भाद्रपद मास का महत्व व करने योग्य उपाय व मंत्र 

भाद्रपद मास का महत्व व करने योग्य उपाय व मंत्र 

सतीश शर्मा

 पंचांग का छठा महीना भाद्रपद मास है जिसे आम भाषा मे भादों भी कहते है, ‘भद्र’ यानी अत्यंत कल्याणकारी और फलदायी इस लिए इस मास को कल्याणकारी और फलदायी माना गया है। यह महीना मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण, श्रीगणेश और देवर्षियों की साधना के लिए समर्पित है। चातुर्मास का दूसरा महीना होने के कारण इसका आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में भाद्रपद मास 29 अगस्त से 26 सितंबर तक रहेगा।

भाद्र मास की मुख्य महिमा और धार्मिक महत्वतीन पूर्णावतारों का प्राकट्य,भाद्रपद महीने में संसार के तीन प्रमुख दिव्य अवतारों का प्राकट्य हुआ था—श्रीकृष्ण (जन्माष्टमी), श्रीगणेश (गणेश चतुर्थी) और लाडली जी (राधाष्टमी)। स्कंद पुराण के अनुसार, इस महीने में किया गया थोड़ा सा भी जप, मौन, दान और सात्विक जीवन हजार गुना अधिक पुण्य प्रदान करता है। भगवान विष्णु इस समय क्षीरसागर में योगनिद्रा में होते हैं, इसलिए इस समय की गई मानसिक पूजा और व्रत आत्मा को शुद्ध करते हैं।

भाद्रपद पूर्णिमा से ही पूर्वजों की तृप्ति के लिए 15 दिनों का श्राद्ध पक्ष (पितृ पक्ष) शुरू हो जाता है।

 संतान सुख की कामना के लिए इस महीने गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करना और बुद्धि-विवेक के लिए श्रीगणेश को दूर्वा चढ़ाना सर्वोत्तम माना गया है। संतान सुख और सौभाग्य की कामना के लिए इस महीने में लड्डू गोपाल या भगवान कृष्ण को नियमित रूप से पंचामृत से स्नान कराएं और तुलसी दल (पत्ता) अर्पित करें। बुद्धि, विद्या और विघ्नों के नाश के लिए पीले रंग की गणेश मूर्ति स्थापित कर उन्हें प्रतिदिन दूर्वा (दूब घास) और मोदक का भोग लगाएं। चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं और सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। इसलिए शिव जी के मंदिर जाकर जल चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। 

मंत्रों का जाप – प्रतिदिन सुबह-शाम शांत मन से इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें:

भगवान कृष्ण: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” गणेश जी: “ॐ गं गणपतये नमः” शिव जी: “ॐ नमः शिवाय” 

 भाद्रपद मास (भादों) में जीवन की परेशानियों को दूर करने, सुख-समृद्धि पाने और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त करने के लिए कई विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय किए जाते हैं। यह महीना भगवान श्रीकृष्ण, श्रीगणेश और भगवान शिव की पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। 

सुख-समृद्धि और ग्रह शांति के उपाय – 

जीवन के कष्टों को दूर करने के लिए प्रतिदिन गाय को रोटी खिलाएं। विशेषकर बुधवार के दिन गौशाला जाकर गायों को हरा चारा खिलाने से आर्थिक तंगी दूर होती है।

पितरों का आशीर्वाद: भाद्रपद की अमावस्या और इस महीने के उत्तरार्ध में शुरू होने वाले पितृ पक्ष में पितरों के तर्पण, श्राद्ध और दान का विशेष महत्व है। इससे पितृदोष से मुक्ति मिलती है। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना पुण्यदायी माना जाता है। यदि संभव हो तो पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर स्नान करें।

इस महीने में जरूरतमंदों को दही, दूध, घी, अनाज, वस्त्र, या छाता दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। 

