सुनियोजित आंदोलन
ललित शंकर हरिद्वार 
किसी भी देश मे अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार होता है।लेकिन आंदोलन के नाम पर भोलेभाले लोगों को मोहरा बनाकर देश को जलाने का प्रयास करना देशद्रोह से कम नही है।भारत मे भी एक ऐसी शक्ति पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय है जिसका उद्देश्य भारत में अराजकता फैलाकर सत्ता अपने कंट्रोल वाली लाना है।अभी एक परीक्षा में घपलेबाजी का नाम देकर भोलेभाले विद्यार्थियों को भड़का कर एक आंदोलन शुरू किया गया।सुनियोजित तरीके से पहले पूरे देश मे छोटे छोटे सम्मेलन किये गए।दिल्ली,देहरादून, नैनीताल, मेरठ ,अलीगढ़ मुंबई ,सहित अधिकतर प्रमुख शहरों में ऐसे आंदोलित सम्मेलन करके युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया।फिर बड़ी योजना के तहत सोनल वांगचुक को अनशन पर बिठाया गया,।वांगचुक को एक सोशल वर्कर बताकर देशभर में चर्चित किया गया जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है।फिर शुरू हुआ पुराना वाला खेल।वांगचुक के मंच पर जाने वालों की होड़।विद्यार्थियों के हित के लिये अनशन करने वाले वांगचुक के मंच पर स्वरा भाष्कर, फ़िल्म अभिनेता प्रकाश राज,विजेता दहिया,कुणाल कामरा,अभी मनुष्य से कॉकरोच बने अभिजीत दीपके ,कांग्रेस सपा आप सहित विपक्षी दलों के बड़े नेता,तथाकथित किसान नेता राकेश सब पहुँच गए।छात्र हित के आंदोलन में कश्मीर को भारत से अलग बताया गया,370 के हटने का विरोध किया गया,भारत की आस्था के केंद्र श्रीराम पर गलत टिप्पड़ी की गई,सनातन व संतों को लेकर गलत बोला गया,मंच पर इस्लामिक मजहबी गीत गाये गए।इसके बाद फिर असली खेल शुरू हुआ युवाओं को बहका कर दिल्ली बुलाकर संसद के मानसून सत्र वाले दिन हजारों युवाओं को बहकाकर देशद्रोही, धर्मद्रोही, सरकार के विरोध में नारे लगाकर संसद की तरफ कूच करना।नारे लग रे थे संसद को उखाड़ फेकेंगे,उमर खालिद को रिहा करो,हमे चाहिए सनातन से आजादी आरएसएस से आजादी,देश मे आग लगा देंगे,ईंट का जबाव पत्थर से देंगे,हम मरने या मारने ही आये हैं।ऐसा कहते हुए भोलेभाले युवाओं को ट्रेनिंग लिए हुए नकली छात्रों ने भड़काकर सदन की तरफ जाने को कहा।फिर पुलिस को देखकर उनको उकसाने का लिये उनको गाली देना,फिर उनपर पत्थर मारना, एक वीडियो में एक पुलिस कर्मी को इतनी बुरी तरह से मार रहे हैं ,देखकर भी दिल दहल जाये।समझने की बात ये है कि छात्र सड़क पर निकले हुए थे,अचानक भारतीय जीवन बीमा निगम की इमारत से पुलिस पर पथराव शुरू किया जाता है।फिर भागती हुई पुलिस पर सड़क की भीड़ हमला कर देती है।जिसमें 60 से अधिक पुलिसकर्मी तथा पांच आईपीएस अधिकारी गम्भीर रूप से घायल हो गए,जिसके बाद पुलिस को कार्यवाही करनी पड़ी।पुलिस अगर ये न करती तो निश्चित ही इनका हिंसक उद्देश्य सफल हो जाता।सोशल मीडिया पर वीडियो में कई छात्र ये कहते दिख रहे हैं कि हम भारत को नेपाल बनाने आये हैं।मनुष्य से कोकरेज बने अभिजीत दीपके ने बड़ी बेबाकी से बयान दिया है कि हम चाहै तो भारत को बंग्लादेश बना सकते हैं।समझने की बात है कि आखिर ये आंदोलन करने वाले चाहते क्या हैं,क्या उद्देश्य है इन सभी का।