इस्लामिक नाटो वैश्विक संकट
ललित शंकर रुड़की हरिद्वार 
इस समय पूरे विश्व मे अस्थिरता सी दिख रही है।हर तरफ युद्ध की आहट सुनाई व दिखाई दे रही है।ऐसे समय मे एक बड़ा संकट भविष्य में विश्व मे पनपने की चर्चा हो रही है ।वो है इस्लामिक नाटो।पाकिस्तान अपनी आतंकवादी गतिविधि को बढ़ाने के लिये इसकी पहल कर रहा है।उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन नाटो की तर्ज पर पाकिस्तान इस्लामिक देशों को एक करने की विनाशकारी कोशिश कर रहा है।जिस प्रकार नाटो में अमेरिका,ब्रिटेन फ्रांस,कनाडा सहित यूरोप के बत्तीस देश शामिल है।उसी प्रकार पाकिस्तान भी सऊदी अरब,तुर्की,कतर सहित अन्य मुश्लिम देशों को एक संगठन बनाने के लिए प्रयासरत है।उस संगठन में नियम बनेगा कि किसी भी देश पर हुआ हमला पूरे समूह इस्लामिक नाटो पर हमला माना जायेगा। पाकिस्तान ने पिछले वर्ष सऊदी अरब के साथ एक रणनीति परस्पर रक्षा समझोता करते हुए तय किया था कि दोनों देशों में किसी पर भी हमला ,दोनों देशों पर हमला माना जायेगा।मिलकर समूह बनाकर रहना अच्छी बात है,परन्तु उस समूह का हेतु समाज हित होना चाहिए।पाकिस्तान की फितरत को देखकर ऐसा नही कह सकते कि वो इस्लामिक नाटो समाजहित के लिये बनाने का प्रयास कर रहा है।सोचने की बात है कि अगर ये इस्लामिक समूह बन गया तो विश्व की स्थिति क्या होगी।हर तरफ से अकेला पड़ा पाकिस्तान आज खराब स्थिति के बाबजूद अपनी आतंकवादी गतिविधियों को समाप्त नही कर रहा।अभी तो उसको भारत सहित अन्य देशों का भी भय है।अगर ये इस्लामिक समूह बन गया तो पाकिस्तान निर्भय होकर अपनी आतंकवादी गतिविधि भारत में ही नही पूरे विश्व मे फैला देगा।जगजाहिर है कि इस्लामिक विचारधारा विस्तारवादी विचारधारा है,ऐसे में विश्व मे इस्लामिक समूह बनना विश्वहित में तो नही होगा।क्योंकि इतिहास को देखेंगे तो समझ आएगा।ईरान,इराक,इंडोनेशिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बंग्लादेश सहित अधिकतम इस्लामिक देश पहले गैर इस्लामिक देश थे, लेकिन योजनात्मक रूप से इन देशों में मुस्लिम गए और योजनात्मक रूप से ही अपनी आबादी बढ़ाकर इन देशों को इस्लामिक बना लिया।ईरान जो आज संघर्ष से गुजर रहा है लगभग सौ वर्ष पूर्व पारसियों का देश था।लेकिन चार हजार मुश्लिमों ने जाकर सौ वर्षों में इस्लामिक बनाकर पारसियों को भगा दिया।हर इस्लामिक देश मे गैर इस्लामिक लोगों की क्या स्थिति होती है उसको बताने की आवश्यकता नही।अभी बंग्लादेश इसका साक्षात उदाहरण है।पाकिस्तान की ये इस्लामिक नाटो की सोच केवल ओर केवल भारत के लिये है।क्योंकि अन्य देशों की स्थिति संघर्ष वाली नही है।मजहबी आधार पर पाकिस्तान बनने के बाद से ही पाकिस्तान की इच्छा कश्मीर हड़पने की बनी हुई है।जिसके लिए धरती का स्वर्ग कही जाने वाली कश्मीर घाटी को बारूद की घाटी बना दिया गया।पाकिस्तान भारत को कमजोर करने के लिए अन्य इस्लामिक देशों का सहारा लेना चाह रहा है।जिससे वो अपनी आतंकी गतिविधि भारत मे पूर्व की भांति फैलाकर सके।वर्तमान के भारत ने पाकिस्तान को उसी की भाषा मे जबाव देकर उसके नापाक मंसूबो पर पानी फेर रखा है।सर्जिकल व एयर स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर, जैसी मजबूत सैन्य कार्यवाही से पाकिस्तान पूरी तरह टूट गया है।उधर बलूच के लोग भी पाकिस्तान के खिलाफ लगातार विरोध कर रहे हैं।ऐसी स्थिति में उसको बस अन्य देशों के सहारे के अतिरिक्त कुछ नही सूज रहा।पाकिस्तान जैसे देश का साथ कितना हानिकारक होता है उसका उदाहरण बंग्लादेश है।अत्याधिक गति से विकास करने वाला बंग्लादेश ,तेज गति से खेल में,व्यापार में अपनी अलग पहचान बनाने वाला बंग्लादेश आज पाकिस्तान के कारण कट्टरपंथी छवि में बदल गया है,जिस कारण विश्व क्रिकेट प्रतियोगिता से भी बाहर हो गया।पाकिस्तान सोच के कारण आज भारत सहित विश्व मे बंग्लादेश की स्थिति चिंताजनक हो गई है।पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने एक पत्रकार वार्ता में इस्लामिक नाटो बनाने का खुलासा करते हुए इसे आगे बढ़ाने की बात कही है।भारत सहित विश्व के बड़े देशों को इस समूह को बनने से रोकना चाहिए नही तो ये इस्लामिक समूह भविष्य में समस्त विश्व के लिये एक खतरा बन जायेगा।






