राष्ट्र निर्माण में युवाओं का योगदान
सतीश शर्मा 
स्वामी विवेकानंद के अनुसार, युवा अपनी शारीरिक और मानसिक शक्ति से देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। सारी शक्ति तुम्हारे भीतर है, तुम कुछ भी और सब कुछ कर सकते हो। राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका सर्वोपरि और निर्णायक होती है क्योंकि वे किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी, ऊर्जा, नवाचार और प्रगति के सबसे बड़े स्रोत होते हैं। भारत वर्तमान में अपनी सबसे बड़ी युवा आबादी (डेमोग्राफिक डिविडेंड) के दौर से गुजर रहा है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करने का मुख्य आधार है।
युवा नए और इनोवेटिव बिजनेस आइडियाज के साथ देश को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। स्काईरूट जैसे स्पेस स्टार्ट-अप्स इसका बेहतरीन उदाहरण हैं। युवा अब केवल नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से नौकरी देने वाले बन रहे हैं। डिजिटल मीडिया, डिजाइन और कला (ऑरेंज इकोनॉमी) के जरिए युवा वैश्विक स्तर पर देश का नाम और राजस्व बढ़ा रहे हैं।
युवा वैज्ञानिक और इंजीनियर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भारत को वैश्विक लीडर बना रहे हैं। देश के कोने-कोने तक डिजिटल सेवाओं और वित्तीय समावेशन (UPI आदि) को पहुंचाने में युवाओं की मुख्य भूमिका है।आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के रूप में एक आधुनिक आर्थिक और डिजिटल क्रांति बन चुका है।
टॉपरनोट्स के अनुसार, ‘वोकल फॉर लोकल’ स्वतंत्रता संग्राम के स्वदेशी आंदोलन का ही एक आधुनिक विस्तार है, जिसका उद्देश्य न केवल भारतीय उत्पादों का उपयोग करना है बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना भी है।आज के इस आधुनिक स्वदेशी आंदोलन में देश के युवा सबसे आगे खड़े हैं और उनका योगदान अनेकों क्षेत्रों में अतुलनीय है। विदेशी ऐप्स और सॉफ्टवेयर पर निर्भरता कम करने के लिए युवाओं ने देश में ही बने ऐप्स (जैसे मैप्पल्स, कू, और स्वदेशी सोशल मीडिया टूल्स) विकसित किए हैं। युवाओं ने भारत के अपने UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और रुपे कार्ड जैसी स्वदेशी तकनीकों को न केवल अपनाया, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का निर्माण किया।
भारत का युवा उद्यमी एफएमसीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और फैशन के क्षेत्र में स्वदेशी स्टार्ट-अप्स खड़े कर रहे हैं। यूथ इंटरव्यूज के अनुसार, युवा अब गर्व से विदेशी ब्रांड्स की जगह स्वदेशी कंपनियों के उत्पाद चुन रहे हैं। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत युवा भारत में ही मोबाइल, चिप्स और रक्षा उपकरणों के निर्माण को गति दे रहे हैं, जिससे देश आयात पर निर्भर होने के बजाय निर्यातक बन रहा है।
आज अनेकों युवा इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और छोटे व्यवसायों को प्रमोट करने के लिए कर रहे हैं। माई भारत जैसी सरकारी पहलों के माध्यम से युवा स्लोगन वीडियो और रील्स बनाकर ‘लोकल’ को ‘ग्लोबल’ बनाने की मुहिम चला रहे हैं। दिवाली, राखी या होली जैसे त्योहारों पर चीनी सामानों का पूरी तरह बहिष्कार करके मिट्टी के दीये, स्थानीय हस्तशिल्प और खादी को बढ़ावा देने में युवाओं की भूमिका सबसे बड़ी है।
युवाओं ने अपनी रचनात्मकता से कभी ‘बुजुर्गों का पहनावा’ मानी जाने वाली खादी और पारंपरिक हथकरघा (हैंडलुम) वस्त्रों को आधुनिक फैशन स्टेटमेंट में बदल दिया है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय बुनकरों को भारी आर्थिक लाभ मिल रहा है।
