राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा – गौरव का इतिहास, राष्ट्र की महिमा
सतीश शर्मा 
जन गण मन का प्रतीक है हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा । राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सिर्फ एक कपड़े का टुकड़ा नहीं है। ये *130 करोड़ भारतीयों की आत्मा, शौर्य और एकता* का प्रतीक है। यह हमारी एकता का प्रतीक है,भारत में सैकड़ों जाति, धर्म, भाषा हैं। लेकिन जब तिरंगा लहराता है तो सब एक हो जाते हैं। केसरिया, सफेद, हरा – तीनों रंग मिलकर यही बताते हैं कि अलग-अलग होकर भी हम एक हैं। सीमा पर जो जवान शहीद होते हैं, उनके ताबूत पर तिरंगा लपेटकर लाया जाता है। ये झंडा बताता है कि *उनकी कुर्बानी व्यर्थ नहीं गई*। कारगिल से लेकर गलवान तक, तिरंगे के लिए लाखों जानें दी गई हैं। ओलंपिक में जब कोई भारतीय गोल्ड जीतता है और तिरंगा ऊपर जाता है, राष्ट्रगान बजता है – उस पल पूरी दुनिया में भारत का सिर ऊंचा होता है। विदेश में फंसे भारतीयों को जब दूतावास तिरंगे के साथ बचाता है, तो उसे *”ऑपरेशन तिरंगा”* कहा जाता है।इसकी शान अनेकों गीत लिखे गए जैसे – “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा” (जिसे श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ ने लिखा है) इसका मुख्य सारांश यह है कि हमारा तिरंगा झंडा पूरे विश्व में विजय और शान का प्रतीक है, जो देशवासियों में शक्ति, प्रेम, साहस और अटूट राष्ट्रप्रेम की भावना जगाता है। तिरंगे को *पिंगली वेंकैया* ने डिज़ाइन किया था। वो आंध्र प्रदेश के एक किसान और स्वतंत्रता सेनानी थे। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा की बैठक में इसे भारत के *राष्ट्रीय ध्वज* के रूप में अपनाया गया। ये आज़ादी से ठीक 24 दिन पहले हुआ था। 22 जुलाई 1947 को इसे अपनाकर हमने तय किया कि अब हम गुलाम नहीं, स्वतंत्र हैं। झंडा संहिता कहती है की तिरंगे को हमेशा सम्मान देना है। ये जमीन पर नहीं गिरना चाहिए, फटना नहीं चाहिए।
डिज़ाइन के 3 रंग और मतलब केसरिया ताकत और साहस,सफेद शांति और सच्चाई,हरा*: समृद्धि और उर्वरता,बीच में नीला अशोक चक्र*: 24 तीलियों वाला धर्म और गति का प्रतीक। पहले इसमें चरखा था।ये रंग हमारी प्रेरणा का स्रोत है केसरिया* – हमें निडर बनाता है,सफेद* – हमें सच और शांति का रास्ता दिखाता है,हरा* – हमें मेहनत और विकास के लिए प्रेरित करता है,24 तीलियों वाला अशोक चक्र* – हमें आगे बढ़ते रहने और धर्म पर चलने की सीख देता है। तिरंगे की महिमा यही है – ये हमें याद दिलाता है कि हम कहां से आए हैं, और हमें कहां जाना है। 15 अगस्त और 26 जनवरी को जब ये लहराता है, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
1906 मे पहला तिरंगा कलकत्ता में बना उसमे तीन रंग लाल, पीला, हरा बीच में 8 कमल थे । 1917 मे होम रूल आंदोलन वाला झंडा आया जिसमे 5 लाल व 4 हरी पट्टियां, ऊपर यूनियन जैक और चांद-तारा बना था । 1921 मे गांधी जी के कहने पर पिंगली वेंकैया ने चरखे वाला झंडा बनाया – लाल, हरा, सफेद था। वर्ष 1931मे कराची अधिवेशन से पहले कांग्रेस की झंडा समिति ने देश की प्राचीन संस्कृति और परंपरा के अनुरूप केवल भगवा रंग के ध्वज की सिफारिश की थी। शुरुआत में केवल भगवा (केसरिया) रंग के ध्वज और बीच में नीले चरखे के सुझाव पर विचार किया था। (महात्मा गांधी ने केवल एक रंग (भगवा) रखने के बजाय सभी समुदायों व मूल्यों के प्रतिनिधित्व के लिए तीन रंगों (तिरंगे) का सुझाव दिया, जिसमें सबसे ऊपर भगवा रंग रखा गया।) हालांकि, उस सुझाव को नहीं माना गया और अंततः 1931 में केसरिया, सफेद और हरे रंग के तिरंगे (बीच में चरखे के साथ) को ही राष्ट्रीय आंदोलन के ध्वज के रूप में स्वीकार किया गया। 1947 चरखे की जगह 24 तीलियों वाला अशोक चक्र लगा और ये भारत का राष्ट्रीय ध्वज बना। झंडे की लंबाई व चौड़ाई का अनुपात *3:2* होता है, झंडा संहिता 2002 के बाद आम नागरिक भी सम्मान से घर पर फहरा सकते हैं। 15 अगस्त 1947 को पंडित नेहरू ने लाल किले की प्राचीर से इसे पहली बार फहराया।
भारतीय झंडा संहिता 2002 (Flag Code of India 2002) कानूनों, परंपराओं और निर्देशों का एक ऐसा सेट है जो भारत के राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) को फहराने और प्रदर्शित करने के तौर-तरीकों को नियंत्रित करता है। यह 26 जनवरी 2002 से लागू हुआ था। भारतीय ध्वज संहिता 2002 को तीन भागों में बांटा गया है – भाग I: इसमें राष्ट्रीय झंडे का सामान्य विवरण और उसकी बनावट दी गई है। भाग II: इसमें आम जनता, निजी संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा झंडा फहराने के नियम बताए गए हैं। भाग III: इसमें केंद्र और राज्य सरकारों तथा उनके संगठनों द्वारा झंडा फहराए जाने के निर्देश शामिल हैं। मुख्य नियम और विशेषताएं – इसके तहत देश के आम नागरिक किसी भी दिन, बिना किसी रोक-टोक के सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकते हैं। झंडा सूती, ऊन, रेशम या खादी का बना हो सकता है, जिसे हाथ से या मशीन द्वारा बनाया जा सकता है। झंडे का आकार आयताकार होना चाहिए और इसकी लंबाई तथा चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना चाहिए। झंडा कभी भी जमीन या पानी को स्पर्श नहीं करना चाहिए और न ही फटा या गंदा होना चाहिए।






