अति करते स्टालिन
ललित शंकर हरिद्वार 
ऐसा कहते है कि अधिक सहनशीलता कायरता की निशानी होती है।ऐसा ही अब सनातन के साथ होने लगा है।सनातन को मानने वाले लोगों में अधिक सहनशीलता के कारण लगातर सनातन पर अनाप सनाप टिप्पड़ी की जा रही है।इस क्रम में तमिलनाडु के द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन अग्रणी भूमिका में है।वो लगातर सनातन पर गलत टिप्पड़ी कर रहे हैं।अभी विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद उदयनिधि स्टालिन ने सनातन को लेकर अमर्यादित टिप्पड़ी करते हुए कहा कि लोगों को बांटने वाले सनातन धर्म को समाप्त कर देना चाहिए।स्टालिन ने पूर्व में भी सनातन को लेकर ऐसी टिप्पड़ी करते हुए कहा था कि सनातन डेंगू और मलेरिया की तरह एक बीमारी है।जिस प्रकार इन बीमारियों को समाप्त किया जाता था वेसे ही सनातन को भी समाप्त कर देना चाहिए।स्टालिन जैसे नासमझ लोग लगातर खुलकर सार्वजनिक रूप से सनातन के लिए ऐसा इसलिए बोल देते है क्योंकि सनातन को मानने वाले लोग कंही न कंही अधिक सहनशील होकर कायर वाली भूमिका में आ गए हैं।केवल स्टालिन ही नही भारत का पूरा विपक्ष जब मर्जी और जो मर्जी सनातन के लिये बोल देते हैं।कभी कोई भगवा को आतंकवादी बताता है,कभी कोई हिंदुत्व को कट्टर बताता है,कभी कोई देवी देवताओं पर अमर्यादित बोलता है,कभी कोई रामचरितमानस पर उंगली उठाता है,तो कभी राम को ही काल्पनिक बताता है,कभी रामसेतु को तोड़ने का प्रयास किया जाता है। लेकिन समाज से उनके विरोध की कोई आवाज नही आती ।जबकि कहते है धर्मो रक्षति रक्षितः ,जो धर्म की रक्षा करता है तो धर्म भी उसकी रक्षा करता है।स्टालिन जैसे लोगो को शायद सनातन की सही से जानकारी नही।सनातन को बाटने वाला धर्म कहने वाले स्टालिन को शायद स्मरण नही है कि सारे विश्व को एक परिवार मानने वाला कोई धर्म है तो वो केवल ओर केवल सनातन ही है।दुनिया मे केवल सनातन ही कहता है कि वासुदेव कुटुम्बकम।बाकी सारे पंथ व मजहब स्वयं को ही श्रेष्ठ बताकर तथा अपने विस्तार के लिये झूठी सेवा तथा आतंक का सहारा लेते हैं।सनातन कितना शांतिप्रिय धर्म है वो इसी बात समझा जा सकता है कि लगातर सनातन पर अमर्यादित टिप्पड़ी करने के बाबजूद भी कभी स्टालिन व अन्य लोगों के लिए हिन्दू समाज से एक आवाज तक नही आई,जबकि सत्य बोलने पर भी मजहबी कट्टरता के लोग मजहबी नारे लगाकर सर तन से जुदा करने की बात कहते हुए करते भी हैं।मजहबी आतंकवादियों द्वारा धर्म पूछकर गोली मारी जाती है,घर मे जाकर लोगो को बोलने पर मार दिया जाता है।स्टालिन में हिम्मत है तो अन्य मजहबों के बारे में सत्य ही बोलकर दिखाए।सनातन के मानने वालों को भी अब अधिक सहनशीलता छोड़कर जबाव देना ही होगा ,नही तो धीरे धीरे समाप्त कर दिए जाएंगे।जैसे पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बंग्लादेश में अधिक सहनशीलता के कारण हिन्दू सघर्ष करना ही भूल गया और फिर लगभग समाप्त हो गया।भारत मे भी कई जगह ऐसी स्थिति बनती जा रही है।सनातनी अगर जागेंगे नही तो निश्चित फिर भांगेगे ही।इसी अधिक सहनशीलता के कारण भारत मे अयोध्या में रामजन्मभूमि मन्दिर ,मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि मन्दिर, काशी में विश्वनाथ मन्दिर,सम्भल में भगवान कल्कि मन्दिर को तोड़ा गया।पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के बाद वर्षों से बन्द आसनसोल के बस्तिन में स्थिति श्री दुर्गा मंदिर को खोला गया।इन सबके अतिरिक्त अनगिनत मंदिरों को न केवल तोड़ा गया बल्कि उनके स्थान पर मजहबी इमारतें बनाई गई , इसका बस एक कारण था अधिक सहनशीलता।अब समय अधिक सहनशील करने का नही बल्कि जिसको जो भाषा समझ आये उसको उसी भाषा मे जबाव देने का है।स्टालिन जैसे लोगों को अगर उनकी भाषा मे सबक नही सिखाया गया तो ये बढ़ता ही जायेगा।प्राचीन सनातन परंपरा ने कभी किसी को छेड़ा नही लेकिन जिसने उसको छेड़ने का प्रयास किया उसे छोड़ा नही।