अनुसंधान और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता रक्षा स्टार्ट-अप्स क्षेत्र में युवा इंजीनियर्स और रिसर्चर्स भारत की सेना के लिए स्वदेशी ड्रोन, रोबोटिक्स और हथियार प्रणालियों का निर्माण कर रहे हैं। इससे ‘रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी’ का सपना सच हो रहा है।
आज युवा राजनीति में हिस्सा लेकर सही और ईमानदार नेताओं को चुनकर लोकतंत्र को मजबूत कर रहे हैं। कम उम्र में ही शासन व्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं, जैसे 21 वर्ष की आयु में देश की सबसे युवा मेयर बनीं आर्या राजेंद्रन। ये लोग समाज में फैली पुरानी रूढ़ियों, जातिवाद, दहेज प्रथा और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।
देश की रक्षा और सेवा सशस्त्र बल जैसे क्षेत्र में देश की सीमाओं की रक्षा करने में युवा सैनिक (जैसे ‘अग्निपथ योजना’ के तहत अग्निवीर) अपनी जान की बाजी लगाते हैं। आपदा प्रबंधन में बाढ़ या महामारी जैसी राष्ट्रीय आपदाओं के समय युवा स्वयंसेवक सेवा भारती व इसी तरह के अनेकों संगठनों के माध्यम से सबसे पहले मदद के लिए आगे आते हैं। शिक्षित युवा ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा दे रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण में युवाओं का योगदान आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन का सबसे सीधा असर आने वाली पीढ़ी पर ही पड़ने वाला है। आज दुनिया भर के युवा केवल उपदेश नहीं दे रहे हैं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर बदलाव ला रहे हैं। युवा आज वैश्विक मंचों पर सरकारों और बड़ी कंपनियों से पर्यावरण नीतियों को बदलने की मांग कर रहे हैं । लिसिप्रिया कंगुजम (मणिपुर) और रिधिमा पांडे जैसी कम उम्र की लड़कियों ने संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े मंचों पर भारत की तरफ से जलवायु परिवर्तन के खिलाफ आवाज़ उठाई है। भारतीय युवा अपने आस-पास के माहौल को सुधारने के लिए खुद फावड़ा और झाड़ू उठा रहे हैं । पारंपरिक तरीकों के बजाय जापानी तकनीक ‘मियावाकी’ का उपयोग करके कम जगह में घने शहरी जंगल उगा रहे हैं। बंगलुरू और चेन्नई जैसे शहरों में युवा स्टार्टअप्स और एनजीओ के माध्यम से पारंपरिक तालाबों और बावड़ियों को पुनर्जीवित कर रहे हैं। दैनिक जीवन में स्थायी जीवन शैली आज की युवा पीढ़ी अपनी आदतों को बदलकर पर्यावरण के अनुकूल बना रही है। युवा अब कपड़े के थैले, स्टील की बोतलें और बांस के टूथब्रश जैसी चीज़ों को बढ़ावा दे रहे हैं। युवा अपने घरों में सूखे और गीले कचरे को अलग करने और घर पर ही खाद बनाने की आदत अपना रहे हैं।
‘कम चीज़ों में बेहतर जीवन’ जीने की सोच युवाओं में बढ़ रही है, जिससे संसाधनों की बर्बादी कम हो रही है। पढ़े-लिखे युवा पर्यावरण की समस्याओं को हल करने के लिए नए बिज़नेस मॉडल बना रहे हैं, आईआईटी और अन्य संस्थानों के युवा स्टार्टअप्स के जरिए प्लास्टिक कचरे से सड़कें बना रहे हैं, और मंदिर के फेंके हुए फूलों से अगरबत्ती और ऑर्गेनिक रंग तैयार कर रहे हैं। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में युवा इंजीनियर्स और उद्यमी इलेक्ट्रिक साइकिल, स्कूटर्स और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विकसित कर रहे हैं। मिशन लाइफ और स्वच्छ भारत जैसे अभियानों का नेतृत्व युवा ही कर रहे हैं।
