राजनीति का गिरता स्तर
ललित शंकर हरिद्वार 
किसी बहु देश के विकास में,उत्थान में राजनीतिक भागीदारी अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।सत्ता पक्ष हो या विपक्ष दोनों की देश उन्नति में सहायक होते हैं।लेकिन पिछले कुछ समय से भारत की राजनीति का स्तर लगातर गिरता जा रहा है।जिसका मुख्य कारक है कांग्रेस सहित भारत का विपक्ष।सत्ता प्राप्ति के लिये राजनीतिक रूप से हर प्रयोग करना जायज है।लेकिन देश व समाज का अहित करके सत्ता प्राप्ति करने के प्रयोग तो ठीक नही।चुनावो में लगातार हार के कारण कांग्रेस सपा आदि विपक्षी दल राजनीति के सबसे निचले स्तर पर आ गए हैं।अब भारत का विपक्ष सत्ता प्राप्ति के लिये जो प्रयोग कर रहा उसको सोचकर भी चिंता होने लगती है।अभी सोशल मीडिया से चर्चित हुए कॉकरेजों द्वारा विद्यार्थियों के लिये एक आंदोलन चलाया गया।जिसमें पूरा देश उनके समर्थन में भी आ गया था,लेकिन जैसे ही इन सबकी सच्चाई जनता के सामने आई तो समर्थन करने वाली वही जनता उनके विरोध में आ गई।कांग्रेस सहित विपक्ष को शायद ये स्पष्ठ हो गया है हम लोग चुनाव में जीतकर अब देश की सत्ता में नही आ सकते इसलिए कुछ भी करो सत्ता हटाओ और सत्ता पाओ वाली देशहित की रणनीति पर पूरा विपक्ष लग गया है,जिसके लिये इन्होंने अब आंदोलन को हथियार बनाया है।अभी विद्यार्थियों का आंदोलन शांत नही हुआ कि सोशल मीडिया पर ही बने आरक्षण हटाओ नामक संगठन ने आंदोलन शुरू कर दिया है।ये शुरू होते ही सपा मुखिया अखिलेश यादव का तुरंत बयान आया कि आरक्षण था,आरक्षण है और आरक्षण रहेगा।फिर अखिलेश ने कहा कि ये आंदोलन सरकार की आरक्षण विरोधी सोच को दर्शाता है।ये इस आंदोलन की बस शुरुआत है।इसके विस्तृत होते ही बड़ी योजना के साथ आरक्षण बचाओ के नाम से आरक्षित वर्ग का आंदोलन शुरू कराया जाएगा।जिससे भारतीय समाज मे आपस मे विरोधाभास शुरू हो जाये।फिर इस विरोध को हिंसक रूप देने की योजना भारत के विपक्ष के द्वारा बनाई जाएगी।जैसे सीजेपी के आंदोलन में बनाई गई थी।विपक्ष की सोच स्पष्ठ होती दिख रही है कि जिस प्रकार पाकिस्तान, बंग्लादेश, अफगानिस्तान, नेपाल तथा श्रीलंका में हिंसा करके सत्ता बदलवाई गई वेसे ही भारत मे करना है।इस योजना में केवल भारत का विपक्ष ही शामिल नही है बल्कि कुछ विदेशी शक्तियां भी शामिल नजर आ रही है।जिस प्रकार भारत के अन्य पड़ोसी देशों में अमेरिकी सोच ने सत्ता बदलवाई गई।वेसे ही भारत में करने की योजना है।समझने का विषय है कि जंतर मंतर पर सीजेपी के आंदोलन में एक दम सारी सुख सुविधाएं वेसे ही मिलने लगी थी जैसे किसान आंदोलन में,सीएए के समय शाहीनबाग मे मिली थी।आखिर इन आंदोलनों के लिये इतना पैसा आता कँहा से है।ये सब समझने का विषय का है।ये सब भारत विरोधी ताकतों द्वारा विदेशी फंडिंग के कारण ही होता है।अभी इसकी रोकथाम के लिए सरकार जैसे ही एफसीआरए बिल लाने की तैयारी में लगी तुरंत विपक्ष हिंसक रूप में आकर सदन को प्रभावित करने लगा,बिल को सदन में आने ही नही दिया।