सितंबर मास 2026 का पंचांग
सतीश शर्मा 
भारतीय व्रतोत्सव सितंबर -2026
दि. 2-हल छठ, चंद्र छठ,दि. 4-श्री कृष्णजन्माष्टमी, कालाष्टमी,दि. 5-गोगा नवमी, नन्द महोत्सव,दि. 7-अजा एकादशी व्रत,दि. 8-वत्स द्वादशी, भौम प्रदोष व्रत,दि. 9-मास शिवरात्रि,दि. 11-कुशोत्पाटिनी-पिठोरी अमावस्या,दि. 13-वाराह जयंती,दि. 14-हरितालिका तीज, श्री गणेश जन्मोत्सव, सिद्धि विनायक व्रत, कलंक चतुर्थी, चंद्रदर्शन निषेध,दि. 17-सूर्य षष्ठी, बलदेव षष्ठी, मेला बृज मण्डल, संक्रांति पुण्य, श्री विश्वकर्मा पूजा,दि. 18-ज्येष्ठा गौरी आवाहन, मुक्ताभरण सप्तमी, अपराजिता पूजा, महालक्ष्मी व्रत प्रारम्भ,दि. 19- दुर्गाष्टमी, राधाष्टमी दि. 20- भागवत सप्ताह प्रा.,दि. 21- रामदेव जी का मेला (नवलदुर्ग),दि. 22- पद्मा एकादशी व्रत, जलझूलनी मेला, श्रीचारभुजा नाथ गणगौर,दि. 23- वामन जयंती,दि. 24- प्रदोष व्रत,दि. 26- सत्य व्रत, प्रौष्ठपदी पूर्णिमा श्राद्ध, भागवत सप्ताह समाप्त,दि. 26- महालय प्रारम्भ,दि. 29- गणेश चतुर्थी व्रत
मूल विचार सितंबर -2026
मासारंभ से दि. 2 को 2/42 तक, दि. 8 को 16/39 से, दि. 10 को 14/04 तक, दि. 17 को 19/53 से दि. 20 को 1/42 तक, दि. 27 को 11/07 से दि. 29 को 9/03 बजे तक गण्ड मूल नक्षत्र हैं।
ग्रह स्थिति सितम्बर – 2026
दि. 2 तुला में शुक्र,दि. 7 कन्या में बुध,दि. 12 बुध पश्चिमोदय,दि. 17 कन्या में सूर्य,दि. 18 कर्क में मंगल,दि. 26 तुला में बुध
पंचक विचार सितम्बर – 2026
पंचक विचार -(धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से रेवती नक्षत्र तक) पंचको में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना मकान दुकान आदि की छत डालना चारपाई पलंग आदि बुनना,दाह संस्कार,बांस की चटाई दीवार प्रारंभ करना आदि स्तंभ रोपण तांबा पीतल तृण काष्ट आदि का संचय करना आदि कार्यों का निषेध माना जाता है समुचित उपाय एवं पंचक शांति करवा कर ही उक्त कार्यों का संपादन करना कल्याणकारी होगा ध्यान रहेगा पंचर नक्षत्रों का विचार मात्र उपरोक्त विशेष कृतियों के लिए ही किया जाता है विवाह मंडल आरंभ गृह प्रवेश प्रवेश उपनयन आदि मुद्दों से तो पंचक नक्षत्रका प्रयोग शुभ माना जाता है पंचक विचार- दि. 1 सित. को 3/23 बजे तक दि 23 को 21-26 से दि 28 को 10-16 पंचक है |
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227
भद्रा विचार सितम्बर -2026
भद्रा काल का शुभ अशुभ विचार – भद्रा काल में विवाह मुंडन, गृह प्रवेश, रक्षाबंधन आदि मांगलिक कृत्य का निषेध माना जाता है परंतु भद्रा काल में शत्रु का उच्चाटन करना,स्त्री प्रसंग में,यज्ञ करना,स्नान करना,अस्त्र शस्त्र का प्रयोग,ऑपरेशन कराना, मुकदमा करना,अग्नि लगाना,किसी वस्तु को काटना,भैस,घोड़ा व ऊंट संबंधी कार्य प्रशस्त माने जाते हैं सामान्य परिस्थिति में विवाह आदि शुभ मुहूर्त में भद्रा का त्याग करना चाहिए परंतु आवश्यक परिस्थितिवश अति आवश्यक कार्य भूलोक की भद्रा ,भद्रा मुख छोड़कर कर भद्रा पुच्छ में शुभ कार्य कर सकते है |
