Gen-Z की शिकायतें जायज, वे एंटी-नेशनल नहीं… छात्रों के प्रदर्शन पर बोले
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत
सतीश शर्मा 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने “युवाओं से संवाद कार्यक्रम” मे छात्रों के प्रदर्शन को लेकर अपनी बात रखी । भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन भी संवाद का एक तरीका है । अगर बातचीत होगी तो समाधान निकलेगा और जब बात नहीं सुनी जाती तो लोग आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और उन्हें ‘राष्ट्र-विरोधी’ बताए जाने के सवाल पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि Gen Z और Gen Alpha को गलत नजरिए से नहीं देखना चाहिए । उनके मुताबिक नई पीढ़ी देशभक्ति और सेवा के मूल्यों को समझती है और मौजूदा पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार है । भागवत ने कहा, ‘अगर Gen Z विरोध कर रही है, तो वे राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं, वे हमारे ही लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं,मुझे नहीं लगता कि Gen Z ऐसी है । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने 6 अगस्त 2026 को मुंबई के बांद्रा स्थित नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित (इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस) के 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में (जेन-जी) और जेन अल्फा के युवाओं के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद मे कहा ।
भागवत जी ने कहा कि नई पीढ़ी सवाल पूछती है। हमें उन्हें तर्क और प्यार से समझाना होगा। Gen-Z और Gen-Alpha के पास जानकारी + टेक्नोलॉजी है, अब जरूरत है चरित्र और कर्तव्य की। भागवत ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि “आज्ञाकारिता का दौर अब खत्म हो चुका है” आंख मूंदकर बात मानने का समय गया। आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) को केवल आदेश देकर काम नहीं कराया जा सकता, वे हर बात के पीछे ‘क्यों’ का कारण और ठोस लॉजिक मांगते हैं उन्हे संतुष्ट करना जरूरी, युवाओं से अपनी बात मनवाने के लिए उन्हें तर्कों से संतुष्ट करना अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं से जुड़ने के लिए सीधी बातचीत और सवाल-जवाब की संस्कृति को अपनाने पर जोर दिया । संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि LGBTQ+ समुदाय भी हमारे समाज का एक अभिन्न हिस्सा है । उन्हें सम्मान और समानता का अधिकार मिलना चाहिए और समाज को उन्हें हीन भावना से नहीं देखना चाहिए । उन्होंने टिप्पणी की कि जेन जी शांत दिमाग से सोचने के बजाय अक्सर जो उन्हें तात्कालिक रूप से सही और तार्किक लगता है, उससे जल्दी प्रभावित हो जाती है।
इस संवाद में ‘विश्व को एकजुट करने में भारत की क्या भूमिका हो सकती है’, इस विषय पर भी चर्चा की गई । युवाओं के मन में देश के प्रति प्रेम जगाना और मजबूत राष्ट्र के निर्माण में उनके योगदान को रेखांकित करना इस बातचीत का एक मुख्य एजेंडा रहा । इस विशेष सम्मेलन में देश के लगभग 100 शहरों से आए 2,000 से अधिक छात्रों (विशेषकर 15 से 19 वर्ष के आयु वर्ग) ने भाग लिया । राजनीति और सामाजिक हलकों में इस संवाद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा अपनी रणनीति में बदलाव करने और देश के भविष्य (Gen Z) को नजरअंदाज न करने के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
मोहन भागवत जी ने नई पीढ़ी (Gen Z) के युवाओं को अत्यंत प्रामाणिक (Authentic) और भावुक बताया। उन्होंने युवाओं को देश के भविष्य के रूप में नेतृत्व संभालने, राष्ट्र निर्माण और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का पारंपरिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण पूरे विश्व को जोड़ने और एकता के सूत्र में पिरोने की क्षमता रखता है। उन्होंने युवाओं को केवल तकनीक तक सीमित न रहकर वास्तविक नेतृत्व और सामाजिक मूल्यों को समझने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि आज परिवारों में विश्वास और संवाद का वातावरण कम हो गया है। अगर घर में बातचीत शुरू हो जाए तो कई सामाजिक और मानसिक चुनौतियों का समाधान निकल सकता है।
