यह कैसा प्रोटेस्ट है ?
डॉ निर्मला शर्मा 
यह प्रोटेस्ट है या फिर किसी आतंकवादी संगठन की प्रधानमंत्री मोदी जी को चुनौती है ? जंतर मंतर पर जो कुछ भी इन दिनों चल रहा है, उसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह के पोस्ट, वीडियो सोशल मीडिया पर भरपूर संख्या में उपलब्ध है। पुलिस बच्चों को मार रही ,बच्चे पुलिस को मार रहे हैं। जो सीधे सरल है वे बच्चे रो रहे हैं और जो चालक प्रवृत्ति के हैं वे उपद्रवी हो रहे हैं। सब कुछ देखने को मिल रहा है।अब पहली बात जो बच्चे नीट की तैयारी करते हैं, वे अपने काम के प्रति बहुत डेडिकेट होते हैं। उनके पास फालतू कामों का समय नहीं होता। ये स्वभाव से थोड़े गंभीर भी होते हैं क्योंकि उनकी पढ़ाई सिटिंग मांगती है और जो अधिक देर तक अपने आप को एक जगह टीका कर रख सकते हैं वे बच्चे धीरे-धीरे गंभीर होने लगते हैं। दूसरी बात जो बच्चे डॉक्टर बनने के सपने देखते हैं उनको यह पता होता है कि पैसों की बहुत ज्यादा जरूरत होगी। वे पैसों की अहमियत समझते हैं।
तीसरी बात हम यह भी देखते हैं कि बहुत सारे बच्चों के माता-पिता ऋण लेकर , कोई जमीन बेचकर इस तरह की परीक्षाओं की तैयारी करवाते है। एमबीबीएस का सपना देखने वाला हर बच्चा अमीर नहीं होता। कुछ गरीब भी होते हैं और जो गरीब होते हैं, उनको यह पता होता है कि पैसा कितनी मुश्किल से कमाया जाता है। वे अपने घर में अपने माता- पिता को पैसों की व्यवस्था करते हुए, जोड़-तोड़ करते हुए देखते हैं। बातें और भी है पर यहाँ इतने से ही काम चला लेते हैं क्योंकि लेख बड़ा हो जाएगा। ऐसे बच्चों को यदि पूछा जाए या यह कहा जाए कि तुम्हारे घर में एक कार है या मान लो कोई भी वस्तु है, तुम उसमें आग लगा दो तो उस वस्तु को आग लगने से पहले वह बच्चा हजार बार सोचेगा, उसके हाथ कांपेंगे क्योंकि उसको पता है कि उसके घर में यह वस्तु कितनी मुश्किल से आई है।
प्रोटेस्ट में हमनें देखा कि यह प्रोटेस्ट नहीं, उपद्रवियों की भीड़ है, असामाजिक तत्वों का झुंड है, जो सरकारी संपत्ति का नुकसान कर रहे हैं । पुलिस की गाड़ियों को तोड़फोड़ कर उन्हें आग लगा रहे हैं । हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन पर पत्थर फेंक रहे हैं । पत्थरों से पुलिस के सिर फोड़ रहे हैं। कुछ एक साथ पुलिस कर्मियों पर हमले कर रहे हैं। इन्हें वस्तुओं की, उनकी कीमत की कोई फिक्र नहीं है और न ही इनमें ऐसी संवेदनाएँ दिखाई दे रही हैं कि ये डॉक्टर बनने की योग्य हैं । यह सब कुछ देखकर क्या आपको लगता है कि यह वास्तव में कोई प्रोटेस्ट कर रहे हैं ? वहाँ ऐसे बच्चे भी हैं जो प्रोटेस्ट के लिए आए हैं वे एक तरफ बैठकर रो रहे हैं, तड़प रहे हैं, भूखे -प्यासे हैं, उनसे पूछने वाला कोई नहीं।
जब व्यक्ति के मन में यह विचार आ जाए कि मेरी घर की चीज मेरी है और घर से बाहर निकलते ही बाकी सब चीज पराई हैं ।गली मोहल्ले की कॉलोनी की चीजें पराई हैं देश की चीजें, वस्तुएं पराई हैं और उनको इस तरह से तोड़फोड़ करने पर उतारू हो जाए तो फिर यह कैसा प्रोटेस्ट है ? कुछ वीडियो ऐसे भी देखे हैं जिनमें लड़कियाँ ब्रा और छोटी-छोटी सी स्कर्ट पहन कर नाच रही हैं, लड़के उनको नचा रहे हैं। सोच रही हूँ यह कैसा प्रोटेस्ट है? क्या प्रोटेक्ट करने वाली लड़कियाँ पेपर लीक का दर्द भूलाकर इस तरह से लड़कों के साथ ठुमके लगा सकती हैं ? प्रोटेस्ट शांतिपूर्ण तरीके से होता है। सालीके से होता है। वहाँ गंभीर मुद्दे होते हैं लेकिन इस प्रोटेस्ट में ऐसा कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा तो फिर यह कैसा प्रोटेस्ट है?
जो देश की संपत्ति को अपनी संपत्ति नहीं समझता, उसकी सुरक्षा नहीं करता, वह मेरी नजर में बहुत बड़ा देशद्रोही है। कुछ लोगों को देश की बर्बादी नहीं दिखाई दे रही, वे आज भी यही राग अलाप रहे हैं कि बच्चों के साथ बुरा हुआ। बच्चे क्या कर रहे हैं, उनको यह दिखाई नहीं दे रहा । ये वे बच्चे नहीं है जो प्रोटेक्ट करना चाहते हैं । ये उपद्रवी है जो केवल और केवल अराजकता फैलाना चाहते हैं, हिंसा फैलाना चाहते हैं। ऐसे लोगों का समर्थन करने वाले देशद्रोही, गद्दार और मक्कार है। बहुत लोग बोलने आएँगे। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता जितना बोलना है बोल दीजिए लेकिन जो देश का नहीं हो सकता, किसी का नहीं हो सकता और यह प्रोटेस्ट, प्रोटेस्ट नहीं सिर्फ और सिर्फ देश के खिलाफ षड्यंत्र है।






