MDR क्या है ओर विवाद क्यों,UPI पेमेंट का तरीका क्या है
सतीश शर्मा 
विपक्ष का आरोप है कि सरकार यूपीआई सेवाओं को अब महंगा कर रही है। विपक्ष का दावा है कि इससे दुकानदारों पर बोझ बढ़ेगा, जिसका असर अंततः आम जनता की जेब पर पड़ेगा। आओ समझे खेल क्या है । यूपीआई (UPI) व्यवस्था को साल 2016 में लॉन्च किया गया था, लेकिन जनवरी 2020 में सरकार ने ‘ज़ीरो एमडीआर’ नीति लागू की थी, जिसके तहत यूपीआई को आम जनता और व्यापारियों के लिए पूरी तरह मुफ्त कर दिया गया था। सरकार द्वारा इस पूरी व्यवस्था को बढ़ावा देने के पीछे मुख्य उद्देश्य भारत को एक कैशलेस अर्थव्यवस्था बनाना और डिजिटल भुगतान को हर नागरिक तक पहुँचाना था।
भारत में नकदी के रख-रखाव, नोटों की छपाई और उनके परिवहन पर सरकार और बैंकों का भारी खर्च होता था। यूपीआई को लाकर सरकार कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देना चाहती थी। डिजिटल भुगतान से हर लेन-देन का रिकॉर्ड बनता है, जिससे अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आती है और काले धन पर रोक लगती है। देश के करोड़ों लोग, विशेषकर ग्रामीण और गरीब वर्ग, बैंकिंग प्रणाली से दूर थे। सरकार का लक्ष्य था कि एक साधारण मोबाइल फोन और इंटरनेट (या बिना इंटरनेट के भी) के जरिए रेहड़ी-पटरी वालों, छोटे दुकानदारों और आम नागरिकों को सीधे बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा जाए।पहले नेट बैंकिंग (NEFT/RTGS/IMPS) या कार्ड पेमेंट के लिए बैंक अकाउंट नंबर, IFSC कोड याद रखना पड़ता था या कार्ड स्वाइप चार्ज देना पड़ता था। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित यूपीआई ने इसे केवल एक UPI ID या QR कोड स्कैन करने जितना आसान बना दिया। जनवरी 2020 में सरकार ने इसे पूरी तरह मुफ्त कर दिया ताकि दुकानदार बिना किसी हिचकिचाहट के इसे अपना सकें।
यूपीआई इकोसिस्टम और आधार कार्ड के मजबूत होने से सरकार के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर करना बेहद आसान हो गया। इससे पेंशन, सब्सिडी और राशन का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में बिना किसी बिचौलिए या भ्रष्टाचार के तुरंत पहुंचने लगा। 2020 की शुरुआत में जब देश में कोविड-19 महामारी फैली, तो सोशल डिस्टेंसिंग के कारण नोटों के लेन-देन को जोखिम भरा माना गया। उस समय सरकार की इस डिजिटल व्यवस्था ने बिना छुए भुगतान के रूप में देश की अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन को चालू रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। UPI एक ऐसा डिजिटल सिस्टम है जो आपको अपने मोबाइल फोन से तुरंत एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देता है। इसे NPCI (National Payments Corporation of India) ने बनाया है और इसे रिजर्ब बँक आफ इंडिया कंट्रोल करता है। अगर आसान शब्दों में कहें तो, यह आपकी जेब में मौजूद एक डिजिटल बटुआ है, जिससे आप बिना किसी बैंक के चक्कर काटे, कभी भी पैसे भेज या पा सकते हैं। UPI इस्तेमाल करने से जीवन सहज हो गया है,इसके जरिए पैसे पलक झपकते ही सामने वाले के बैंक अकाउंट में पहुंच जाते हैं। इसमें कोई वेटिंग पीरियड नहीं होता,समय की बचत होती है। एक ओर फायदा है की बैंक डिटेल्स की जरूरत नहीं, पैसे भेजने के लिए आपको सामने वाले का अकाउंट नंबर या IFSC कोड डालने की जरूरत नहीं होती। आप सिर्फ उनके मोबाइल नंबर, UPI ID (जैसे: name@upi) या QR Code को स्कैन करके पैसे भेज सकते हैं। एक ही ऐप में कई बैंक अकाउंट: आप अपने अलग-अलग बैंकों के अकाउंट्स को किसी भी एक UPI ऐप जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm, या BHIM से जोड़ सकते हैं। UPI डिजिटल सिस्टम साल के 365 दिन और 24 घंटे काम करता है, चाहे रविवार हो या कोई सरकारी छुट्टी फिर यह पूरी तरह सुरक्षित हर ट्रांजैक्शन को पूरा करने के लिए आपको एक गुप्त UPI PIN डालना होता है, जो सिर्फ आपको पता होता है।
