अक्टूबर मास 2026 का पंचांग 

अक्टूबर मास 2026 का पंचांग 

सतीश शर्मा

भारतीय व्रतोत्सव अक्टूबर -2026

दि. 3- श्री महालक्ष्मी व्रत समाप्त, जीवित्पुत्रिका व्रत, कालाष्टमी,दि. 6- इंद्रा एकादशी व्रत,दि. 8- प्रदोष व्रत, मास शिवरात्रि,दि. 10-अमावस्या पुण्य, सर्वपितृ श्राद्ध,दि. 11-नवरात्र प्रारम्भ, अग्रसेन जयं.,दि. 14-विनायक चतुर्थी व्रत,दि. 15-उपांग ललिता जयंती,दि. 17-सरस्वती आवाहन, संक्रांति पुण्य,दि. 18-सरस्वती पूजन,दि. 19-सरस्वती बलिदान, दुर्गाष्टमी, महाष्टमी व्रत,दि.20-महानवमी, सरस्वती विसर्जन, नवरात्र पूर्ण, विजयादशमी,दि.22-भरत मिलाप, पापांकुशा एकादशी व्रत,दि.23-प्रदोष व्रतदि.25-सत्य व्रत, शरद् पूर्णिमा, कोजागरी व्रत,दि.26-कार्तिक स्नान प्रारम्भ, वाल्मीकि जयंती,दि. 29-करवा चौथ, गणेश चतुर्थी व्रत

मूल विचार अक्टूबर -2026 

दि. 5 को 23/09 से दि.7 को 21/40 तक, दि.15 को 4/03 से दि. 17 को 9/46 तक, दि. 24 को 20/31 से दि. 26 को 17/41 बजे तक गण्डमूल नक्षत्र हैं।

ग्रह स्थिति अक्टूबर – 2026

दि. 3 शुक्र वक्री,दि. 14 शुक्र पश्चिमास्त,दि. 17 तुला में सूर्य,दि. 24 बुध वक्री,दि. 29 बुध पश्चिमास्त,दि. 28 शुक्र पूर्वोदय,दि. 31 सिंह में गुरु

पंचक विचार अक्टूबर – 2026   

पंचक विचार -(धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से रेवती नक्षत्र तक) पंचको में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना मकान दुकान आदि की छत डालना चारपाई पलंग आदि बुनना,दाह संस्कार,बांस की चटाई दीवार प्रारंभ करना आदि स्तंभ रोपण तांबा पीतल तृण काष्ट आदि का संचय करना आदि कार्यों का निषेध माना जाता है समुचित उपाय एवं पंचक शांति करवा कर ही उक्त कार्यों का संपादन करना कल्याणकारी होगा ध्यान रहेगा  पंचर नक्षत्रों का विचार मात्र उपरोक्त विशेष कृतियों के लिए ही किया जाता है विवाह मंडल आरंभ गृह प्रवेश प्रवेश उपनयन आदि मुद्दों से तो पंचक नक्षत्रका प्रयोग शुभ माना जाता है पंचक विचार- दि. 21 को 07/00 से दि 25 को 19-21 बजे तक पंचक है | 

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227

भद्रा विचार अक्टूबर -2026

भद्रा काल का शुभ अशुभ विचार – भद्रा काल में विवाह मुंडन, गृह प्रवेश, रक्षाबंधन आदि मांगलिक कृत्य का निषेध माना जाता है परंतु भद्रा काल में शत्रु का उच्चाटन करना,स्त्री प्रसंग में,यज्ञ करना,स्नान करना,अस्त्र शस्त्र का प्रयोग,ऑपरेशन कराना, मुकदमा करना,अग्नि लगाना,किसी वस्तु को काटना,भैस,घोड़ा व ऊंट संबंधी कार्य प्रशस्त माने जाते हैं सामान्य परिस्थिति में विवाह आदि शुभ मुहूर्त में भद्रा का त्याग करना चाहिए परंतु आवश्यक परिस्थितिवश अति आवश्यक कार्य भूलोक की भद्रा ,भद्रा मुख छोड़कर कर भद्रा पुच्छ में शुभ कार्य कर सकते है ।

दि. 2 को 10/15 से 21/07 तक, दि. 5 को 14/59 से दि. 6 को 2/07 तक, दि. 8 को 22/16 से दि. 9 को 9/53 तक, दि. 14 को 12/17 से दि. 15 को 1/13 तक, दि. 18 को 8/28 से 21/39 तक, दि. 22 को 2/30 से 14/48 तक, दि. 25 को 11/56 से 22/53 तक, दि. 28 को 14/37 से दि. 29 को 1/06 तक, दि. 31 को 16/57 से दि. 1 नव. को 3/44 बजे तक भद्रा है।

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सर्वार्थ सिद्धि योग अक्टूबर -2026 

दैनिक जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शीघ्र ही किसी  शुभ मुहूर्त का अभाव हो,किंतु शुभ मुहर्त के लिए अधिक दिनों तक रुका ना जा सकता हो तो इन सुयोग्य वाले मुहर्तु  को सफलता से ग्रहण किया जा सकता है | इन से प्राप्त होने वाले अभीष्ट फल के विषय में संशय नहीं करना चाहिए यह योग हैं सर्वार्थ सिद्धि,अमृत सिद्धि योग एवं रवियोग | योग्यता नाम तथा गुण अनुसार सर्वांगीण सिद्ध कारक  है| 

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227

दिनांक प्रारंभ दिनांक समाप्त
05 00-13 05 23-09
06 06-21 06 22-17
14 06-25 15 04-03
18 12-48 19 06-28
19 15-38 20 06-28
25 19-21 26 06-33
27 15-39 29 06-35

