FCRA – पश्चिमी विस्तारवादी शक्तियों के विरुद्ध भारत का युद्धघोष है !
सतीश शर्मा 
इस समय देश को FCRA बिल समझाने का समय है क्योकि यह केवल एक सामान्य बिल भर नही है यह पश्चिमी विस्तारवादी शक्तियों के विरुद्ध भारत का युद्धघोष है ! FCRA बिल मे ऐसा क्या है कि अमेरिकी सांसद ने यहाँ तक कह दिया है कि भारत सरकार इस बिल को पास करती हैं तो इस से भारत और अमेरिका के संबंध प्रभावित हो सकते है? देखो, ये लोग जब कुछ बोलते हैं तो बहुत सोच समझकर बोलते हैं, हमारे यहाँ जैसा मामला नही होता कि कैमरा देखा और कुछ भी बकना शुरू कर दिया… युरोपियन व अमरीकन सामान्यत बाइट खोर नही होते है! वे कम बोलते हैं, संकेतो मे बोलते हैं… समझने वाले समझ जाते है कि वे उनका क्या भावार्थ है!
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) गृह मंत्रालयद्वारा प्रशासित एक भारतीय कानून है । यह कानून यह नियंत्रित करता है कि समूह, गैर-लाभकारी संगठन और कंपनियां अन्य देशों से धन कैसे प्राप्त करती हैं और उसका उपयोग कैसे करती हैं। इस कानून का उद्देश्य विदेशी धन को राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित को नुकसान पहुंचाने से रोकना है। इस कानून के अंतर्गत विदेशी निधि प्राप्त करने के लिए समूहों को सरकार के साथ पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण पांच साल के लिए वैध है और इसे नवीनीकृत करना आवश्यक है। समूहों को प्राप्त धन पर वार्षिक रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। सरकार ने जून 2026 में संशोधित एफसीआरए नियमों को अधिसूचित किया और अगस्त 2026 में एक संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। नए प्रस्ताव इस बात पर केंद्रित हैं कि यदि किसी संगठन का लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है, सरेंडर कर दिया जाता है या नवीनीकृत नहीं किया जाता है तो परिसंपत्तियों और निधियों का प्रबंधन कैसे किया जाएगा। अभी इस कानून मे संसोधन नहीं हो पाया यह बिल J P C मे चला गया ।
एक रिपोर्ट बताती हैं कि केवल 3 सालों में भारत में बाहरी देशों से लगभग 55000 करोड़ रुपये NGO के पास आये हैं! क्या होता होगा इस पैसे से? इस पैसे से चर्च बनते हैं, गरीबो को लालच देकर उनका धर्मान्त्रण किया जाता है, देश के विकास को रोकने के लिए छोटे छोटे स्तर पर आंदोलन किये जाते है, इसी पैसे से कोर्ट और अफसरशाही मैनेज की जाती हैं और मर्जी के काम निकलवाये जाते है, कुछ खास मामलो मे कानूनी सहायता या कानूनी अडंगे डाले जाते है! इसी पैसे से सेलेब्रिटीज खरीदे जाते है और फिर उनका इस्तमाल देश विरोधी कामो मे किया जाता है… जैसे किसी मामले को गरमाना… किसी आंदोलन के लिए हवा बनाना आदि!
NGO का गिरोह देश में एक समानांतर सरकार चला रहा है! यह इतना शक्तिशाली और इतना संगठित इकोसिस्टम है कि आज तक किसी सरकार की हिम्मत नही हुई कि इन पर खुलकर हाथ डाल दे! अतीत में थोड़ी बहुत कोशिश मनमोहन सरकार ने करी थी पर कुछ ठोस नही कर पाए, मोदी सरकार ने एक बार बहुत सारी देशी और विदेशी NGO को प्रतिबंधित कर के एक ठोस शुरुआत जरूर करी थी पर तभी से देश में आंदोलनों की बाढ़ सी आ गई है! FCRA बिल इन NGO के ताबूत में आखिरी कील ठोकने की तैयारी है!
यह गिरोह कितना शक्तिशाली है इस बात का अंदाजा लगाना है तो ये समझिये कि मानसून सत्र में FCRA बिल पेश किया जाना था उस के केवल एक महीने पहले रातों रात एक कॉकरोच पार्टी और आंदोलन खडा कर दिया जाता हैं! देश में दंगो जैसे हालात बना दिये जाते हैं! चूँकि FCRA विवादित है इसीलिए सरकार इस बिल को वापस ले लेती है, संभावना है कि सरकार यथाशीघ्र इस बिल को लाने वाली है! कॉकरोच आंदोलन एक झलक है कि हराम का पैसा क्या क्या करवा सकता हैं! 55000 करोड़ कोई मामूली रकम नही होती, एक बार गूगल करिये कि देश की राजधानी का एक साल का बजट कितना है, तब शायद आपको अनुभव हो कि हम कैसे बारूद के ढेर पर बैठे हैं! राहुल गाँधी का वो बयान तो याद ही होगा कि देश में कैरोसीन छिड़क दी गई है बस आग लगाना बाकी है… ये NGO का गिरोह और बाहर से आने वाला अकूत धन ही वो कैरोसीन है वो बारूद है जिसमे बाहरी शक्तिया जब चाहे तब आग लगा सकती है!
देश में केवल आंदोलन नही हो रहे है बल्कि हिंसक और उग्र आंदोलन हो रहे हैं! केवल सरकार को गालियाँ नही दी जा रही हैं… सुरक्षा बलों को भी गाली दी जा रही है उकसाया जा रहा है! और… देश में आंदोलनों की बाढ़ आ गई है, लगभग हर बड़े चुनाव से पहले या संसद सत्र के पहले बवाल खडा कर दिया जाता हैं ताकि संसद के माध्यम से देश में कोई विकास कार्य न हो सके देश आगे न बढ़ सके!
इस सारी दुर्दशा के मूल मे NGO का सघन तंत्र और उनकी आर्थिक विष बेल है! हमारे लोग तो बिकाऊ है ही यह पीड़ा तो है ही पर इन बिकाऊ लोगो को ढूंढकर एक झंडे के नीचे एकत्रित करके उन्हे राष्ट्र ध्वंस मे लगाना… यह काम NGO गिरोह करता है और विदेश से आने वाला पैसा करता है! एक राष्ट्र के रूप मे अपने अस्तित्व की रक्षा करनी है और अपनी संप्रभुता को अखंड रखना है तो यह पाप की कमाई बंद करवानी होगी, NGO पर नकेल कसे बिना देश की एकता अखंडता और संप्रभुता को बचाया नही जा सकेगा! इन्ही सारी बीमारियों के उपचार के लिए FCRA बिल लाया जा रहा है!
मैं सभी राष्ट्रप्रेमियो से आग्रह करता हूँ कि FCRA बिल को अपना समर्थन व सहयोग प्रदान करिये और अन्य लोगो को भी इस विषय पर जागृत करिये! यह मोदी और अमित शाह की लड़ाई नही है यह देश की लड़ाई है! “सतीश शर्मा जी द्वारा संकलित व लिखित ।”