भविष्य के युवा पीडी को भी सही दिशा, मार्गदर्शन मिले ,परिवार-स्वजन मे भी संस्कार, व्यवहार, श्रद्धा ,सम्मान बना रहे ,परिवार टूटे नही इस उद्देश्य को लेकर भी काम करना होगा । ” संयुक्त परिवार, संगठित परिवार, सुरक्षित परिवार, सम्पन्न परिवार, व्यवस्थित परिवार, आनंदित परिवार, सुस्वास्थ्य परिवार ” आदि प्रमुख विषय हमारा लक्ष्य रहना चाहिए । वर्तमान समय मे अनेक परिवारो मे अनेक विकृति, भारतीय संस्कृति, परम्परा ,एकल परिवार, पश्चिमी संस्कार हावी होने पर सुरक्षित, सुन्दर, शान्त परिवार टूट रहे है । अनेक समस्या देखाई दे रही है । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस विषय को ध्यान पूर्वक गतिविधि के द्वारा प्रबोधन करने का योजना से देश भर मे सामुहिक प्रबोधन कार्य हो रहे है ।।
संयुक्त परिवार भारतीय सभ्यता, संस्कृति का उत्तम व्यवस्था है । वर्तमान मे परिवार, कुटुम्ब को साथ लेकर चलना, रहन-सहन, भोजन, कार्यक्रम, मार्गदर्शन, सम्मान, आध्यात्मिक धार्मिक कार्य आदि अनेक कार्य संयुक्त परिवार मिलकर करना कठिन देखाई देता है। समय प्रबन्ध, व्यवस्था, परिवार मे संख्या कम होना, विभिन्न व्यवसाय, नोकरी आदि के कारण भी कोई समय समस्या होती है। सभी के साथ समन्वय, सम्पर्क के साथ संयुक्त कुछ कार्य परिवार, कुटुम्ब करे ,मिले, स्नेह, प्रेम, श्रद्धा-सुमन आदि से परिवार सम्पन्न, खुशी, आनंदित, भारतीय संस्कृति आदि भी संरक्षण-संवर्द्धन होता है ।
आधुनिक युवा पारंपरिक भजनों को आधुनिक संगीत और ‘भजन क्लबिंग’ के नए और आकर्षक अंदाज में अपना रहे हैं। युवाओं में भजनों का बदलता स्वरूप भजन क्लबिंग और जैमिंग (Bhajan Jamming) के द्वारा युवा अब डीजे पार्टियों की जगह संगीत समारोहों और क्लबों की तर्ज पर आधुनिक धुनों के साथ सामूहिक रूप से भजन गाते और सुनते हैं। आज की युवा पीढ़ी ने आध्यात्मिकता को पुराना मानने के बजाय इसे अपनी आधुनिक जीवनशैली का एक कूल और सकारात्मक हिस्सा बना लिया है। तेज भागदौड़ भरी जिंदगी में यह ट्रेंड युवाओं को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और अपनी संस्कृति से जोड़ने का एक नया माध्यम बन रहा है।
भूतपूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध डॉ. कलाम युवाओं और छात्रों को कहते थे की सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते,देश के सबसे अच्छे दिमाग क्लासरूम की आखिरी बेंचों पर मिल सकते हैं। युवाओं के पास कुछ अलग सोचने का साहस, आविष्कार करने का साहस और असंभव को खोजने का साहस होना चाहिए। नेल्सन मंडेला ने युवाओं की ताकत और शिक्षा के महत्व को जोड़ते हुए कहा था शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं। आज के युवा कल के नेता हैं, और वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की सबसे बड़ी क्षमता रखते हैं। बाबासाहेब अम्बेडकर ने युवाओं को मानसिक और सामाजिक रूप से मजबूत होने का संदेश दिया,शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो। श्री गुरुजी ने युवा स्वयंसेवकों के साथ बात करते हुए कहा था की नारों या राजनीतिक सत्ता से देश मे बदलाव नहीं होने वाला । उनका मानना था कि राष्ट्र का उत्थान अनुशासित नागरिकों से होता है। उन्होंने युवाओं से कहा था कि वे “अंग्रेजी के बड़े ‘M’ वाले Men (सच्चे मनुष्य) बनें”, जो केवल अपने सुख-सुविधाओं के पीछे न भागें। वे संघ की दैनिक ‘शाखा’ को चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला मानते थे, जहाँ युवा अनुशासन, शारीरिक शक्ति और सामूहिक सद्भाव सीखते हैं।
महाकाल ने परिवर्तन का क्रम फिर से दोहराया है,
इस धरती पर स्वर्ग सर्जन का संदेशा पहुंचाया है,
आओ नवयुग की प्रतिमा मे करें प्रतिष्ठा प्राण की ।
अज्ञान को दूर भगाएं ज्ञान का उजाला करें। गरीब बेसहारा बच्चों कि शिक्षा हेतु सहायता करने के लिए निम्नलिखित खाते में दान करें।
सुमन संगम आश्रय
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