भाद्रपद मास में क्या न करें –

 इस महीने में दही और उससे बनी चीजों का सेवन पूरी तरह वर्जित माना जाता है, क्योंकि वर्षा ऋतु के कारण इस समय पाचन शक्ति कमजोर होती है। इसलिए सात्विक और हल्का भोजन लें। मान्यताओं के अनुसार इस माह में नारियल के तेल का इस्तेमाल करने और किसी से चावल या नारियल तेल का दान लेने से बचना चाहिए। चातुर्मास के अंतर्गत आने के कारण इस महीने में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। 

भाद्रपद मास में ग्रहों की स्थिति और राशियों के स्वामी के अनुसार विशेष उपाय करने से भाग्य का साथ मिलता है, आर्थिक तंगी दूर होती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी 12 राशियों के लिए अचूक उपाय नीचे दिए गए हैं –

मेष राशि – भाद्रपद में हनुमान जी की आराधना करें। रात के समय लाल चंदन और केसर घिसकर एक सफेद कपड़े को रंग लें और उसे अपनी तिजोरी या गल्ले में बिछाएं। मंत्र: “ॐ हनुमते नमः” का नियमित जाप करें। 

वृषभ राशि – इस महीने सुख-सुविधाओं में वृद्धि के लिए कुमकुम और अक्षत (चावल) का तिलक माथे पर लगाएं। शुक्रवार के दिन शिवलिंग पर दूध और सफेद फूल अर्पित करें। मंत्र: मां दुर्गा के मंत्र “ॐ दुं दुर्गायै नमः” का जाप करें।

मिथुन राशि – बुधवार के दिन भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं और साबुत हरी मूंग की दाल का दान करें। नियमित रूप से सफेद गाय को हरी घास खिलाएं। मंत्र: “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जाप करें।

कर्क राशि – मानसिक शांति और धन लाभ के लिए चांदी के पात्र या लोटे में गंगाजल और दूध मिलाकर शिवलिंग पर अभिषेक करें।मंत्र: “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए शिव जी की आराधना करें।

सिंह राशि – प्रतिदिन तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल में लाल फूल और थोड़ा सा गुड़ मिलाकर अर्घ्य दें। जरूरतमंदों को गेहूं या तांबे के बर्तनों का दान करें। मंत्र: “ॐ सूर्याय नमः” या गायत्री मंत्र का जाप करें।

कन्या राशि – गणेश जी को मोदक का भोग लगाएं। बुधवार के दिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और किसी सुहागन महिला को सुहाग की सामग्री (हरी चूड़ियाँ, सिंदूर) दान करें।मंत्र: “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” का जाप करें।

तुला राशि – लक्ष्मी नारायण मंदिर में जाकर मिश्री और खीर का भोग लगाएं। शुक्रवार के दिन सफेद रंग के वस्त्र या चीनी का दान करने से आर्थिक कष्ट दूर होते हैं। मंत्र: “ॐ महालक्ष्म्यै नमः” का जाप करें।

वृश्चिक राशि – इस राशि के लोग भगवान श्रीकृष्ण को तुलसी दल और माखन का भोग लगाएं। शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर तेल का दीपक जलाएं। मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें। 

धनु राशि – बृहस्पतिवार (गुरुवार) के दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करें। विष्णु जी के मंदिर में पीले फल (जैसे केले) और चने की दाल का दान करें। मंत्र: “ॐ गुरवे नमः” या “ॐ नमो नारायणाय” का जाप करें। 

मकर राशि – शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए शनिवार को काले तिल और सरसों के तेल का दान करें। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। मंत्र: “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करें।

कुंभ राशि – शनिवार के दिन किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को चप्पल, छाता या काले कंबल का दान करें। अपने बटुए (पर्स) में चांदी का एक छोटा चौकोर सिक्का रखें। मंत्र: शनि चालीसा का नियमित पाठ करें।

मीन राशि – अपने घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में एक तांबे या चांदी के बर्तन में गंगाजल भरकर रखें। गुरुवार के दिन माथे पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं। मंत्र: “ॐ बृहस्पतये नमः” का जाप करे । 

अज्ञान को दूर भगाएं ज्ञान का उजाला करें। गरीब बेसहारा बच्चों कि शिक्षा हेतु सहायता करने के लिए निम्नलिखित खाते में दान करें।
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