अब यह जाने की यह काम कैसे करता है? कोई भी अपने मोबाइल में कोई भी UPI ऐप डाउनलोड कर सकता हैं। आप अपना बैंक अकाउंट लिंक करते हैं तो एक UPI ID और UPI PIN सेट करना पढ़ता हैं बस तैयार है आपका UPI डिजिटल सिस्टम। किसी को पैसे भेजने के लिए उसका नंबर या QR कोड स्कैन करे अमाउंट डाले और या जैसे ही आप अपना PIN दर्ज करते है तो पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं। इतनी आसान सुविधा के कारण से ही UPI डिजिटल सिस्टम इतना लोकप्रिय हुआ ।
अब जानते है की MDR क्या है ओर विवाद क्यों है व नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी नए नियम क्या है ? पहले तो समझे की आम जनता या ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट अभी भी पूरी तरह से मुफ्त है! हाल ही में जो शुल्क या MDR लगाने का फैसला लिया गया है, वह ग्राहकों को नहीं, बल्कि दुकानदारों/व्यापारियों को देना होगा। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी नए नियमों के मुताबिक,पर्सन-टू-पर्सन क्या नियम है तो जाने की जब आप अपने किसी दोस्त या परिवार वाले को पैसे भेजते हैं, तो वह हमेशा की तरह बिल्कुल फ्री रहेगा यानि कोई शुल्क नहीं लगेगा । कितनी राशि की खरीदारी करने पर क्या शुल्क लगेगा तो निया यह है की किसी भी दुकान या ऑनलाइन मर्चेंट को ₹2,000 तक का पेमेंट करने पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। जब आप किसी बड़े शोरूम, ब्रांड या ऑनलाइन मर्चेंट को ₹2,000 से ज्यादा का पेमेंट करेंगे, तो सिर्फ व्यापारी को 0.4% शुल्क देना होगा।
सरकार और बैंकों द्वारा शुल्क (MDR) लगाने की मुख्य वजह यह है की भारत में हर महीने अरबों UPI ट्रांजैक्शन होते हैं । इस भारी ट्रैफिक को संभालने के लिए बैंकों और पेमेंट कंपनियों (जैसे Google Pay, PhonePe) को बहुत बड़े और महंगे सर्वर लगाने पड़ते हैं । इस सिस्टम को चलाने का खर्च निकालने के लिए राजस्व की जरूरत थी। साइबर सुरक्षा और फ्रॉड से बचाव,डिजिटल पेमेंट्स के बढ़ने के साथ-साथ ऑनलाइन फ्रॉड का खतरा भी बढ़ गया है । नए सिक्योरिटी फीचर्स लाने और ट्रांजैक्शन को सुरक्षित रखने के लिए लगातार निवेश की जरूरत होती है। साल 2020 से UPI को पूरी तरह फ्री (Zero MDR) रखा गया था।लेकिन बैंकों और फिनटेक कंपनियों का कहना था कि बिना किसी कमाई के इस बड़े सिस्टम को लंबे समय तक मुफ्त में चला पाना मुमकिन नहीं है । सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि इसका बोझ आम ग्राहकों और छोटे दुकानदारों जैसे गली-मोहल्ले के किराना स्टोर पर न पड़े। इसीलिए छोटे दुकानदारों को इस दायरे से बाहर रखा गया है और बड़े ट्रांजैक्शंस पर यह शुल्क केवल बड़े व्यापारियों से लिया जा रहा है। सरकार और वित्त मंत्रालय ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मर्चेंट्स इस चार्ज को ग्राहकों के बिल में जोड़कर उनसे वसूल नहीं कर सकते हैं। इसलिए आपको किसी भी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
आओ नवयुग की प्रतिमा मे करें प्रतिष्ठा प्राण की ।
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