सनातन धर्म के गौरव की पुनर्स्थापना और देश की आत्मा को जगाने वाला युग 

सनातन धर्म के गौरव की पुनर्स्थापना और

देश की आत्मा को जगाने वाला युग 

सतीश शर्मा

आज का समकालीन युग सनातन धर्म के अभूतपूर्व गौरव की पुनर्स्थापना और देश की सोई हुई चेतना को जगाने का युग है। यह कालखंड केवल अतीत के स्मरण तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिकता और आध्यात्मिकता का समन्वय कर मानवीय मूल्यों को पुनर्जीवित करने का एक स्वर्णिम अध्याय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और धार्मिक स्थलों के पुनरुत्थान के लिए कई ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को भारत में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण (सभ्यतागत पुनरुत्थान) का एक महत्वपूर्ण दौर माना जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि इस दौर ने भारतीय समाज में अपनी विरासत, इतिहास और धार्मिक पहचान को लेकर पुराने ‘सांस्कृतिक संकोच’ को खत्म किया है और लोगों में एक नया वैचारिक आत्मविश्वास जगाया है। पिछले कुछ वर्षों में देश में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सनातन परंपराओं को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिली है । सरकार के “विकास भी, विरासत भी” के विजन के तहत सनातन धर्म के गौरव को वैश्विक स्तर पर पुनर्स्थापित करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख कार्य किए गए हैं – 

500 वर्षों के लंबे संघर्ष और कानूनी प्रक्रिया के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण और रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा मोदी सरकार के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है । बाबा विश्वनाथ के मंदिर परिसर का विस्तार और भव्य सुंदरीकरण किया गया, जिससे पतित पावनी गंगा से सीधे मंदिर तक सुगम मार्ग बना। उज्जैन में भगवान शिव की लीलाओं को दर्शाने वाले एक बेहद विशाल और भव्य ‘महाकाल लोक’ कॉरिडोर का निर्माण किया गया। उत्तराखंड बाढ़ की त्रासदी के बाद केदारनाथ धाम का भव्य पुनर्निर्माण कराया गया और बद्रीनाथ धाम के लिए भी मास्टर प्लान के तहत विकास कार्य जारी हैं। सोमनाथ मंदिर परिसर में समुद्र दर्शन पथ और अन्य अत्याधुनिक सुविधाओं का विकास किया गया। इसके ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करने के लिए भारत सरकार द्वारा विशेष आयोजन भी किए गए है।

देश के प्रमुख तीर्थस्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रसाद योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत रामायण सर्किट, कृष्णा सर्किट और आध्यात्मिक सर्किट जैसे विशेष पर्यटन मार्गों का निर्माण किया गया ताकि श्रद्धालु भगवान राम और कृष्ण से जुड़े स्थलों के सुगमता से दर्शन कर सके। प्रयागराज महाकुंभ जैसे सनातन धर्म के सबसे बड़े सांस्कृतिक समागमों को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित रूप से आयोजित कराया गया। संयुक्त अरब अमीरात  की राजधानी अबू धाबी में पहले विशाल और पारंपरिक पत्थर के हिंदू मंदिर  का निर्माण प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से संभव हुआ । बहरीन में 200 साल पुराने भगवान श्री कृष्ण श्रीनाथजी मंदिर के पुनर्विकास और अन्य देशों में मौजूद प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई।

दशकों पहले भारत के प्राचीन मंदिरों से चोरी कर विदेशों में तस्करी की गई सनातन देवी-देवताओं की सैकड़ों बहुमूल्य मूर्तियों को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनयिक संबंधों के माध्यम से वापस भारत मंगवाया। इन सभी कदमों के माध्यम से देश और दुनिया में सनातन परंपराओं, आस्था के केंद्रों और सांस्कृतिक प्रतीकों को एक नया आत्मबल और गौरवशाली पहचान मिली । 

नए संसद भवन में ऐतिहासिक ‘सेंगोल’ (राजदंड) की स्थापना और स्वतंत्रता सेनानियों व देश के सांस्कृतिक नायकों (जैसे आदि शंकराचार्य, भगवान बिरसा मुंडा) को राष्ट्रीय पटल पर उच्च सम्मान देना इसका उदाहरण है। सनातन संस्कृति के प्राचीन विज्ञान ‘योग’ को संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाई गई, जिसे हर वर्ष दुनिया भर के देश मनाते हैं । संयुक्त राष्ट्र  द्वारा 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में मान्यता दिलाना भारतीय ऋषि परंपरा और दर्शन की वैश्विक स्वीकार्यता का बड़ा प्रतीक बना।

विदेशों में भारतीय संस्कृति की गूंज और वैश्विक मंचों पर पीएम मोदी द्वारा भारतीय दर्शन (जैसे ‘वसुधैव कुटुंबकम’) को रेखांकित करना सनातन संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को दर्शाता है।वैकल्पिक और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण जहां एक बड़ा वर्ग इसे सनातन धर्म के गौरव की पुनर्स्थापना और देश की आत्मा को जगाने वाले युग के रूप में देखता है, वहीं कुछ आलोचकों और राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि विकास के मुख्य एजेंडे में बुनियादी ढांचा, शिक्षा, रोजगार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए, ताकि देश आधुनिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर संतुलित रूप से आगे बढ़ सके।

भारत की पहचान और उसकी सभ्यता को वैश्विक स्तर पर एक नई स्वीकृति मिल रही है। ऐतिहासिक स्थानों का कायाकल्प तथा प्राचीन विरासत को सहेजने के प्रयास इस युग की मुख्य पहचान हैं। आज का समाज तेजी से विज्ञान और अध्यात्म के संगम को समझ रहा है। योग, आयुर्वेद और वेदों की सार्वभौमिक शिक्षाएं जन-जन तक पहुंच रही हैं। 

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