दलितों को भृमित करती कॉंग्रेस
ललित शंकर हरिद्वार 

भारत के राजनीतिक लोकतंत्र में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले दलित समाज की बहुत बड़ी भूमिका हैं।आजादी के बाद से बिना किसी स्वार्थ के लंबे समय तक कांग्रेस को वोट करने वाले दलित समाज के साथ कांग्रेस ने धोखा ही किया है।कांग्रेस आज भी भोलेवाले दलितों के साथ छल करने से बाज नही आ रही।अभी राज्यसभा में पेपर लीक रोकथाम विधेयक पर चर्चा के समय कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हाथ मे मनु स्मृति लेकर आये और बयानबाजी करते हुए मनुस्मृति को दलित विरोधी बताकर राजनीति करने लगे।छात्रहित के विषय ,पेपर लीक पर चर्चा न करते हुए कांग्रेसी अध्यक्ष खड़गे ने दलितों को राजनीतिक रूप से भृमित करने के लिए मनुस्मृति की चर्चा शुरू कर दी।मनुस्मृति दिखाते हुए खड़गे कहने लगे कि इसमे लिखा है कि कोई शुद्र अगर वेदपाठ सुन ले तो उसके कानों में स्वर्ण पिघला कर डाल दिया जाता था,कोई मंत्र बोल दे तो उसकी जीभ काट ली जाती थी।एक सांसद ने उनके इस वक्तव्य का खंडन करते हुय कहा कि ये निराधार आरोप हैं।और अगर ये सत्य भी हो तो उसका पेपर लीक और सरकार से तो कोई मतलब नही।हां उसका मतलब है दलितों को भृमित करके कांग्रेस के साथ वोट के लिये जोड़ना। दलितों के झूठे हितैषी बनकर कांग्रेस अपने शुरुआती समय से ही उनके साथ छल करती आई है।पिछले चुनाव में कांग्रेस के ही नेतृत्व में विपक्षी दल संविधान को लेकर सड़को पर उतरा।बार बार बोल रहा कि संविधान खतरे में है इसलिए हमें वोट दो।जिसके कारण कुछ दलित भृमित भी हुए।लेकिन समझने का विषय है कि संविधान कभी बदल सकता है क्या।संविधान बदलना इतना आसान होता तो सौ से अधिक बार अपने हित मे संविधान में संशोधन करने वाली कांग्रेस बदल चुकी होती।खुद को दलित हितेषी बताने वाली कांग्रेस से दलित समाज को पूछना चाहिए कि आज दलित दलित चिल्लाने वाले उन समय दलित नेता डा अंबेडकर जी का विरोध क्यो करती थी।1952,1954 में क्यो अंबेडकर जी का विरोध करके कांग्रेस ने बड़ी चतुराई उनको योजनात्मक रूप से हराया था।यंहा तक कि 1946 में संविधान सभा के लिये हुए चुनाव में भी कांग्रेस ने अंबेडकर जी को हराकर अपना व्यक्ति चुना था।बाद में अंबेडकर बंगाल से जीतकर आये थे।आजादी के बाद लंबे समय तक देश पर राज करने वाली कांग्रेस ने एक लंबी शृंखला में भारत रत्न दिए।यंहा तक कि कांग्रेस परिबार के राजीव गांधी ने तो जीवित रहते हुय ही भारत रत्न स्वयं ही ले लिया था।अंबेडकर जी को क्यो नही दिया।उनको भारत रत्न राष्ट्रीय मोर्चे की सरकार ने दिया।जिसको भाजपा का भी समर्थन था।कांग्रेस में दलितों के बड़े नेता बाबू जगजीवनराम के साथ जो कांग्रेस ने किया वो सब जगजाहिर है।दो बार उनको प्रधानमंत्री बनने का अवसर आया दोनों बार कांग्रेस ने उनके स्थान पर किसी ओर को बना दिया।आज दलितों की राजनीतिक लाभ के लिये चिंता करने वाली कांग्रेस ने अपने साठ वर्ष के कार्यकाल में क्या कार्य किया।बस एक काम कांग्रेस ने दलितों के लिये किया,जो आज भी कर रही है वो है दलित समाज को अपने राजनीतिक लाभ के लिये हिन्दू समाज से दूर करने का प्रयास।दलित समाज को कांग्रेस के घड़ियाली आंसुओ को समझना होगा,और ध्यान करना होगा कि जो कांग्रेस महान दलित समाज सुधारक डा अंबेडकर जी व दलित नेता बाबू जगजीवनराम जी के साथ न्याय नही कर पाई हो वो आपके साथ क्या करेगी।कांग्रेस की सोच अंग्रेजी शासन वाली स्पष्ट है फूट डालो राज करो।इसलिये कभी संविधान लेकर, तो कभी रामायण लेकर और अब मनुस्मृति लेकर दलितों को भृमित कर रही है।कांग्रेस की भूल है ये कि वो आज भी दलितों को पहले जैसा समझ रही है।आज का दलित समझदार हो गया है,वो स्वयं का,समाज का व देश का अच्छा बुरा समझ सकता है।इसलिय दलितों को अपने राजनीतिक लाभ के लिये भृमित करना बंद करो।





