युवा राष्ट्र-निर्माण’ में योगदान दें – प्रधानमंत्री 

युवा राष्ट्र-निर्माण’ में योगदान दें – प्रधानमंत्री 

सतीश शर्मा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को ‘सकारात्मकता, आत्म-सुधार और राष्ट्र-निर्माण’ में योगदान देने का संदेश दिया है ।मुश्किलें कभी अकेली नहीं आतीं, वे अपने साथ नए अवसर भी लाती हैं। समस्याओं का समाधान खोजने का साहस रखें। भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहा है।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अगस्त 2026 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और देश के युवाओं को आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण का मंत्र दिया। इस भव्य समारोह में 587 पीएचडी शोधकर्ताओं सहित 3,000 से अधिक छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश के तकनीकी कौशल को बढ़ावा देने के लिए सोनीपत परिसर में स्थापित एआई-संचालित हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग सुविधा ‘परम प्रज्ञा’ का भी उद्घाटन किया।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के दीक्षांत समारोह में पीएम मोदी ने कहा कि जीवन कोई ‘लीडरबोर्ड’ नहीं है सोशल मीडिया और तुलना से बचने की सलाह दी प्रधानमंत्री मोदी ने आज के डिजिटल युग के युवाओं को सोशल मीडिया के प्रभावों से सतर्क रहने की सीख दी। उन्होंने कहा कि “जीवन कोई लीडरबोर्ड नहीं है”। छात्रों को दूसरों के सैलरी पैकेज, नौकरियों या पदों से अपनी तुलना कर खुद को तनाव में नहीं डालना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आपकी यात्रा दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि खुद को हर दिन कल से बेहतर बनाने की होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने देश के विनिर्माण और आत्मनिर्भरता के संकल्प को दोहराया। उन्होंने उस समय को याद किया जब भारत के सेमीकंडक्टर मिशन पर सवाल उठाए गए थे, लेकिन आज देश की पहली सेमीकंडक्टर इकाई में उत्पादन शुरू हो चुका है। उन्होंने छात्रों में जोश भरते हुए कहा, “मुझे दृढ़ विश्वास है कि आने वाले समय में चिप्स से लेकर बड़े जहाजों (शिप्स) तक, सब कुछ इस देश में आपके हाथों से बनाया जाएगा”।

भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मैं कोई बाबा बागेश्वर नहीं हूं, लेकिन मैं आपके मन की बात समझ सकता हूं।” उन्होंने युवाओं से कहा कि वे समस्याओं को केवल उजागर न करें बल्कि उनके व्यावहारिक समाधान की ओर बढ़ें। उन्होंने कहा, “जो लगातार सीखता रहता है, वही जीतता है”। बदलते वैश्विक परिवेश और तेजी से बदलती तकनीक (जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए निरंतर सीखना ही एकमात्र रास्ता है।

वैश्विक महाशक्ति बनने की दौड़ में तकनीक को सबसे बड़ी ताकत बताते हुए प्रधानमंत्री ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के सोनीपत कैंपस में ‘परम प्रज्ञा’ सुपरकंप्यूटर की शुरुआत की। यह उन्नत तकनीक भारत में एआई, डेटा साइंस और अंतः विषय अनुसंधान को नए आयाम देगी। इसके साथ ही, अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा घोषित ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान फंड की छात्रों ने सराहना की, जो देश के इनोवेटर्स को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में मदद करेगा।

प्रधानमंत्री ने स्नातक हो रहे युवाओं से अपील की कि वे अपने करियर या किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को चुनते समय हमेशा एक बात सोचें—”इससे मेरे देश को क्या लाभ होगा?” उन्होंने कहा कि डिग्रियां हासिल करने के बाद अब युवाओं का यह परम दायित्व है कि वे देश को आर्थिक, तकनीकी और औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अपनी भूमिका निभाएं और ‘विकसित भारत’ के सपने को हकीकत में बदलें।

जंतर-मंतर की एक घटना के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने भटके हुए युवाओं के प्रति करुणा और सुधार का दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने समाज से कहा कि युवाओं को अदालती कार्यवाही या सामाजिक प्रताड़ना में फंसाने के बजाय सही रास्ता दिखाया जाना चाहिए। युवाओं को उनका संदेश था कि वे अपनी गलतियों से सीखें, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और देश की प्रगति में हाथ बंटाएं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के छात्रों और युवाओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि परीक्षाओं का तो सिलेबस तय होता है, लेकिन जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ ‘आउट ऑफ सिलेबस’ होता है। यहां न कोई तय कोर्स होता है और न ही पहले से बना प्रश्न पत्र। असली चुनौतियों को खुद पहचानना और उनसे पार पाना ही जीवन की सफलता है। 

पीएम मोदी ने युवाओं से नशे और ड्रग्स के खतरों से दूर रहने का कड़ा आह्वान किया है। उन्होंने ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान’ के तहत संदेश दिया कि युवाओं की नस-नस में नशा नहीं बल्कि कामयाबी दौड़नी चाहिए, क्योंकि युवा जितना सशक्त होगा, राष्ट्र उतना ही मजबूत बनेगा। 

कारगिल विजय दिवस और युवाओं से बातचीत के दौरान उन्होंने युवाओं से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को आत्मसात करने को कहा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे देश के सीमावर्ती गांवों (जिन्हें अब ‘पहले गांवों’ के रूप में जाना जाता है) में जाएं और वहां के पर्यटन व स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के साथ मिलकर काम करें। 

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली में दिया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह भाषण केवल एक औपचारिक दीक्षांत संदेश नहीं था, बल्कि यह नए भारत के तकनीकी और मानसिक सशक्तिकरण का एक रोडमैप था। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि भारत का युवा अब केवल नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि दुनिया को अपनी खोजों से बदलने वाला ‘इनोवेटर’ और ‘नेशन बिल्डर’ बन चुका है।

अपने भाषण में उन्होंने युवाओं को जीवन में जिज्ञासा बनाए रखने, निरंतर सीखने, ‘विकसित भारत’ के संकल्प से जुड़ने और अपनी तुलना दूसरों से न करने की महत्वपूर्ण सीख दी।

वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और इसके पीछे सबसे बड़ी ताकत तकनीक की गति है। सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष तकनीक, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे नए क्षेत्र युवाओं के लिए असीम संभावनाएं लेकर आ रहे हैं।प्रधानमंत्री ने सोनीपत कैंपस में AI-संचालित सुपरकंप्यूटिंग सुविधा ‘परम प्रज्ञा’ का भी उद्घाटन किया। 

 

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