भगवा से विरोध क्यों
ललित शंकर हरिद्वार 
भारत की आस्था का केंद्र भगवा रंग त्याग,बलिदान और शौर्य का प्रतीक है।देश मे भगवा के प्रति गहरी आस्था व शृद्धा है।इसके बाबजूद कुछ लोग भगवा का विरोध व अपमान करने से बाज नही आ नही आ रहे।भगवा का सबसे ज्यादा विरोध देश की सबसे प्राचीन राजनीतिक पार्टी कांग्रेस है।जो अपने प्रारम्भ समय से ही भगवा का विरोध करती आ रही है।नेहरू,इंदिरा, राजीव ,सोनिया और अब राहुल इन सभी के नेतृत्व में लगातर भगवा का अपमान व विरोध हो रहा है।अभी भारतीय हॉकी टीम की ड्रेस का रंग नीले से भगवा करते ही कांग्रेस भगवा विरोधी रूप निकलकर सामने आ गया।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसपर कड़ा विरोध जताते हुए कहा है कि इस निर्णय पर आपत्ति जताई है।इनके अलावा पूर्व हॉकी खिलाड़ी जो कंही न कंही कांग्रेसी विचार से जुड़े हैं उन्होंने भी भगवा रंग की जर्सी का विरोध किया है।पूर्व डिफेंडर परगट सिंह ने कहा है कि देश मे हर चीज का भगवाकरण हो रहा है,ये चिंताजनक है,दुर्भाग्यपूर्ण है,पूर्व हॉकी कप्तान वीरेन रसकीन्हा ने कहा है कि हॉकी टीम की ड्रेस बदलना शर्मनाक है,पूर्व कप्तान व कोच वी भास्कर ने आलोचना करते बकवास करार दिया है। जबकि हाकी इंडिया ने नीली ड्रेस से भगवा करने का तर्क बताते हुए बताया है कि पिच ओर किट एक रंग के होने के कारण खिलाड़ी एक दूसरे को सही से देख नही पाते थे,इसलिए कोच व खिलाड़ियों ने पीले व भगवा रंग का सुझाव दिया था।जिसपर बहुत ध्यानपूर्वक विचार करने के बाद केसरिया रंग किया गया।उन्होंने केसरिया रंग को पराक्रम,बलिदान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बताते हुए इसके चयन की भी बात कही है।ऐसा कोई पहली बार नही हुआ है हाकी टीम की ड्रेस का रंग बदला गया हो।इससे पहले 2014 विश्वकप में पीला रंग किया गया,और 2018 में आसमानी नीला रंग किया गया।अगर ध्यान देंगे तो स्पष्ठ होगा कि कांग्रेस सहित इन सभी को रंग बदलने से आपत्ति नही है,आपत्ति है तो बस केसरिया रंग से।अगर हॉकी इंडिया इसका रंग हरा भी कर देती तब भी इन्हें कोई आपत्ति नही होती।बस केसरिया नही होना चाहिए।क्योंकि कांग्रेस को केसरिया के विरोध करने का संस्कार पूर्वजों से मिला है।जवाहरलाल नेहरू ने आजादी के बाद कहा था कि मैं भारत की एक इंच भूमि पर भी भगवा झंडा नही लगने दुँगा।इंदिरा गांधी ने तो केसरिया का अनेकों बार अपमान किया,यंहा तक केसरिया पहने साधु संतों पर गोलियां चलवाई थी।जिसमे कई संत मारे गए थे।इसी कांग्रेस ने इस्लामिक आतंकवाद के बचाव के लिये भगवा को आतंकी घोषित कर दिया था।जिसमें भगवा पहनने वाली साधी प्रज्ञा ठाकुर को शारिरिक व मानसिक रूप से कितना टॉर्चर किया सब जगजाहिर है।इसी कांग्रेस ने भगवा धारण करने वाले संतो को लक्षित करके उनके खिलाफ कार्यवाही की थी।भगवा के अपमान में तो आज भी कांग्रेस सहित विपक्ष पीछे नही है।अभी सदन के बाहर बिहार के हिस्ट्रीशीटर से नेता बना पप्पू यादव ने केसरिया पहनकर राम जी का फोटो जमीन पर व सपा नेता के पैरों में रखकर जो नाटक करके अपमान किया कांग्रेस ने बड़े उत्साह से उसका समर्थन व स्वागत किया है।राम का विरोध,रामसेतु का विरोध,राम मन्दिर का विरोध,राम के उदघोष का विरोध करने वाली कांग्रेस आज भगवा रंग का विरोध भी करती दिखाई दे रही है।भारतीय हॉकी टीम के पूर्व महान गोलकीपर रहे पीआर श्रीजेश ने इन सबको जबाव देते हुय कहा है कि अगर खिलाड़ियों व कोच ने किसी भी रंग पर सहमति जता दी तो फिर उसका विरोध करना खेल भावनाओ के खिलाफ है,उन्होंने कहा कि समझ नही आ रहा कि इतना विवाद क्यो हो रहा है।जबकि हमारी ट्रेनिंग किट भी केसरिया रंग की थी।अगर भारतीय क्रिकेट टीम को भी हम देखेंगे तो उसकी नीली ड्रेस पर भगवा रंग का लेखन व पट्टी दिखाई देती है।जो खिलाड़ी मैच में नही खेलने उनको भी टीशर्ट भगवा रंग की पहनाई जाती है।इन सबके बाबजूद भारत की एक पहचान भगवा से भी है।दुनिया के सभी देश भारतीय संस्कृति का सम्मान करते हैं,जिसमे भगवा भी आता है।सूरज का रंग सूर्योदय और सर्यास्त के समय भगवा ही होता।और पूरे देश मे सूर्य का भगवा रूप को ही पूजा जाता है।यज्ञ की जो अग्नि निकलती है वो भी भगवा ही होती है।केवल एक मजहब को खुश करके वोटों के लालच में भारत की पहचान केसरिया का विरोध करना ठीक नही है।भारत लोगो को अब ऐसे विरोध पर जबाव देना चाहिए।और पूछना चाहिए कि आखिर कब तक देश के बहुसंख्यक समाज की भावनाओं के साथ खिलबाड़ किया जाएगा।






