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डा० हेडगेवार जी के “एक प्रतिशत व तीन प्रतिशत, का रहस्य

डा० हेडगेवार जी के “एक प्रतिशत व तीन प्रतिशत, का रहस्य कृष्णानन्द सागर अंग्रेजों ने जिस तरह हिन्दू समाज को अन्दर से खोखला करने के लिए कांग्रेस की स्थापना की थी, उसी तरह उन्होंने हिन्दू समाज को हमेशा संकट में बनाए रखने के लिए १९०६ में मुस्लिम लीग की भी स्थापना की थी। मराठा शक्ति […]

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धर्म और पूजा-पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन पूरी इंसानियत एक ही है

धर्म और पूजा-पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन पूरी इंसानियत एक ही है सतीश शर्मा न्यू यॉर्क का *मैडिसन स्क्वायर गार्डन* है। वहां 29 अगस्त 2026 को RSS शताब्दी वर्ष के तहत एक विश्व – एक मानवता उत्सव’ “Universal Oneness Celebration / One World – One Humanity” कार्यक्रम हुआ था, जिसे American Hindus for Engagement

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Gen-Z की शिकायतें जायज, वे एंटी-नेशनल नहीं… छात्रों के प्रदर्शन पर बोले  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत

  Gen-Z की शिकायतें जायज, वे एंटी-नेशनल नहीं… छात्रों के प्रदर्शन पर बोले  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत   सतीश शर्मा  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने “युवाओं से संवाद कार्यक्रम” मे छात्रों के प्रदर्शन को लेकर अपनी बात रखी ।  भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन भी संवाद

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डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार एक विलक्षण व्यक्तित्व 

डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार एक विलक्षण व्यक्तित्व  सतीश शर्मा डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक और प्रथम सरसंघचालक थे।  उनका जन्म 1 अप्रैल 1889 (हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) को नागपुर, महाराष्ट्र के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार पिता का नाम

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देश के नागरिकों का औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होना आवश्यक; भारतीय विमर्श समस्त विश्व के कल्याण का विचार

देश के नागरिकों का औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होना आवश्यक; भारतीय विमर्श समस्त विश्व के कल्याण का विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक संगठन कार्य में विस्तार, राष्ट्रहित में समाज की सज्जन शक्ति की अधिक सक्रियता और सामाजिक समरसता के संकल्प के साथ सम्पन्न हो गई। बैठक के

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हिन्दू दर्शन भेद व तत्व 

हिन्दू दर्शन भेद व तत्व  सतीश शर्मा हिंदू दर्शन वह जीवन पद्धति है जो वेदों की सर्वोच्चता, कर्मफल, पुनर्जन्म और मोक्ष (मुक्ति) के सिद्धांतों पर आधारित है। इसके मुख्य गुणों में दार्शनिक स्वतंत्रता, विविधता, आत्मा की अमरता, और सत्व, रजस व तमस गुणों की तिकड़ी के माध्यम से संतुलन शामिल है। यह दर्शन दुःख से

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