“जब परिवार मजबूत होंगे, तभी समाज संगठित और राष्ट्र सशक्त बनेगा”। युवाओं से अपील की कि व्यस्त जीवन में परिवार के लिए समय निकालें और अगली पीढ़ी को जिम्मेदार नागरिक बनने के संस्कार दें।
उन्होंने कहा कि भारत अपने स्वभाव और संस्कृति से हिंदू राष्ट्र है। दुनिया में हमारी पहचान सनातन संस्कृति से होती है। साथ ही ये भी दोहराया कि भारत में रहने वाला हर व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, भारतीय है। हिंदू दर्शन सह-अस्तित्व में विश्वास रखता है इसलिए इस्लाम भारत में है और रहेगा। डेमोग्राफी में बदलाव को चिंता का विषय बताया। कहा कि घुसपैठ और कट्टरपंथी विचारधारा से समाज पर असर पड़ता है, इसलिए इसे संवेदनशीलता से समझना होगा। भागवत जी ने विवेकानंद का उदाहरण दिया – “My American Brothers and Sisters” कहने के पीछे तपस्या की शक्ति थी। बोले कि भारत को आर्थिक, नैतिक और सामरिक सामर्थ्य बनाना है, पर “डंडा चलाकर” नहीं, सबको मित्र बनाकर विश्व कल्याण के लिए।
उन्होंने संस्कृत श्लोक भी कहा:
`एतद् देश प्रसूतस्य सकाशादग्रजन्मनः।` `स्वं स्वं चरित्रां शिक्षरेन् पृथिव्यां सर्वमानवाः।।`
मतलब: इस देश में जन्मे श्रेष्ठ लोगों से पूरी दुनिया चरित्र सीखे।
संघ के बारे में कहा कि RSS राष्ट्रहित में सलाह देता है, फैसला चुनी हुई सरकार का काम है। RSS समाज के सभी वर्गों के साथ संवाद की निरंतर प्रक्रिया में विश्वास रखता है।
IIMUN युवाओं को UN की डिप्लोमेसी सिखाता है। भागवत जी ने युवाओं से कहा कि ग्लोबल बनो, पर जड़ें मत भूलो। टेक्नोलॉजी को देश सेवा और समाज में लगाओ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने महिलाओं की भूमिका पर स्पष्ट किया कि समाज में महिलाओं और पुरुषों के अधिकार व कार्य समान और एक-दूसरे के पूरक हैं। संघ में महिलाओं के न होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है, क्योंकि राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना संघ के साथ ही हुई थी और अखिल भारतीय स्तर पर महिलाओं की पूर्ण सहभागिता व नेतृत्व रहता है। समाज में महिलाओं और पुरुषों का स्थान बराबर और एक-दूसरे का पूरक है।संघ के गठन के समय से ही राष्ट्र सेविका समिति सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।संघ से जुड़े विभिन्न संगठनों में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर समान क्षमता के साथ जिम्मेदारियां संभाल रही हैं।अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा जैसे महत्वपूर्ण मंचों पर भी महिलाओं की सक्रिय सहभागिता रहती है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का मुंबई के बांद्रा स्थित जियो कन्वेंशन सेंटर में जेन जी और जेन अल्फा के छात्रों के साथ हुआ सीधा संवाद देशव्यापी चर्चा का विषय रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया छात्र आंदोलनों के बाद संघ प्रमुख ने युवा पीढ़ी के विचारों को सीधे सुनने और समझने के लिए इस विशेष कार्यक्रम की पहल की।इस संवाद कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और संघ की बदलती रणनीति को गहराई से समझने मदद मिले गई । इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी की भावनाओं, उनकी सोच और उनकी चिंताओं को करीब से सुनना और समझना था । यह कार्यक्रम IIMUN द्वारा अपनी 15वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। संघ का यह प्रयास हालिया समय में बदलते सामाजिक-राजनीतिक परिवेश के बीच देश की सबसे युवा पीढ़ी से सीधे जुड़ने और उनके विचारों को सुनने की एक बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है।