इसके साथ जब सड़क पर हिंसा हो रही थी।उसी कड़ी में मानसून सत्र के शुरू होते ही विपक्षी दलों ने सदन में वही शुरू कर दिया।शोर शराबा,नारेबाजी हिंसा की बात कहना,संसद चलने न देना,कागज फेंकना आदि।ये सब देखकर ऐसा लग रहा है कि इस आंदोलन को हिंसक बनाकर भारत में भी नेपाल,श्रीलंका व बंग्लादेश जैसे हालात पैदा करने का एक षड्यंत्र चल रहा है।जिसका मुख्य उद्देश्य सत्ता बदलना है।जिससे इन सभी देशद्रोही मनसूबे कामयाब हो जाये।पीछे बड़ी योजना से आप नेता अरविंद केजरीवाल व सजंय सिंह,कांग्रेस नेता राहुल गांधी आदि,सपा नेता अखिलेश यादव व डिम्पल यादव ,टीएमसी नेता ममता,शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे आदि विपक्षी नेताओं ने भी बयान दिया था कि भारत मे भी कभी भी सरकार के खिलाफ युवा सड़कों पर उतरकर नेपाल,श्रीलंका व बंग्लादेश वाली स्थिति ला सकते हैं।अब सबसे महत्वपूर्ण बात समझने की ये है कि पिछले कुछ समय से जो भी आंदोलन हो रहे हो चाहे किसानो के लिए हो,चाहे एनआरसी पर हो,चाहे जेएनयू में विद्यार्थियों का आंदोलन को या फिर अन्य कोई भी आंदोलन हो उन सबको हिंसक बनाने की सुनियोजित योजना एक जैसी है।इन सभी आंदोलनों में चेहरे वही है जो कभी देश के खिलाफ बोले हों।सोचनीय बात ये है कि ये सभी चेहरे पहलगाम सहित अन्य आतंकी घटना पर कुछ न बोलते न दिखते,इतनी बड़ी महामारी कोरोना में कंही सेवा करते न दिखे,अन्य किसी भी प्रकार की आपदा में कंही न दिखते,बस दिखते हैं तो आंदोलन के नाम पर दंगा करने वालो को और भड़काने के लिए।फिलिस्तीन में जब इजरायल ने जबाबी कार्यवाही की तो इनका दर्द उभर आता है,लेकिन बंग्लादेश में जब हिंदुओ को मारा गया तब चुप,पालघर में दो सन्यासियों सड़क पर लाठी से पीट पीटकर मारा ये चुप,दिल्ली में दंगा भड़काकर आईबी अधिकारी अंकित को पचास जगह चाकुओं से गोदकर मारा गया ये चुप।इतने सबके बाद भी अगर भारत का युवा इनकी सोची समझी साजिश को नही समझ पा रहा है तो फिर चिंतनीय बात है।दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के तार पाकिस्तान से भी जुड़ रहे हैं।एक पाकिस्तानी हैंडिल से पोस्ट में लिखा गया है कि कई छात्र मारे जा चुके हैं,सोशल मीडिया में बड़ी चतुराई व योजना से देशभक्ति गीत लगाकर घायल चित्र लगाकर देश को भड़काने की योजना भी शुरू हो गई है।आंदोलन करने वाले इन युवाओं में अधिकतम विद्यार्थी जेनएयू,एएमयू तथा जामिया के हैं। विदेशी ताकतों से फंडिंग,देश के विपक्ष से कवर फायर और इन कोकरेज बने युवाओं द्वारा हमला।सब सुनियोजित हैं।ये सब भूल रहे हैं भारत का युवा कुछ भी कर सकता है लेकिन भारत के खिलाफ कभी न जा सकता।इसलिये देश के युवाओं को आगे बढ़कर इनका जबाव देना होगा,कुछ युवाओं ने ये समझकर जबाव देना शुरू भी किया है,अधिकतम युवा इस आंदोलन की सच्चाई जानकर पीछे हट हैं। सरकार को भी छात्रों के हितों का ध्यान रखते हुए परीक्षाओं के लिये कठोर व मजबूत कदम उठाने ही पड़ेंगे।नही तो ये लोग अपने देशद्रोही हेतु के लिये देश के युवाओं बहकाने में कामयाब हो जाएंगे







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