कभी संविधान खतरे में कहकर,कभी आरक्षण बचाओ कहकर,तो कभी आरक्षण हटाओ कहकर,कभी युवाओं को भड़काकर कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष हिंसक रूप से सत्ता बदलने की योजना में लग गया है।जबकि इनकी देश विरोधी सोच को समाज भी अच्छी तरह समझ गया है।अभी कांग्रेस मुख्यालय पर राहुल गांधी,सोनिया गांधी द्वारा वंदेमातरम का अपमान पूरे देश ने देखा,उसके बाद कांग्रेस ने अपनी मुख्य बैठक में पूरे वंदेमातरम को न गाने का प्रस्ताव पास करते हुए कहा कि हम किसी भी कीमत पर वंदेमातरम नही गाएंगे।कांग्रेस वंदेमातरम का विरोध केवल ओर केवल मुस्लिम वोट के लिये कर रही है।कांग्रेस की नजर में मुस्लिम देश से भी बड़े हो गए है।मुश्लिम लीग के बाद कांग्रेस खुलकर वंदेमातरम का विरोध करने वाला दूसरा दल बन गया है।जिसको विपक्ष का भी समर्थन है।आरक्षण पर सरकार को घेरने वाले विपक्ष कभी मुश्लिम शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण देने की वकालत क्यो नही करता।अलीगढ़ मुश्लिम विश्वविद्यालय तथा जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय सहित सभी मुस्लिम शिक्षण संस्थाओ में आरक्षण लागू नही है,कभी कांग्रेस सपा सहित कोई विपक्षी दल नही कुछ बोला।धारा 370 हटने से पहले पूरे कश्मीर कोई जातिगत आरक्षण नही था।उसका कभी विरोध नही किया बल्कि धारा 370 हटने का विरोध कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष आज भी करता है।अच्छा होगा कि एक आंदोलन इन मुस्लिम विश्वविद्यालयो में आरक्षण व्यवस्था लागू करने के लिये किया जाए जिससे एससी एसटी ओबीसी वर्ग का कुछ भला हो।परंतु ऐसा कभी होगा नही क्योंकि भारत का विपक्ष इस समय वामपंथी सोच से चल रहा है।जिस प्रकार वामपंथी केवल समस्या बताते हैं।उसका समाधान कभी नही करने देते।वेसे ही विपक्ष सामाजिक रूप से नई नई समस्याओं को जन्म देकर सामाजिक द्वेष उतपन्न करके देश मे हिंसा कराना चाहता है।देशहित के हर मुद्दे का विरोध चाहे राफेल खरीद हो,चुनावी प्रणाली हो,धारा 370 हटना हो,राममंदिर बनना हो,कोई भी विदेशी नीति हो हर मुद्दे का विरोध।देशविरोधी मुद्दों का खुलकर समर्थन जैसे फिलिस्तीन इजरायल युद्ग में आतंकी संगठन हमास का समर्थन,ईरान अमेरिका युद्ध ईरान का समर्थन,सर्जिकल व एयर स्ट्राइक में सैन्य कार्यवाही का सबूत मांगना,ऑपरेशन सिंदूर में सैनिकों की वीरता पर प्रश्नचिन्ह लगाना ऐसे देशविरोधी काम का खुलकर समर्थन करना।राजनीति का स्तर इतना नीचे आना देश के लिये समाज के लिये घातक है।भारत की जनता को अब समझना होगा तथा सबको समझाना भी होगा कि समाज को इनके बहकावे में नही आना है।भारत के युवाओं को भी विपक्ष की राजनीति के गिरते स्तर को समझना होगा।देश के युवाओं को विपक्ष से पूछना भी चाहिए कि दिल्ली में भोलेभाले विद्यार्थियों को भड़काने वाले लोग झारखंड क्यो नही गए।क्योंकि वँहा से इनको चुनावी लाभ नही मिल रहा।






