जैव-रसायन (Biochemistry) के क्षेत्र में कार्य किया।
आनंदीबाई गोपाल जोशी ये संयुक्त राज्य अमेरिका से चिकित्सा (Medicine) में डिग्री प्राप्त करने वाली भारत की पहली महिला थीं।
टेसी थॉमस इन्हें भारत की ‘मिसाइल वुमन’ कहा जाता है। ये अग्नि- IV मिसाइल परियोजना की प्रोजेक्ट डायरेक्टर थीं।
अनुराधा टी. के ये भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में एक वरिष्ठ वैज्ञानिक और जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) प्रोजेक्ट की डायरेक्टर थीं।
मंगला मणि ये इसरो की ‘पोलर वुमन’ के नाम से जानी जाती हैं। ये अंटार्कटिका में शोध करने वाली पहली इसरो वैज्ञानिक थीं।
न्यायमूर्ति अन्ना चांडी (भारत की पहली महिला न्यायाधीश) न्यायमूर्ति अन्ना चांडी (४ मई १९०५ – २० जुलाई १९९६) भारत की पहली महिला न्यायाधीश थीं। वे १९३७ में एक जिला अदालत में भारत में पहली महिला न्यायाधीश बनीं।






