महारानी अहिल्याबाई होलकर

महारानी अहिल्याबाई होलकर

सतीश शर्मा

भारत का अपना एक समृद्धशाली इतिहास रहा है | संस्कृति और परंपराओं का देश भारत हमेशा से ही दुनिया भर में आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां की विविधताओं की वजह से दुनिया भर से लोग यहां खींचे चले आते हैं। यहां कई शासकों ने शासन किया, तो वहीं यहां कई लड़ाइयां भी लड़ी गईं। इसके अलावा भारत के इतिहास के पन्नों में कई ऐसी रानियों के नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने पराक्रम और दृढ़ निश्चय से विरोधियों को कड़ी टक्कर दे हराया है । रानी अहिल्याबाई उन्ही वीरांगनाओ में से एक थीं, उनका नाम लोग सम्मान सहित याद करते है ।अहिल्याबाई होलकर भारत माता की वह बेटी थी जिसने 275 साल पहले ही कुरीतियों की बेड़ियों को तोड़ व उन्हे समाप्त करने का प्रयास किया । राज्य मे संकट के समय जब जरूरत पड़ी तो अपनी प्रजा के लिए घोड़े पर सवार होकर खड़ग हाथ मे लिए जंग भी लड़ी। धर्म का संदेश फैलाया,मंदिरों का निर्माण किया , संस्कृति संरक्षण, बालिका शिक्षा, महिला अधिकारों और औद्योगीकरण को बढ़ावा दिया।

होलकर साम्राज्य की महारानी होलकर भारतीय इतिहास की कुशल महिला शासकों में से एक रही हैं। इनका जन्म 31 मई, 1725 को हुआ था और 13 अगस्त, 1795 को निधन हो गया था। महाराष्ट्र में अहमदनगर जिले के जामखेड के नजदीक चोंडी गांव में जन्म लेने वाली अहिल्याबाई का शुरुआती जीवन बड़ी कठिनाईयों से गुजरा।

भारत के मालवा साम्राज्य की मराठा अहिल्याबाई होलकर महारानी थीं | उनके पिता मंकोजी राव शिंदे, अपने गाव के पाटिल थे. उस समय महिलाये स्कूल नहीं जाती थीं, लेकिन अहिल्याबाई के पिता ने उन्हें लिखने -पढ़ने लायक पढ़ाया | रानी न्याय करते समय अपने पराये में जरा भी भेद नहीं करती थी | व्यक्ति से लेकर पशुओं तक के दर्द को समझती थी | एक बार क्रूरता के मामले में बेटे के दोषी पाये जाने पर अहिल्याबाई होलकर बेटे को रथ के नीचे कुचलकर मारने के लिए निकल गई |

रानी अहिल्याबाई का नाम सुनते ही जहां कुछ लोगों के मन में मालवा का ख्याल आता है, लेकिन अहिल्याबाई की शख्सियत और इतिहास इससे कही बड़ा है। वह मध्यप्रदेश के महेश्वर की कर्ता-धर्ता ही नहीं, बल्कि होल्कर साम्राज्य का एक अहम हिस्सा भी थीं। उन्हें न सिर्फ मालवा की रक्षा करने के लिए जाना जाता है | महारानी अहिल्याबाई होलकर ने कई सारे सामाजिक कार्य करे इसलिए भी उन्हें आज तक बढ़े सम्मान के साथ याद किया जाता है।

मध्यप्रदेश के मालवा से अहिल्याबाई के संबंध के बारे में तो हर कोई जानता है, लेकिन बेहद कम लोग ही यह जानते होंगे कि अहिल्याबाई का महाराष्ट्र के अहमदनगर से गहरा संबंध रहा है। अहिल्याबाई की शादी प्रसिद्ध सूबेदार मल्हार राव होल्कर के पुत्र खंडेराव से हुई थी। वह भारत के मालवा साम्राज्य की मराठा होल्कर महारानी थीं। अहिल्याबाई के पति खंडेराव होल्कर की 1754 में कुंभ्बेर युद्ध में मौत हो गई थी।अहिल्याबाई होलकर पति की मृत्यु के बाद सती होना कहती थी पर उन्हे ईसा करने के लिए उनके ससुर ने रोका पर इसके 12 साल बाद उनके ससुर मल्हार राव होल्कर की भी मौत हो गई। इसके एक साल बाद अहिल्याबाई को मालवा साम्राज्य की महारानी घोषित किया गया। अपने शासनकाल के दौरान रानी अहिल्याबाई ने साम्राज्य महेश्वर और इंदौर में कई मंदिरों का निर्माण कराया था। साथ ही उन्होंने लोगों के लिए कई सारी धर्मशालाएं बनवाईं, जो मुख्य रूप से तीर्थ स्थानों जैसे द्वारका, काशी विश्वनाथ, वाराणसी का गंगा घाट, उज्जैन, नाशिक विष्णुपद मंदिर और बैजनाथ के आसपास मौजूद हैं। इसके अलावा उन्होंने औरंगजेब द्वारा तोड़े गए कई मंदिरों का दोबारा निर्माण भी करवाया। अपने शासनकाल के दौरान उन्होंने पूरे भारत में श्रीनगर, हरिद्वार, केदारनाथ, बदरीनाथ, प्रयाग, वाराणसी, नैमिषारण्य, पुरी, रामेश्वरम, सोमनाथ, महाबलेश्वर, पुणे, इंदौर, उडुपी, गोकर्ण, काठमांडू आदि में बहुत से मंदिर बनवाए।

महाराष्ट्र के एक शहर अहमदनगर का नाम अहिल्या बाई नगर करने का एलान किया गया है। तो वहीं देश भर मे अनेकों कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नाम महारानी अहिल्याबाई होलकर हैं।

सतीश शर्मा जी द्वारा लेखन ,संकलन व सम्पादन 

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