चौघड़िया मुहूर्त 

चौघड़िया मुहूर्त, ज्योतिष में शुभ और अशुभ समय जानने की एक प्रणाली है। यह 24 घंटों को 8 भागों में विभाजित करता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया एक निश्चित अवधि का होता है, और इन्हें शुभ और अशुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है। 

चौघड़िया मुहूर्त क्या है – 24 घंटों को 16 भागों में बांटा जाता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया लगभग 1.30 घंटे का होता है। 

शुभ-अशुभ – कुछ चौघड़िया शुभ माने जाते हैं, जैसे अमृत, शुभ, लाभ, और चर। कुछ अशुभ माने जाते हैं, जैसे रोग, उद्वेग, और काल। चौघड़िया का उपयोग शुभ कार्यों, जैसे विवाह, यात्रा, और व्यापार शुरू करने के लिए शुभ समय जानने के लिए किया जाता है। 

चौघड़िया के प्रकार – दिन का चौघड़िया,सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को दिन का चौघड़िया कहा जाता है। 

रात का चौघड़िया,सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक के समय को रात का चौघड़िया कहा जाता है। 

चौघड़िया का महत्व – चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने के लिए एक अच्छे समय का चयन करने के लिए किया जाता है। यह माना जाता है कि यदि कोई कार्य शुभ चौघड़िया में शुरू किया जाता है, तो उसके सफल होने की संभावना अधिक होती है।   

सुर्य उदय- सुर्य अस्त अक्टूबर -2026   

दिनांक  01  05  10  15 20  25  30
उदय  06-17 06-19 06-20 06-23 06-29 06-31 06-33
अस्त  18-04 17-59  17-54  17-48  17-43  17-38  17-35

 राहू काल 

 राहुकाल -राहुकाल दक्षिण भारत की देन है,दक्षिण भारत में राहु काल में कृत्य करना अच्छा नहीं माना जाता, राहु काल में शुभ कृतियों में वर्जित करने की परंपरा अब हमारे उत्तरी भारत में भी अपनाने लगे हैं राहुकाल प्रतिदिन सूर्यादि वारों में भिन्न-भिन्न समय पर केवल डेढ़ डेढ़ घंटे के लिए घटित होता है |

संक्रांति विचार अक्टूबर – 2026

इस मास की संक्रान्ति तुला आश्विन शुक्ल सप्तमी शनिवार दि. 17 अक्टूबर प्रदोष काल 19/50 बजे 30 मु. बैठी उत्तर गमन, ईशान दृष्टि किये वरुण मण्डल में प्रवेश करेगी। गतवार 3, गत नक्षत्र 4, वार नाम मलेच्छ राक्षस सुखी, नक्षत्र नाम घोरा-शुद्र सुखी। शनिवारी संक्रान्ति होने से कुछ वर्षा, सभी रस मन्दे, तिलहन, धातु, अन्न पदार्थ तेज होंगे।

आकाश लक्षण अक्टूबर – 2026

मास में ग्रहचाल-नाड़ी परिवर्तन, शुक्रास्त, शुक्र वक्री, बुध वक्री, बुधास्त, शुक्रोदय से जहां-तहां वर्षा होगी। उत्तरी भारत में मौसम में परिवर्तन होगा। रात के तापमान में गिरावट आयेगी। पहाड़ी उच्च क्षेत्रों में ठण्ड का प्रभाव प्रारम्भ होगा। मैदानी स्थानों में रात में मीठी-मीठी ठण्डक प्रारम्भ होगी।

  मांगलिक दोष विचार परिहार

वर अथवा कन्या दोनों में से किसी की भी कुंडली में 1,4,7,8 व 12 भाव में मंगल होने से ये मांगलिक माने जाते हैं,मंगली से मंगली के विवाह में दोष न होते हुए भी जन्म पत्रिका के अनुसार गुणों को मिलाना ही चाहिए यदि मंगल के साथ शनि अथवा राहु केतु भी हो तो प्रबल मंगली डबल मंगली योग होता है | इसी प्रकार गुरु अथवा चंद्रमा केंद्र हो तो दोष का परिहार भी हो जाता है |इसके अतिरिक्त मेष वृश्चिक मकर का मंगल होने से भी दोष नष्ट हो जाता है | इसी प्रकार यदि वर या कन्या किसी भी कुंडली में 1,4,7,9,12 स्थानों में शनि हो केंद्र त्रिकोण भावो में शुभ ग्रह, 3,6,11 भावो में पाप ग्रह हों तो भी मंगलीक दोष का आंशिक परिहार होता है, सप्तम ग्रह में यदि सप्तमेश हो तो भी दोष निवृत्त होता है |

स्वयं सिद्ध मुहूर्त

 स्वयं सिद्ध मुहूर्त चैत्र शुक्ल प्रतिपदा वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय तृतीया आश्विन शुक्ल दशमी विजयदशमी दीपावली के प्रदोष काल का आधा भाग भारत में से इसके अतिरिक्त लोकाचार और देश आचार्य के अनुसार निम्नलिखित कृतियों को भी स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है बडावली नामी देव प्रबोधिनी एकादशी बसंत पंचमी फुलेरा दूज इन में से किसी भी कार्य को करने के लिए पंचांग शुद्धि देखने की आवश्यकता नहीं है परंतु विवाह आदि में तो पंचांग में दिए गए मुहूर्त व कार्य करना श्रेष्ठ रहता है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी – 9312002527,9560518227

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – पंडित जी 9312002527

आओ नवयुग की प्रतिमा मे करें प्रतिष्ठा प्राण की ।

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