नारी तो ऐसी न थी
ललित शंकर हरिद्वार 
भारत मे अनादि काल से नारी की पूजा होती आई है।किसी भी शुभ कार्य मे नारी की पूजा की जाती है।सनातन में नारी के बिना हर पूजा अधूरी मानी गई है।मंदिरों में भगवान के साथ देवी का रहना अनिवार्य होता है।भगवान के नाम लेते समय भी उनकी पत्नी का नाम पहले लिया जाता है।गौरीशंकर, सीताराम राधेश्याम।नारी प्रधान देश मे वर्तमान समय मे नारी का स्वरूप बदला है।भारत में पतिपरमेश्वर वाली परम्परा कंही न कंही घुमिल होती दिख रही है।शादी के फेरों के समय सात जन्मों तक साथ निभाने का वचन लेने वाली भारतीय नारी को आज क्या हो गया है।अभी मेरठ के हस्तिनापुर में एक नारी ने पति पत्नी के रिश्ते को कलंकित करते हुए पति की बड़ी बेहरमी से जान ले ली।दामिनी नाम की एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर आयुष पंवार नामक अपने पति को पहले नींद की गोली देकर सुलाया,फिर उसके बिस्तर में जहरीले सांप को छोड़ दिया जिसके काटने से आयुष की दर्दनाक मौत हो गई।ये कोई पहली घटना नही है ,पिछले कुछ समय से लगातार ऐसी घटनाये बढ़ रही हैं।पिछले महीने मेरठ के ही बहसूमा में गुरप्रीत नामक एक महिला ने अपने प्रेमी से मिलकर अपने सात वर्ष के बेटे अंगदवीर को बेहरमी से मरवा दिया।अंगदवीर का दोष बस इतना था उसने गुरप्रीत को अपने प्रेमी के साथ देख लिया था।पिछले वर्ष मेरठ का बहुचर्चित कांड सौरभ राजपूत को कौन भूल सकता है।पूर्व मर्चेंट नेवी अधिकारी,बाद में लंदन में कार्यरत सौरभ राजपूत को उसकी पत्नी मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर नशा देकर चाकुओं से गोदकर मार दिया।उसकी बॉडी को नीले ड्रम में सीमेंट के साथ जमा दिया।महाराष्ट्र का ही केतन अग्रवाल मर्डर में उनकी मंगेतर सिया गोयल ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर केतन को गहरी खाई में गिराकर मार दिया।गुजरात के मेहसाणा में विनोद पटेल नामक व्यक्ति को उसकी पत्नी शृद्धा ने अपने भांजे को पचास हजार रुपये देकर एक्सीडेंट करके गाड़ी से कुचलकर मरवा दिया,रविता नाम की एक महिला ने भी अपने पति को सांप से कटवाकर मार दिया।इन सब के अलावा और भी अन्य बहुत ऐसी घटनाएं घटित हुई है।सोचनीय व चिंतनीय बात है कि सावित्री ,अनुसूया, सीता,सुलोचना जैसी पतिव्रता नारियों के देश मे ऐसी घटनाओं का बढ़ना नारी के के प्रति सम्मान कम कर रहा है।प्राचीन समय मे नारी पति की मौत होने पर उनके साथ सती हो जाती थी।कोई दूसरा हमे छू न पाए ऐसा संकल्प रखकर पदमावती सैकड़ो महिलाओ के साथ जौहर कर देती हैं।आखिर क्या कारण है कि ऐसी घटनाएं लगातर बढ़ रही है।इन सभी घटनाओं में एक बात कोमन दिखाई दे रही है,वो है पति पत्नी के बीच प्रेमी का आना।इन सभी महिलाओ ने प्रेमी के साथ मिलकर पतियों को इसलिए मारा जिससे उनके साथ रह सके।आर्थिक रूप से सम्पन्न पतियों को निचले स्तर के प्रेमियों साथ मिलकर मारना इन महिलाओ की सोच को भी दर्शाता है।इनमें कई महिलाओं ने प्रेम विवाह किया था।इनके साथ सहयोग करने वाले पुरुषों को भी समझना चाहिए कि जो महिला क्षणिक सुख के लिये अपने पति को मरवा सकती है,उसके जीवन मे आप क्या हो।यमराज से अपने पति के प्राण छीनकर लाने वाली परम्परा में ऐसी घटनाएं कलंक से कम नही है।इन सबके पीछे मुख्य कारण है परिवारों में संस्कारो में गिरावट आना।पहले महिला परिवार के सम्मान के साथ कभी समझौता नही करती थी।पति को ईश्वर मानकर सम्मान करती थी।परिवारों में संस्कारों की शून्यता ने ऐसी घटनाएं समाज मे बड़ा दी हैं। समय रहते हमें अपने पुराने संस्कारों को परिवार में लाना ही होगा।वर्तमान समय मे परिवार निरंकुश होते जा रहे हैं।संस्कारो के लिए तथा जीवन के गिरते स्तर की रोकथाम के लिए अंकुश परम आवश्यक है।वो अंकुश संस्कारो का हो सकता है,वो अंकुश स्नेह का हो सकता है,वो अंकुश विस्वास का हो सकता है।हमारी सबसे बड़ी ताकत ही परिवार व्यवस्था थी,जो अब संस्कारविहीन होने कारण ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।