दि. 3 को 4/26 से 15/27 तक, दि. 6 को 8/41 से 19/29 तक, दि. 9 को 12/31 से 23/32 तक, दि. 14 को 19/25 से दि. 15 को 7/44 तक, दि. 18 को 13/01 से दि. 19 को 2/14 तक, दि. 22 को 8/51 से 21/43 तक, दि. 25 को 23/06 से दि. 26 को 10/43 तक, दि. 29 को 6/12 से 17/10 बजे तक भद्रा है।
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सर्वार्थ सिद्धि योग सितम्बर-2026
दैनिक जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शीघ्र ही किसी शुभ मुहूर्त का अभाव हो,किंतु शुभ मुहर्त के लिए अधिक दिनों तक रुका ना जा सकता हो तो इन सुयोग्य वाले मुहर्तु को सफलता से ग्रहण किया जा सकता है | इन से प्राप्त होने वाले अभीष्ट फल के विषय में संशय नहीं करना चाहिए यह योग हैं सर्वार्थ सिद्धि,अमृत सिद्धि योग एवं रवियोग | योग्यता नाम तथा गुण अनुसार सर्वांगीण सिद्ध कारक है|
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227
| दिनांक | प्रारंभ | दिनांक | समाप्त |
| 01 | 06-03 | 02 | 02-42 |
| 03 | 01-42 | 03 | 06-04 |
| 07 | 18-13 | 08 | 06-06 |
| 08 | 16-39 | 09 | 06-07 |
| 11 | 06-08 | 11 | 13-16 |
| 13 | 06-09 | 13 | 13-06 |
| 16 | 17-22 | 17 | 19-53 |
| 21 | 04-34 | 21 | 06-13 |
| 27 | 06-16 | 27 | 11-07 |
| 29 | 06-17 | 29 | 09-03 |
| 30 | 07-36 | 01 | 06-18 |
चौघड़िया मुहूर्त
चौघड़िया मुहूर्त, ज्योतिष में शुभ और अशुभ समय जानने की एक प्रणाली है। यह 24 घंटों को 8 भागों में विभाजित करता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया एक निश्चित अवधि का होता है, और इन्हें शुभ और अशुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
चौघड़िया मुहूर्त क्या है – 24 घंटों को 16 भागों में बांटा जाता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया लगभग 1.30 घंटे का होता है।
शुभ-अशुभ – कुछ चौघड़िया शुभ माने जाते हैं, जैसे अमृत, शुभ, लाभ, और चर। कुछ अशुभ माने जाते हैं, जैसे रोग, उद्वेग, और काल। चौघड़िया का उपयोग शुभ कार्यों, जैसे विवाह, यात्रा, और व्यापार शुरू करने के लिए शुभ समय जानने के लिए किया जाता है।
चौघड़िया के प्रकार – दिन का चौघड़िया,सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को दिन का चौघड़िया कहा जाता है।
रात का चौघड़िया,सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक के समय को रात का चौघड़िया कहा जाता है।
चौघड़िया का महत्व – चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने के लिए एक अच्छे समय का चयन करने के लिए किया जाता है। यह माना जाता है कि यदि कोई कार्य शुभ चौघड़िया में शुरू किया जाता है, तो उसके सफल होने की संभावना अधिक होती है।
सुर्य उदय- सुर्य अस्त सितम्बर-2026
| दिनांक | 01 | 05 | 10 | 15 | 20 | 25 | 30 |
| उदय | 06-01 | 06-05 | 06-07 | 06-11 | 06-12 | 06-14 | 06-17 |
