संतान योग,कब, कैसे

संतान योग 

सतीश शर्मा

संतान कब होगी ?,संतानोत्पत्ति के बारे में जानने के लिए स्त्री-पुरुष दोनों की कुंडलियों पर विचार करके ही निर्णय करना चाहिए।संतान तभी होगी, जब कुंडली में संतान योग होगा इसलिए सर्व प्रथम यह देखिए कि संतान योग है या नहीं। फिर यह देखिए कि कोई संतान बाधा योग तो नहीं है। यदि संतान योग है और संतान बाधा योग नहीं है, तब दोनो कुंडलियों में ग्रह स्थिति एवं गोचर में ग्रहों के भ्रमण देखने के साथ-साथ यह भी देखिए कि विशोत्तरी महादशा तथा अंतर्दशा किस ग्रह की चल रही है, इन सब बातों पर विचार करके ही आप ठीक निर्णय पर पहुंच सकेंगे।

निम्नलिखित में से किसी की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो तो पुत्र की उत्पत्ति संभव होती है:-ज्योतिष के अनुसार, पुत्र या पुत्री का निर्धारण जन्मकुंडली के पंचम भाव (संतान भाव), उसके स्वामी (पंचमेश), और ग्रहों की स्थिति (जैसे गुरु, सूर्य, मंगल, चंद्र, शुक्र) के विश्लेषण से किया जाता है, जहाँ पुरुष ग्रहों (सूर्य, मंगल, गुरु) और पुरुष राशियों (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ) का प्रभाव पुत्र योग बनाता है, और स्त्री ग्रहों (चंद्र, शुक्र) व स्त्री राशियों (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन) का प्रभाव कन्या योग बनाता है, लेकिन यह केवल ज्योतिषीय गणना है, जो वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है और संतान का लिंग प्राकृतिक रूप से तय होता है। 

पंचम भाव और पंचमेश व पुत्र योग – यदि पंचम भाव में बुध, गुरु, शुक्र जैसे बलवान ग्रह हों, पंचमेश बली हो और पुरुष ग्रहों (सूर्य, मंगल, गुरु) से देखा जाए, तो पुत्र की संभावना बढ़ जाती है। 

कन्या योग: यदि पंचमेश चंद्र के साथ हो या पंचम भाव में कर्क राशि का द्रेष्काण हो, तो कन्या जन्म की संभावना होती है। 

ग्रहों का प्रभाव व संतान कारक ग्रह – बृहस्पति (गुरु) संतान का मुख्य कारक है, विशेषकर पुत्र के लिए। सूर्य और मंगल भी पुरुष संतान से जुड़े हैं। 

स्त्री ग्रह प्रभाव – चंद्र और शुक्र स्त्री ग्रहों के रूप में कन्या संतान का संकेत देते हैं। 

पुरुष ग्रह दृष्टि – यदि गुरु (संतान कारक) पर मंगल या सूर्य जैसे पुरुष ग्रहों की दृष्टि हो और वह पुरुष राशि में हो, तो पुत्र का योग बनता है। 

भाव और राशियाँ व पुरुष दिन/राशियाँ, मंगलवार, गुरुवार, रविवार जैसे पुरुष दिनों में गर्भधारण (ज्योतिष के अनुसार) या पुरुष राशियों (मेष, सिंह, धनु) में ग्रहों की स्थिति पुत्र का संकेत देती है। 

महिला दिन/राशियाँ: महिलाओं के लिए चंद्र, शुक्र और स्त्री राशियाँ (कर्क, वृषभ, मकर) कन्या योग बनाती हैं।  पंचम भाव का स्वामी बलवान हो और लग्न से शुभ भावों (1, 2, 5, 9) में हो, तो पुत्र से भाग्य वृद्धि होती है। पंचम भाव में शुभ ग्रहों का होना या उन पर शुभ दृष्टि होना संतान के लिए अच्छा माना जाता है। 

यह सभी ज्योतिषीय विधियाँ जन्मकुंडली और ग्रहों की स्थिति पर आधारित हैं। ये केवल संभावनाएं बताती हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं करतीं। संतान का लिंग (लिंग निर्धारण) केवल प्रकृति और विज्ञान का विषय है, ज्योतिष इसका केवल एक सांकेतिक पहलू बताता है। 

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