वैश्विक स्तर पर शांति, स्वास्थ्य व सद्भाव  को बढ़ावा देता है योग

वैश्विक स्तर पर शांति, स्वास्थ्य व सद्भाव 

को बढ़ावा देता है योग  

सतीश शर्मा

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य उद्देश्य योग के अभ्यास से होने वाले शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों के बारे में दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाना है । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का लक्ष्य लोगों को तनावमुक्त जीवनशैली जीने, बीमारियों से बचाव करने और सभी के बीच वैश्विक स्तर पर शांति, स्वास्थ्य व सद्भाव को बढ़ावा देना है। 

योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (जैसे- मधुमेह, ब्लड प्रेशर और मोटापा) को दूर करना और लोगों को सक्रिय रखना है। ध्यान और प्राणायाम के माध्यम से मानसिक शांति हासिल करना, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाना और अवसाद या एंग्जायटी को कम करना है। भारत की प्राचीन योग परंपरा से पूरी दुनिया को परिचित कराना और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ वैश्विक स्तर पर लोगों को एकजुट करना है । प्रकृति और मनुष्य के बीच संतुलन बनाने में मदद करना, जिससे व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर भाईचारा और शांति बनी रहे । इस दिवस के पीछे यह विचार भी है कि योग किसी धर्म या संप्रदाय से परे, बल्कि एक संपूर्ण जीवन जीने की कला है जो सभी की भलाई में सहायक है।  

योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि यह शरीर, श्वास और मन को जोड़ने वाली एक प्राचीन साधना है। यह आसन, प्राणायाम, और ध्यान के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य को सुधारने और मानसिक शांति प्राप्त करने का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम है।योग के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ योग का नियमित अभ्यास आपके संपूर्ण स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है ।  योगासन मांसपेशियों को खींचते हैं, जिससे शरीर का लचीलापन और शारीरिक ताकत बढ़ती है। नियमित अभ्यास से रक्तचाप और हृदय गति नियंत्रित रहती है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम होता है।  प्राणायाम और ध्यान कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) को कम करते हैं, जिससे चिंता और अवसाद के लक्षणों में कमी आती है।वजन प्रबंधन: योग सजगता को बढ़ावा देता है, जिससे खान-पान की आदतें बेहतर होती हैं और वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है।  गहरी श्वास और मानसिक शांति की तकनीकें अनिद्रा की समस्या को दूर कर अच्छी नींद लाने में सहायक हैं।

आप कभी भी और किसी भी उम्र में योग का अभ्यास शुरू कर सकते हैं।चोट से बचने के लिए हमेशा किसी योग्य और प्रमाणित प्रशिक्षक की देखरेख में शुरुआत करें। आप भ्रामरी प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, या ताड़ासन जैसे सरल अभ्यासों से शुरुआत कर सकते हैं। योग के स्वास्थ्य लाभों पर विभिन्न शोध और वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध हैं।

योग शब्द संस्कृत के ‘युज्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है ‘जोड़ना’ या ‘विलय’। आध्यात्मिक अर्थ में, यह व्यक्तिगत चेतना का सार्वभौमिक चेतना से मिलन है, यह शरीर, मन और श्वास के बीच संतुलन बनाने की एक प्राचीन भारतीय कला और विज्ञान है। विभिन्न प्राचीन ग्रंथों और ऋषियों ने योग को अलग-अलग दृष्टिकोणों से परिभाषित किया है।  

महर्षि पतंजलि के योगसूत्र के अनुसार, मन मे उत्पन्न  विचारों के उतार-चढ़ाव को शांत करना ही योग है । इसे प्राप्त करने के लिए उन्होंने योग के अष्टांग योग (8 अंग)  बताए हैं ये इस प्रकार है यम और नियम – नैतिक और सामाजिक अनुशासन。आसन – शारीरिक मुद्राएं,प्राणायाम – श्वास नियंत्रण,प्रत्याहार –  इंद्रियों को वश में करना,धारणा, ध्यान और समाधि – मन की एकाग्रता और सर्वोच्च अवस्था।  

गीता में योग को जीवन में कुशलता और समत्व प्राप्त करने का साधन बताया गया है । इसके अलावा, योग को दुखों और बंधनों से मुक्ति का मार्ग भी माना गया है । योग का उद्देश्य और अभ्यास हर व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। 

ज्ञान योग – बुद्धि और ज्ञान के माध्यम से सत्य को जानना। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र और कुछ भी नहीं है। यह ज्ञान रूपी अग्नि सभी पापों और कर्म-बंधनों को भस्म कर देती है।  ज्ञान योगी शरीर, मन और अहंकार को नश्वर मानते हैं और शाश्वत आत्मा को सत्य मानते हैं। गीता में ‘ज्ञान’ का अर्थ आध्यात्मिक अनुभव है, जबकि ‘विज्ञान’ का अर्थ शास्त्रों और संसार का बौद्धिक ज्ञान है।

भक्ति योग – ईश्वर (परमात्मा) के प्रति अनन्य प्रेम, पूर्ण समर्पण और निष्काम भक्ति का मार्ग है। इसमें साधक अपने सभी कर्म, अहंकार और इच्छाओं को ईश्वर को अर्पित कर देता है और निरंतर उन्हीं के स्मरण में लीन रहता है 

कर्म योग – कर्मों को फल की चिंता किए बिना करना। सफलता-असफलता या लाभ-हानि में समान रहना कर्मयोग की पहली शर्त है। अपनी प्रकृति और धर्म के अनुसार जो भी कार्य आपके हिस्से में आया है, उसे पूरी लगन और जिम्मेदारी से करना। अपने सभी कार्यों और उनके परिणामों को परमेश्वर को समर्पित कर देना। इससे मनुष्य कर्म के बंधनों से मुक्त हो जाता है। गीता के अनुसार, कुशलता पूर्वक और अनासक्त होकर कर्म करना ही ‘योग’ है। 

राज योग – ध्यान और मानसिक नियंत्रण (पतंजलि का अष्टांग योग) का अभ्यास।

हठ योग – शरीर और श्वास को शुद्ध करने के लिए आसनों और प्राणायामों का अभ्यास। 

“करे योग रहे निरोग”

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