शिवलिंग पूजा का महत्व व प्रकार

शिवलिंग पूजा का महत्व व प्रकार 

सतीश शर्मा

शिव को गुरु रूप माना गया है और गुरु न स्त्रीलिंग, न पुलिंग और न ही नपुषकलिंग है। संस्कृत में लिंग का अर्थ है प्रतीकात्मक चिन्ह, प्रमाण’ या ‘स्वरूप’ होता है। पिंड या लिंग संपूर्ण सृष्टि के सृजन, पालन और संहार की शक्ति का प्रतीक है। जैसे परमाणु में न्यूट्रॉन, प्रोटोन इलेक्ट्रॉन तीनों हैं उसमें सृजन, पालन और संहार क्षमता हैं। पिंड या लिंग की उपासना ही परम ब्रह्म की उपासना है। पिंड में भी आकृति है इसलिए लिंग से ऊपर उठकर आकर से निराकार ज्योति स्वरूप ज्योतिर्लिंग की उपासना अनंत ब्रह्मांडीय स्वरूप की पूजा कर शिवोहम होना है। मूर्ति से पिंड उपासना पर आना पिंड से ज्योति उपासना पर आना साकार से निराकार की उपासना है।

 मैं शिव का हूँ शिव मेरे हैं। भगवान शिव की निराकार और साकार अभिव्यक्ति का पवित्र प्रतीक है शिवलिंग ।  ‘शिव’ का अर्थ है ‘कल्याणकारी’ और ‘लिंग’ का अर्थ है ‘प्रतीक’ या ‘चिह्न’। शिवलिंग पूरे ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करता है। यह ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना जाता है। यह ईश्वर के निराकार, अनंत और आदि-अंतहीन स्वरूप को दर्शाता है। इसमें ब्रह्मांड की समस्त निर्माणकारी और संहारकारी ऊर्जा समाहित है। 

शिवलिंग की बनावट में तीन भाग हैं एक पूर्ण शिवलिंग मुख्य रूप से तीन भागों से मिलकर बनता है, जो त्रिदेवों का प्रतीक हैं, सबसे नीचे का हिस्सा जो जमीन के अंदर होता है, यह सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा का प्रतीक है। बीच का गोलाकार हिस्सा, जो सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु का प्रतीक है। सबसे ऊपर का अंडाकार हिस्सा जिसकी पूजा की जाती है, यह भगवान शिव का प्रतीक है। शिवलिंग की पूजा करने से घर और मन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। शिवजी को शांत और शीतल रखने के लिए शिवलिंग पर जल, दूध, और शहद चढ़ाया जाता है। पूजा में बेलपत्र, धतूरा, और भस्म का विशेष महत्व है। शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती है। जल निकासी की जगह (सोमसूत्र) को लांघा नहीं जाता। शिवलिंग केवल एक पत्थर की मूर्ति नहीं है, बल्कि यह परम चेतना और आध्यात्मिक जागृति का जीवंत माध्यम है।

शिवपुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शिवलिंग मुख्य रूप से 6 प्रकार के होते हैं। इसके अतिरिक्त, स्थापना और निर्माण सामग्री के आधार पर भी इनका वर्गीकरण किया जाता है। प्रमुख रूप से मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग के प्रकार इस प्रकार हैं। उत्पत्ति और स्थापना के आधार पर शिवलिंग के 6 मुख्य प्रकार है । 

स्वयंभू लिंग – जो प्राकृतिक रूप से पृथ्वी से प्रकट होते हैं, जैसे नर्मदेश्वर शिवलिंग।

देव लिंग – देवताओं द्वारा स्थापित और पूजे जाने वाले शिवलिंग।

आसुर लिंग – असुरों (जैसे रावण) द्वारा अपनी भक्ति के लिए स्थापित किए गए शिवलिंग।

अर्शलिंग – प्राचीन काल में ऋषियों-मुनियों द्वारा स्थापित शिवलिंग।

पुराणलिंग – पौराणिक कथाओं और ग्रंथों में वर्णित अति प्राचीन शिवलिंग।

मनुष्य लिंग – आम मनुष्यों द्वारा मंदिरों या घरों में स्थापित किए जाने वाले शिवलिंग।

गतिशीलता के आधार पर शिवलिंग के 2 प्रकार है । 

चल शिवलिंग – इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है (जैसे पीतल, पारद या मिट्टी के छोटे शिवलिंग)।

अचल (स्थिर) शिवलिंग – इन्हें मंदिरों में भारी पत्थरों से स्थायी रूप से स्थापित किया जाता है।

निर्माण सामग्री के आधार पर 5 मुख्य तत्व है भगवान विश्वकर्मा द्वारा बताए गए तत्वों के आधार पर इन्हें पाँच श्रेणियों में बाँटा गया है –

शैलजा शिवलिंग –  पत्थरों से निर्मित।

रत्नजा शिवलिंग – स्फटिक, हीरा, माणिक, या नीलम जैसे कीमती रत्नों से बने।

धातुजा शिवलिंग – सोना, चाँदी, ताँबा या पीतल जैसी धातुओं से बने।

दारुजा शिवलिंग – विशेष प्रकार की लकड़ियों (जैसे चन्दन) से निर्मित।

मृत्तिका शिवलिंग – मिट्टी या भस्म से क्षणिक पूजा के लिए बनाए गए पार्थिव शिवलिंग।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग सबसे पवित्र और मुख्य तीर्थ माने जाते हैं, जहाँ महादेव स्वयं ज्योति रूप में प्रकट हुए थे। शिवपुराण के अनुसार, द्वादश ज्योतिर्लिंगों के नाम और उनके मुख्य स्थान निम्नलिखित हैं –

12 ज्योतिर्लिंगों की सूची –

1 सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात प्रभास पाटन, वेरावल (गीर सोमनाथ)। 

2 मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश श्रीशैलम, कर्नूल जिला। 

3 महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश उज्जैन (यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है)। 

4 ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश मंधाता द्वीप, खंडवा (नर्मदा नदी के तट पर)। 

5 केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड केदारनाथ, रुद्रप्रयाग (हिमालय की गोद में)। 

6 भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र डाकिनी, पुणे के पास।

 7 काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश वाराणसी (बनारस), गंगा नदी के तट पर

8 त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र त्र्यंबक, नासिक (गोदावरी नदी के पास)

9 वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग झारखंड देवघर (बाबाधाम)

10 नागेश्वर ज्योतिर्लिं गगुजरात दारुकावन, द्वारका के पास

11 रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु रामेश्वरम द्वीप (भगवान राम द्वारा स्थापित) 

12 घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र वेरुल (एलोरा गुफाओं के पास), औरंगाबाद / छत्रपति संभाजीनगर

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