| अस्त | 18-40 | 18-36 | 18-30 | 18-24 | 18-18 | 18-12 | 18-06 |
राहू काल
राहुकाल -राहुकाल दक्षिण भारत की देन है,दक्षिण भारत में राहु काल में कृत्य करना अच्छा नहीं माना जाता, राहु काल में शुभ कृतियों में वर्जित करने की परंपरा अब हमारे उत्तरी भारत में भी अपनाने लगे हैं राहुकाल प्रतिदिन सूर्यादि वारों में भिन्न-भिन्न समय पर केवल डेढ़ डेढ़ घंटे के लिए घटित होता है |
संक्रांति विचार सितम्बर – 2026
इस मास की संक्रान्ति कन्या भाद्रपद शुक्ल षष्ठी गुरुवार दि. 17 सितम्बर पूर्वाह्न 7/51 बजे 30 मु. बैठी आग्नेय दृष्टि पूर्व गमन कर माहेन्द्र मण्डल में प्रवेश करेगी। गतवार नक्षत्र 4, वार नक्षत्र नाम नन्दा-विप्र सुखी हों। गुरुवारी संक्रान्ति होने से सभी रस पदार्थ तेज होकर मन्दे। तिल, तेल, मूंगफली, अलसी, सरसों, बिनौला के भावों में घट-बढ़ से तेज होंगे।
आकाश लक्षण सितम्बर – 2026
ग्रहचाल नाड़ी परिवर्तन, बुधोदय से पहाड़ी स्थानों पर वर्षा होना सम्भव है। मौसम में शनैः शनैः परिवर्तन प्रारम्भ होगा। तापमान में कुछ गिरावट आयेगी, परन्तु गर्मी का प्रकोप बना रहेगा। रात में गर्मी में कुछ कमी आयेगी। कहीं-कहीं वायुवेग के साथ खण्ड वर्षा सम्भव है।
मांगलिक दोष विचार परिहार
वर अथवा कन्या दोनों में से किसी की भी कुंडली में 1,4,7,8 व 12 भाव में मंगल होने से ये मांगलिक माने जाते हैं,मंगली से मंगली के विवाह में दोष न होते हुए भी जन्म पत्रिका के अनुसार गुणों को मिलाना ही चाहिए यदि मंगल के साथ शनि अथवा राहु केतु भी हो तो प्रबल मंगली डबल मंगली योग होता है | इसी प्रकार गुरु अथवा चंद्रमा केंद्र हो तो दोष का परिहार भी हो जाता है |इसके अतिरिक्त मेष वृश्चिक मकर का मंगल होने से भी दोष नष्ट हो जाता है | इसी प्रकार यदि वर या कन्या किसी भी कुंडली में 1,4,7,9,12 स्थानों में शनि हो केंद्र त्रिकोण भावो में शुभ ग्रह, 3,6,11 भावो में पाप ग्रह हों तो भी मंगलीक दोष का आंशिक परिहार होता है, सप्तम ग्रह में यदि सप्तमेश हो तो भी दोष निवृत्त होता है |
स्वयं सिद्ध मुहूर्त
स्वयं सिद्ध मुहूर्त चैत्र शुक्ल प्रतिपदा वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय तृतीया आश्विन शुक्ल दशमी विजयदशमी दीपावली के प्रदोष काल का आधा भाग भारत में से इसके अतिरिक्त लोकाचार और देश आचार्य के अनुसार निम्नलिखित कृतियों को भी स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है बडावली नामी देव प्रबोधिनी एकादशी बसंत पंचमी फुलेरा दूज इन में से किसी भी कार्य को करने के लिए पंचांग शुद्धि देखने की आवश्यकता नहीं है परंतु विवाह आदि में तो पंचांग में दिए गए मुहूर्त व कार्य करना श्रेष्ठ रहता है।
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अज्ञान को दूर भगाएं ज्ञान का उजाला करें। गरीब बेसहारा बच्चों कि शिक्षा हेतु सहायता करने के लिए निम्नलिखित खाते में दान करें।
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