पंचांग के अनुसार जन्मदिन क्यों मनाएं ?

पंचांग के अनुसार जन्मदिन क्यों मनाएं ?

सतीश शर्मा 

 पंचांग  के अनुसार जन्मदिन मनाना हमारे जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मकता और चेतना को बढ़ाता है। आमतोर पर हम  लोग अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार तारीख देखकर जन्मदिन मनाते हैं, लेकिन सनातन संस्कृति में जन्म तिथि,नक्षत्र,वार,करण ओर योग का विशेष महत्व है। जिस प्रकार हम भगवान राम का जन्मदिन ‘राम नवमी’ और श्री कृष्ण का जन्मदिन ‘कृष्ण जन्माष्टमी’ के रूप में तिथि के अनुसार मनाते हैं, उसी प्रकार हमें अपना जन्मदिन भी पंचांग के अनुसार ही मनाना चाहिए। 

अब सवाल उठता है की पंचांग के अनुसार जन्मदिन क्यों मनाएं ?  पंचांग के अनुसार, आपकी जन्म तिथि पर चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति ठीक वैसी ही होती है जैसी आपके जन्म के समय थी। ज्योतिष  शास्त्रों के अनुसार, जन्म तिथि वाले दिन व्यक्ति का आभामंडल  सबसे सघन और सक्रिय होता है, जिससे शुभ तरंगों को ग्रहण करना आसान हो जाता है । शरीर में सात्विक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

पंचांग के अनुसार जन्मतिथि पर सात्विक अनुष्ठान करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक और मानसिक चेतना का विकास होता है व उसे नई ऊर्जा प्राप्त होतो है ।  शास्त्रों के अनुसार तिथि पूजन से व्यक्ति की आयु (आयूं), यश और बल में वृद्धि होती है।चंद्रमा की स्थिति के अनुकूल सात्विक तरंगें प्राप्त होती हैं। इससे ग्रह-नक्षत्रों के दोष शांत होते हैं और ईश्वर व बड़ों का आशीर्वाद मिलता है। पंचांगीय विधि से आरती और पूजन करने पर शरीर के सूक्ष्म ऊर्जा स्त्रोत और नाड़ियाँ जागृत होती हैं।

धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा जन्म नक्षत्र के दिन पूजा करने से वर्षभर के लिए संकट टलते हैं और मनोवांछित फल मिलता है।  इस दिन इष्टदेव, कुलदेवता की पूजा तथा हवन व दान-पुण्य करने से पितृ और भगवान का आशीर्वाद पूरे वर्ष बना रहता है।

सनातन रीति से जन्मदिन मनाने की विधि – वैदिक परंपरा के अनुसार अपने विशेष दिन को मंगलमय बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाएं – सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर औषधीय या सुगंधित तेल से शरीर की मालिश करें और स्नान करें। स्नान के बाद शुद्ध, नए या स्वच्छ पारंपरिक भारतीय वस्त्र धारण करें। घर के माता-पिता, दादा-दादी और गुरुजनों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें और उनसे हल्दी का तिलक लगवाएं । अपने कुलदेवता या ईष्ट देव का पूजन करें। संभव हो तो महादेव का दुग्ध से रुद्राभिषेक करें या सत्यनारायण की कथा सुनें। पाश्चात्य संस्कृति की तरह दीपक बुझाने (मोमबत्ती फूंकने) के बजाय दीपक जलाएं। जितने वर्ष पूरे हुए हों, उतने दीपक भगवान के सामने प्रज्वलित करें। अगर ऐसा संभव ना हो एक दीपक में उतनी बाती रख कर प्रज्वलित करें । परिवार  की महिलाओं द्वारा आपकी आरती उतारी जानी चाहिए और सिर पर अक्षत (चावल) छिड़क कर मंगल कामना करनी चाहिए । अपने से छोटे बच्चों को प्यार करे ।  इस दिन गौशाला जाकर गाय को चारा खिलाएं, जरूरतमंद बच्चों को भोजन, वस्त्र या पुस्तकें दान करें। सनातन धर्म में दीपक को ज्ञान और जीवन का प्रतीक माना जाता है, इसलिए फूंक मारकर दीपक बुझाना अशुभ माना जाता है। 

यदि आप चाहें, तो मुझे अपनी जन्मतिथि, जन्म का समय और स्थान बताएं ताकि मैं आपकी जन्म तिथि पंचांग के अनुसार बता सकूं। पंचांग के अनुसार जन्म तिथि जानने के लिए संपर्क करे पंडित जी 9312002527, 9560518227 

 

 

 

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