हामिद के बिगड़े बोल
ललित शंकर हरिद्वार 
देश मे रहकर देश मे ही सबकुछ पाने के बाद भी देश की बदनामी करना कुछ लोगों की फितरत हो गई है।उन्ही में एक नाम है पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का।हामिद अंसारी दो बार भारत के उपराष्ट्रपति रहे,राज्यसभा के सभापति रहे,अड़तीस वर्षों तक राजनायिक रहते हुए सयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि रहे,सयुंक्त अरब अमीरात,ऑस्ट्रेलिया, ईरान,अफगानिस्तान,सऊदी अरब में राजदूत रहे।अल्पसंख्यक आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे,अलीगढ़ विश्वविद्यालय में उपकुलपति रहे,जेएनयू व जामिया जैसे शिक्षण संस्थानों में विजिटिंग प्रोफेसर रहे,राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य रहे,भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के अध्यक्ष रहे।इन सबके अतिरिक्त अन्य भी कई जिम्मेदारी हामिद अंसारी पर रही।इसके बाबजूद भी हामिद अंसारी भारत को बदनाम करने से बाज नही आ रहे।अभी एक कार्यक्रम में उन्होंने एजी नूरानी की एक पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि हिन्दू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को देश के लिये खतरा बताया है।उनका सीधा निशाना सनातन पर था।हामिद अंसारी को जब भी मौका मिला वो सनातन व राष्ट्र के खिलाफ बोलते हैं।इससे पहले भी उन्होंने इतना सबकुछ इस देश के पाकर ऐसे बिगड़े बोल बोले हैं।हामिद अंसारी ने 2017 में एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत मे मुस्लिम असुरक्षित हैं।उनको भारत मे खतरा दिखाई दे रहा है,2015 में यही हामिद अंसारी ने राष्ट्रगान नही गाकर सलामी नही दी थी,इन्ही हामिद अंसारी ने योगदिवस के एक कार्यक्रम में निमंत्रण मिलने पर मजहबी मजबूरी बताकर ये कहकर नही नही गए थे कि योग सनातन का हिस्सा है। इन्होंने एएमयू में लगे जिन्ना के चित्र का विरोध होने पर खुलकर उसका समर्थन किया था, 2022 में उन्होंने भारत मे सनातन परम्पराओ का जिक्र करते हुए कहा था कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद बढ़ता जा रहा है जो देश के लिये खतरा है।इसके अतिरिक्त भी कई बार देश व सनातन के विरोध में बिगड़े बोल बोले हैं।सोचने का विषय है कि इस देश से इतना सम्मान,पद प्रतिष्ठा ,धन सबकुछ पाकर भी उनको इस देश से लगाव नही हुआ,असुरक्षा महसूस होती है।जब भी मौका मिलता है ये देश को बदनाम करने से बाज नही आते।उनको इस देश मे दूसरा सर्वोच्च पद पाकर भी खतरा लगता है।वेसे तो इनका राजदूत वाला कार्यकाल भी शक के घेरे में है।उनके राजदूत रहते हुए भारत के रॉ एजेंटों की बड़ी संख्या में उन देशों में मौत हुई जंहा जंहा ये राजदूत थे।इनको भारत मे शांति से रह रहे मुश्लिम खतरे में नजर आते है।लेकिन बंग्लादेश में लक्षित करके मारे गए हिंदुओ की दर्दनाक हत्याओं पर कुछ नजर नही आता।इनको कश्मीर में धर्म पूछकर मजहबी नारे लगाकर हिंदुओ को परिवार के सामने मारने पर दुख नही होता, आतंकी घटनाओं पर दुख नही होता।समझने का विषय है कि आखिर हामिद अंसारी ये सब क्यो करते हैं।ये सब उनकी सोची समझी योजनात्मक सोच है।क्योंकि उनकी सोच में भारत तथा सनातन का विरोध ही है।उनकी हरकतों को देखकर महसूस होता है कि उन्होंने देश को अपना माना ही नही।इसीलिए वो ऐसे बिगड़े बोल लगातर बोलते रहते हैं।भारत की जनता को ऐसे लोगों की सोच व योजना को समझकर उसका विरोध करना ही होगा।






